हठीलो राजस्थान-41, राजस्थान की गर्मी पर दोहे

हठीलो राजस्थान-41, राजस्थान की गर्मी पर दोहे

बीजल सी चंचल लुवां, नागण सी खूंखार | पाणी सूँ पतली घणी, पैनी धार कटार ||२४४|| राजस्थान में चलने वाली गर्म हवाएं बिजली सी चंचल है ,नागिन सी भयावह है , पानी से भी पतली है तथा कटार की धार सी तीक्षण है || बालै , चूंवै अंग सूँ, नह दीसै नैणांह | भूतण सी […]

हठीलो राजस्थान-39, वीर रस के सौरठे

हठीलो राजस्थान-39, वीर रस के सौरठे

गरम धरा, गरमी गजब, गरम पवन परकास | सूरां तणों सभाव ओ, इला तणों उछवास ||२३२|| यहाँ (राजस्थान)की धरती गर्म है, यहाँ गजब ढाने वाली गर्मी पड़ती है | हवाएं भी गर्म चलती है | उपरोक्त गर्मी यहाँ बसने वाले शूरवीरों के उग्र स्वभाव का प्रभाव है अथवा यहाँ की धरती द्वारा छोड़ी गए उच्छवासों […]

हठीलो राजस्थान-38

हठीलो राजस्थान-38

उलझी टापां आंतड़यां, भालां बिन्धयो गात | भाकर रो भोम्यों करै, डाढ़ा घोडां घात ||२२७|| घोड़े पर सवार शिकारी जंगल में सूअर पर प्रहार करता है -भाले से सूअर का शरीर बिंध गया है | घायल सूअर पर शिकारी के घोड़े के पैर जाकर गिरने से उसकी आंतडियां प्रभावित हुई है पर फिर भी पहाड़ […]