राजस्थानी भाषा के मूर्धन्य साहित्यकार, इतिहासकार ठाकुर सौभाग्य सिंह शेखावत

राजस्थानी भाषा साहित्य और इतिहास के उन्नयन के लिए राजस्थान और राजपूत समाज अपने जिन साहित्य व इतिहास साधक सपूतों पर गर्व कर सकता है, उनमें सौभाग्यसिंह शेखावत का विशिष्ट स्थान है| आपने अनवरत जीवनभर राजस्थानी भाषा, साहित्य, संस्कृति और इतिहास की मनोयोगपूर्वक मौन साधना की है| राजस्थान के पर्वतों, वनों, दुर्गों और झोंपड़ीयों के […]

कमलेश चौहान के उपन्यास “सात फेरों का धोखा” का लोकार्पण

पंजाब कला साहित्य अकादमी द्वारा दिल्ली के हिंदी भवन में दिनांक ११ अक्टूबर २०११ को ३ बजे से शाम ६ बजे के बीच आयोजित एक विचार गोष्ठी में लांस एंजिल्स केलिफोर्निया में रहने वाली प्रवासी भारतीय लेखिका कमलेश चौहान द्वारा हिंदी भाषा में लिखे उपन्यास “सात फेरों का धोखा” का लोकार्पण किया गया| इस अवसर […]

पद्म श्री डा.रानी लक्ष्मीकुमारी चुण्डावत : परिचय

लक्ष्मीकुमारी चुण्डावत का जन्म तत्कालीन उदयपुर राज्य (मेवाड़) के देवगढ ठिकाने में दिनांक २४ जून १९१६ (वि.स.१९७३ आषाढ़ शुक्ल ९ ) को हुआ था | आपके पिताजी का नाम रावत विजयसिंह जी व दादा का नाम रावत किशनसिंह जी था | आपकी माता रानी नन्दकुंवर मेवाड़ के झाला कुल में देलवाड़ा के राजराणा जालमसिंह जी […]

इतिहास के गौरव ठा. सुरजनसिंह शेखावत एक परिचय

झाझड ग्राम के प्रथम वीर प्रतापी नर-रत्न ठा.श्री पृथ्वीसिंह शेखावत के कुल में जन्मे (दिनांक 23 दिसम्बर,1910) श्री सुरजनसिंह ने बाल्यकाल से ही अपने धर्मनिष्ठ पिताश्री ठा.गाढसिंहजी के श्री चरणों में बैठकर गीता पढना सिखा | आपकी रूचि आध्यात्म-चिंतन से जुड़ गयी और वह अध्यावधि जुडी हुई है | आनन्दाभूति के लिए यही आत्म-चिंतन आपका […]

मुंहणोंत नैणसीं : राजस्थान का पहला इतिहासकार मुंहता नैणसी

राजस्थान का हर दुर्ग,किला,गढ़,गढ़ी,पहाड़,घाटी,दर्रे,व एक एक हथियार शौर्य व समृद्ध इतिहास से जुड़ा है | इतिहासकारों के अनुसार पुरे यूरोप में सिर्फ एक थर्मोपल्ली हुआ पर यहाँ के हर शहर,कस्बे,नदी घाटियाँ,खोह थर्मोपल्ली जैसे इतिहास से भरी पड़ी है | इतना वैभवशाली शौर्यपूर्ण इतिहास होने के बावजूद राजस्थान के इतिहास लेखन पर बहुत कण कार्य हुआ […]

राजस्थानी कहावतें हिन्दी व्याख्या सहित -2

घणा बिना धक् जावे पण थोड़ा बिना नीं धकै |अधिक के बिना तो चल सकता है,लेकिन थोड़े के बिना नही चल सकता |मनुष्य के सन्दर्भ में अधिक की तो कोई सीमा नही है – दस,बीस,सौ,हजार,लाख,अरब-खरब भी सीमा का अतिक्रमण नही कर सकते | सामान्य अथवा गरीब व्यक्ति के लिए अधिक धन के बिना तो जीवन […]

कुछ राजस्थानी कहावतें हिंदी व्याख्या सहित

घोड़ा रो रोवणौ नीं,घोड़ा री चाल रौ रोवणौ है |=घोडे का रोना नही घोडे की चाल का रोना है | एक चोर किसी का घोड़ा ले गया | पर घोडे के मालिक को घोडे की चिंता नही थी | उसका रोना तो फकत इस बात का था कि अन्भिज्ञ चोर घोडे की चाल बिगाड़ देगा […]

स्व. तनसिंह जी: एक अद्भभुत व्यक्तित्व का परिचय

मैंने स्व.श्री तनसिंह जी के लिखे कई लेख इस चिट्ठे पर प्रस्तुत किए है आज मै श्री तनसिंह जी का संक्षिप्त परिचय आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ हालाँकि उनके अद्भुत व्यक्तित्व पर एक पुरी पुस्तक ही लिखी जा सकती है फ़िर भी मै अपने इस छोटे से लेख के माध्यम से स्व.पु.तनसिंहजी का परिचय […]

Saubhagy Singh Shekhawat Rajasthani Sahitykar Itihaskar

प्राचीन राजस्थानी साहित्य के मर्मघे विद्वान् एवं मूर्धन्य साहित्यकार श्री सोभाग्य सिंह जी का जन्म२२ जुलाई १९२४ को सीकर जिले के भगतपुरा गाँव में हुआ राजपूत परिवार में जन्मे श्री शेखावतके पैत्रिक गाँव के समीपस्त खूड आपके पूर्वजों का बड़ा ठिकाना रहा है श्री शेखावत पिछले पॉँचदशक से राजस्थानी प्राचीन साहित्य के उद्धार और अनुशीलन […]