रानी अवंतीबाई

रानी अवंतीबाई

भारत की आजादी के लिए अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र आन्दोलन सन 1857 में प्रचण्ड रूप से हुआ था. देश के बहुत सारे राजा, महाराजा, बादशाह, सामंत, जागीरदार इस संघर्ष में शामिल थे| देश में प्रचलित रुढ़िवादी रीति-रिवाजों, परम्पराओं के कारण भारतीय सवतंत्रता संग्राम में भारतीय महिलाएं समुचित स्थान पाने में हालाँकि वंचित रही, फिर भी […]

कहाँ है रानी पद्मिनी का जन्म स्थान ?

कहाँ है रानी पद्मिनी का जन्म स्थान ?

चितौड़ की रानी पद्मिनी जिसे रानी पद्मावती के नाम से भी जाता है, अपनी बहादुरी, त्याग, बलिदान व अप्रितम सौन्दर्य के लिए इतिहास में विश्व विख्यात है, रानी पद्मावती के जौहर की कहानी बिना राजस्थान का इतिहास भी अधुरा लगता है| राजस्थान सहित भारतवर्ष के इतिहासकारों, लेखकों, साहित्यकारों ने रानी पद्मिनी के जौहर पर बहुत […]

हुंकार की कलंगी : लोक कथा

हुंकार की कलंगी : लोक कथा

उदयपुर के महलों में राणा जी ने आपात सभा बुला रखी थी| सभा में बैठे हर सरदार के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ़ नजर आ रही थी, आँखों में गहरे भाव नजर आ रहे थे सबके हाव भाव देखकर ही लग रहा था कि किसी तगड़े दुश्मन के साथ युद्ध की रणनीति पर गंभीर […]

कहानी एक राजपूतानी की….

कहानी एक राजपूतानी की….

गर्मियों का मौसम था बाड़मेर संभाग में रेत के टीले गर्मी से गर्म होकर अंगारों की तरह दहक रहे थे| लूएँ ऐसे चल रही थी कि बाहर बैठे जीव को झुलसा दे| इस तरह नीचे धरती गर्मी से तप रही थी तो ऊपर आसमान झुलस रहा था| वहीँ खेजडे के एक पेड़ की छाया में […]

सुहाग पर भारी पड़ा राष्ट्र के प्रति कर्तव्य

सुहाग पर भारी पड़ा राष्ट्र के प्रति कर्तव्य

रावल अखैसिंह की मृत्युपरांत सन १७६२ में रावल मूलराज जैसलमेर की राजगद्दी पर बैठे | उनके शासन काल में उनका प्रधानमंत्री स्वरूपसिंह जैन जो वैश्य जाति का था बहुत भ्रष्ट व स्वेछाचारी था | उसके षड्यंत्रों से सभी सामंत बहुत दुखी व नाराज थे पर प्रधान स्वरूपसिंह जैन ने रावल मूलराज को अपनी मुट्ठी में […]

महिला दिवस

महिला दिवस

सब कह रहे है कि आज महिला दिवस है…. अच्छा ? फिर ठीक है भाई सबको महिला दिवस पर हार्दिक शुभकामनाये महिला दिवस पर कुछ ऐसी नामी गिरामी महिलाये है जिनको कई तरह के सम्मान से नवाजा जायेगा उन सभी को मेरा शत शत नमन जिन्होंने किसी ने किसी क्षेत्र में उपलब्धि हासिल की है […]