यहाँ के वीरों के आगे भी भागी थी हुमायूँ की सेना

यहाँ के वीरों के आगे भी भागी थी हुमायूँ की सेना

मुग़ल शासकों ने भारत में अपने राज्य की जड़ें ज़माने व उसे मजबूत करने के उद्देश्य से हर छोटे-बड़े राज्य को अधीन करने के लिए सेनाएं भेजी| इसी श्रंखला में हुमायूँ की नजर राव शेखाजी द्ववारा स्थापित नवराज्य शेखावाटी पर पड़ी| हुमायूँ ने शेखावाटी के शासक राव रायमल जी के अपने सन्देश वाहक भेजकर कहलाया […]

राव शेखा जी का आमेर से युद्ध और विजय

Rao Shekha history in Hindi, Rao Shekhaji, Shekhawati, Shekhawat Vansh राव शेखा के दादा बालाजी आमेर से अलग हुए थे | अतः अधीनता स्वरूप कर के रूप में प्रतिवर्ष आमेर को बछेरे देते थे | शेखा के समय तक यह परम्परा चल रही थी | राव शेखा ने गुलामी की श्रंखला को तोड़ना चाहा | […]

महाराव शेखाजी का घाटवा युद्ध

महाराव शेखाजी का घाटवा युद्ध

एक स्त्री की मान रक्षा के लिए महाराव शेखाजी ने झुन्थर के कोलराज गौड़ का सर काट कर अपने अमरसर के गढ़ के सदर द्वार पर टंगवा दिया,ऐसा करने का उनका उद्देश्य उदंड व आततायी लोगों में भय पैदा करना था हालांकि यह कृत्य वीर धर्म के खिलाफ था शेखा जी के उक्त कार्य की […]

राजस्थानी भाषा के मूर्धन्य साहित्यकार, इतिहासकार ठाकुर सौभाग्य सिंह शेखावत

राजस्थानी भाषा के मूर्धन्य साहित्यकार, इतिहासकार ठाकुर सौभाग्य सिंह शेखावत

राजस्थानी भाषा साहित्य और इतिहास के उन्नयन के लिए राजस्थान और राजपूत समाज अपने जिन साहित्य व इतिहास साधक सपूतों पर गर्व कर सकता है, उनमें सौभाग्यसिंह शेखावत का विशिष्ट स्थान है| आपने अनवरत जीवनभर राजस्थानी भाषा, साहित्य, संस्कृति और इतिहास की मनोयोगपूर्वक मौन साधना की है| राजस्थान के पर्वतों, वनों, दुर्गों और झोंपड़ीयों के […]

ठाकुर देवीसिंह मंडावा, बहुआयामी, अविस्मर्णीय व्यक्तित्व

ठाकुर देवीसिंह मंडावा, बहुआयामी, अविस्मर्णीय व्यक्तित्व

लेखक : ठा.सौभाग्य सिंह शेखावत लोक जीवन और लोकमानस में वे ही पात्र गरिमामय स्थान प्राप्त कर सकते है जिनमें सामान्यजन से कुछ विशिष्टताएँ होती है अथवा अतिमानवीय गुण होते है। ऐसे चरित्र समाज में वंदनीय बनकर युग-युगान्तर तक अजर-अमर बने रहते है। वे लोकादर्श, लोक स्मरणीय और जनमानस के प्रेरणा स्त्रोत बन जाते है। […]

कर्नल नाथू सिंह शेखावत : शख्सियत परिचय

कर्नल नाथू सिंह शेखावत : शख्सियत  परिचय

कर्नल नाथूसिंह शेखावत कर्नल नाथूसिंह शेखावत का जन्म 7 मार्च सन 1946 में राजस्थान के शेखावाटी आँचल में झुंझुनू जिले के गांव “ढाणी-बाढान” के ठाकुर श्री शाहजादसिंह के घर हुआ| ठाकुर शाहजादसिंह जी पंजाब रेजिमेंट के बहादुर सैनिक थे वे द्वितीय विश्व युद्ध में फ़्रांस, इटली व यूरोपीय क्षेत्र में बहादुरी के लिए अलंकरित किये […]

अपने अतीत और जड़ों से जुड़ने की हसरत और कामयाबी

उतरप्रदेश के बिजनौर जनपद जिसे मुगलकाल में मधी क्षेत्र (जनपद) के नाम से जाना जाता था में बसे शेखावत राजपूतों के गांवों की नई पीढ़ी के लोग अपने बुजुर्गों से अक्सर सुनते थे कि- वे राजस्थान के सीकर- खेड़ी से आये महाराज मुकट सिंह शेखावत के वंशज है| महाराज मुकट सिंह ने राजस्थान से आकर […]

राव टोडरमल-उदयपुर (शेखावाटी)

राव टोडरमल-उदयपुर (शेखावाटी)

राव भोजराज जी के यशस्वी पुत्र टोडरमल ने उदयपुरवाटी की बागडोर संभाली। टोडरमल जी भोजराज जी की जादव ठकुरानी के पुत्र थे। वि.स.1684 के करीब अपने पिता के जीवनकाल में ही वे उदयपुर में रहने लगे थे। इसके पूर्व ही उनकी वीरता प्रकट होने लग गयी थी। वि. स.1680 से पूर्व वे महाराजा जय सिंह […]

पूर्व राष्ट्रपति स्व.श्री भैरोंसिंह जी द्वारा “विरासत रक्षा” का काव्य वर्णन

राजस्थान में स्थित ऐतिहासिक किले, राजमहल, हवेलियाँ राजस्थान की ही नहीं भारत सहित पुरे विश्व की धरोहर है| इस धरोहर व राजस्थान की इस ऐतिहासिक विरासत को बचाए रखने में स्व.भैरोंसिंह जी द्वारा अपने मुख्यमंत्री काल में इन्हें हेरिटेज का दर्जा देना बहुत सहायक सिद्ध हुआ| स्व.भैरोंसिंह जी के प्रयासों से ही आज राजस्थान की […]

पूर्व उपराष्ट्रपति स्व.श्री भैरोंसिंह जी की मूर्ति का अनावरण समारोह 15 मई को

पूर्व उपराष्ट्रपति स्व.श्री भैरोंसिंह जी की मूर्ति का अनावरण समारोह 15 मई को

राष्ट्र गौरव, जनहृदय सम्राट, राजीनीति के युग पुरुष पूर्व उपराष्ट्रपति स्व. श्री भैरों सिंह जी शेखावत (बाबोसा) की आदमकद प्रतिमा का अनावरण उनकी द्वितीय पुण्यतिथि के अवसर पर उनके पेतृक गांव खाचरियावास जिला सीकर राजस्थान में एक बहुत बड़े समारोह में श्री लालकृष्ण आडवानी व श्री प्रकाश सिंह बादल 15 मई 2012 को सुबह दस […]

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