सामंतवाद : आलोचना का असर कहाँ ?

देश की आजादी समय देशी रियासतों का भारत में विलय के बाद देश भर से सामंती राज्य का खात्मा हो गया और राजा, महाराजाओं, नबाबों, जागीरदारों सहित सभी सामंत ख़ास से आम आदमी हो गये, देश के संविधान ने उन्हें भी आम आदमी के बराबर अधिकार दिए और इसी अधिकार का उपयोग करते हुए कई […]

क्या ये नव सामंतवाद नहीं ?

हमारे देश में सदियों से राजतन्त्र प्रणाली शासन प्रणाली चलती रही धीरे धीरे इस प्रणाली में संघ राज्य की शक्तियाँ क्षीण होती गयी और नतीजा छोटे छोटे स्वतंत्र राज्यों ने जन्म ले लिया, कई सारे स्वतंत्र राज्य होने, उन पर कई वंशानुगत अयोग्य शासकों के आसीन होने के चलते हमारी शासन प्रणाली में कई तरह […]