पाबू -1

भाद्रपद मास की बरसात सी झूमती हुई एक बारात जा रही थी | उसकी बारात जिसने विवाह पहले ही सूचना दे दी थी कि- ‘ मेरा सिर तो बिका हुआ है , विधवा बनना है तो विवाह करना !’ उसकी बारात जिसने प्रत्युतर दिया था – जिसके शरीर पर रहने वाला सिर उसका नहीं है […]

तुम सब जानती व्यथा हमारी किसको पुकारें माँ

तुम सब जानती व्यथा हमारी किसको पुकारें माँ |सपनो की नगरी सूनी है उजड़ा उपवन माँ || प्राण पपीहे ने पी पी करके नभ मंडल है छाना |प्यास बुझाने को आतुर यह जीवन एक बहाना ||चाँद सितारे दे गए धोखा ज्योति न दिखती माँ | नाज हमें है इन गीतों पर इस स्वर को ले […]

वैरागी चित्तौड़ -3

वैरागी चित्तौड़ -3

वैरागी चित्तौड़-1 वैरागी चित्तौड़ -2  विस्मृति बता रही है- यह तो रानी पद्मावती का महल है | इतिहास की बालू रेत पर किसी के पदचिन्ह उभरते हुए दिखाई दे रहे है | समय की झीनी खेह के पीछे दूर से कही आत्म-बलिदान का,उत्सर्ग की महान परम्परा का कोई कारवां आ रहा है | उस कारवां […]

वैरागी चित्तौड़ -2

वैरागी चित्तौड़ -2

वैरागी चित्तौड़ भाग १ से आगे…. यह दुर्ग का अन्तिम द्वार है, जहाँ प्राणों की बाजी लग जाया करती थी; जवानी म्रत्यु को धराशायी कर दिया करती थी; कर्तव्य यहाँ यौवन की कलाईयां पकड कर मरोड़ दिया करता था; उमंगे यहाँ तलवार की धार पर नाचने लग जाया करती थी ;विलास वैभव और सुख यहाँ […]

वैरागी चित्तौड़-1

वैरागी चित्तौड़-1

स्व.श्री तनसिंहजी की कलम से…. यह चित्तौड़ है, जिसके नाम से एक त्वरा उठती है, एक हूक बरबस ह्रदय को मसोस डालती है; किंतु जिसने अपनी आंखों से देखा है उसकी द्रष्टि भावनाए बनकर लेखनी में उतर जाया करती है और फ़िर कागजों के कलेजे कांपने लग जाया करते है| इतिहास के इतने कागज रंगने […]

भारत का मान बिन्दु

भारत का मान बिन्दु ,तिरंगा यह झंडा हमारा |मर के अमर हो जाना, पर ये झंडा ना झुकाना ||लाखों चढ़े थे शमा पर किंतु बुझने न दी ये ज्योति |बलिदानों की ये कथाएँ बातों में ना तुम भुलाना ||बूंदी की शान कुम्भा ने, मेवाड़ में लड़कर बचायी |उसने नकली किला बचाया, तुम असली निशां ना […]

हम भूल चुके है हाँ

हम भूल चुके है हाँ हम भूल चुके है जिस पीड़ा को उसको फ़िर उकसानी है |केसरिया झंडा सुना रहा है हमको अमर कहानी || ऋषि मुनियों की जन्म भूमि यह भारत इसका नाम देवों की अवतार भूमि यह सतियों का प्रिय धाम दूर देश से भिक्षुक आते थे विद्या के काम इतिहास बताते हाँ […]

क्षत्रिय वंदना

क्षत्रिय कुल में जन्म दिया तो ,क्षत्रिय के हित में जीवन बिताऊं |धर्म के कंटकाकीर्ण मग पर ,धीरज से में कदम बढ़ाऊँ ||भरे हलाहल है ये विष के प्याले ,दिल में है दुवेष के हाय फफोले |जातीय गगन में चंद्र सा बन प्रभु, शीतल चांदनी में छिटकाऊँ ||विचारानुकुल आचार बनाकर ,वास्तविक भक्ति से तुम्हे रिझाऊँ […]