दिल्ली में गूंजी राजस्थानी होली गीतों की स्वर-लहरियां

दिल्ली में गूंजी राजस्थानी होली गीतों की स्वर-लहरियां

देश की राजधानी दिल्ली के आयानगर खेल परिसर में शनिवार शाम आठ बजे से देर रात तक रामगढ शेखावाटी से आये राजस्थानी कलाकारों ने होली गीतों पर थिरकते हुए शमा बांधे रखी| कार्यक्रम का आयोजन राजस्थानी संस्कृति परिषद, आयानगर दिल्ली द्वारा किया गया| इस अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रहने वाले सैकड़ों परिवारों के […]

व्यापार ही नहीं शौर्य में भी कम ना रहे है बणिये

व्यापार ही नहीं शौर्य में भी कम ना रहे है बणिये

स्वाभिमान के मामले में समझौता करने वाले लोगों पर अक्सर लोग व्यंग्य कसते सुने जा सकते है कि- “बणिये की मूंछ का क्या ? कब ऊँची हो जाये और कब नीची हो जाय ?” राजस्थान में तो एक कहावत है –गाँव बसायो बाणियो, पार पड़े जद जाणियो” कहावत के जरिये बणिये द्वारा बसाये किसी गांव […]

राजस्थान के सूखे मेवे : केर, सांगरी, कुमटिया

राजस्थान के सूखे मेवे : केर, सांगरी, कुमटिया

राजस्थान में वर्षा की कमी व सिंचाई के साधनों की कमी की वजह से हरी सब्जियों की पहले बहुत कमी रहती थी वर्षा कालीन समय में जरुर लोग घरों में लोकी,पेठा आदि उगा लिया करते थे व ग्वार, मोठ की फली आदि खेतों में हो जाया करती थी पर वर्षा काल समाप्त होने के बाद […]

राजस्थान की प्रेम कहानियां

राजस्थान की प्रेम कहानियां

राजस्थान के इतिहास और साहित्य में जिस तरह अनगिनत वीरों की वीरता की कहानियां बिखरी पड़ी है ठीक वैसे ही अनगिनत प्रेम कहानियां भी साहित्य व इतिहास के अलावा कवियों की कविताओं, दोहों के साथ जन मानस द्वारा गाये जाने लोक गीतों व कहानियों में अमर है| इन प्रेम कहानियों में ढोला-मारू, मूमल-महिंद्रा, रामू-चनणा, बाघा-भारमली, […]

बणी-ठणी : राजस्थान की मोनालिसा

बणी-ठणी : राजस्थान की मोनालिसा

राजस्थान के किशनगढ़ की विश्व प्रसिद्ध चित्रशैली “बणी-ठणी” का नाम आज कौन नहीं जनता ? पर बहुत कम लोग जानते है कि किशनगढ़ की यह चित्रशैली जो रियासत काल में शुरू हुई थी का नाम “बणी-ठणी” क्यों और कैसे पड़ा ? आज चर्चा करते है इस विश्व प्रसिद्ध चित्रशैली के नामकरण पर- राजस्थान के इतिहास […]

साहित्य साधक शाही राजपूत नारियां

प्रताप कुंवरी भटियानी यह महाराजा मानसिंह जोधपुर की भार्या और देवावर ठिकाने के ठाकुर गोविन्ददास भाटी की पुत्री थी| इनका विवाह आषाढ़ सुदी 9वि.स.1889 में हुआ था| इन्होंने कुल 15 ग्रंथो की रचना कर सरस्वती के भण्डार की अभिवृद्धि की थी| उपलब्ध कृतियों की नामावली इस प्रकार है- ज्ञान सागर, ज्ञान प्रकाश, प्रताप पच्चीसी, रघुनाथ […]

राजपूत नारियों की साहित्य साधना : प्रेम कुंवरी

यह सर्वथा अज्ञात और साहित्यिक क्षेत्र में अचर्चित राजपूत कवयित्री है| महाराजा जयसिंह आमेर की महारानी चन्द्रावती द्वारा अपनी आत्मा के कल्याणार्थ संकलित करवाई गयी पद्य कृति में इनके २८ छंद संकलित है| यह पद्य महाराव मनोहरदास शेखावत के ब्रजभाषा में रचित पद्यों के संकलन के पश्चात् लिखित है| ग्रंथ में लिखा है- प्रेमकुंवर बाई […]

शादी में सात की जगह चार फेरों की परम्परा

शादी में सात की जगह चार फेरों की परम्परा

शादी विवाह एक ऐसी परंपरा है जहाँ केवल स्त्री-पुरुष का मिलन ही नहीं बल्कि दो परिवारों का मिलन भी होता है| हिन्दू धर्म में अलग-अलग क्षेत्रों में विवाह संस्कारों की अलग-अलग विधि पाई जाती है, पर अक्सर सुनने को मिलता है कि “सात फेरे” एक ऐसी रस्म है जिसके बिना किसी भी क्षेत्र में विवाह […]

खांडा विवाह परम्परा (तलवार के साथ विवाह)

खांडा विवाह परम्परा (तलवार के साथ विवाह)

राजस्थान के राजपूत शासन काल में राजपूत हमेशा युद्धरत रहते थे कभी बाहरी आक्रमण तो कभी अपना अपना राज्य बढ़ाने के लिए राजाओं की आपसी लड़ाईयां|इन लड़ाइयों के चलते राजपूत योद्धाओं को कभी कभी अपनी शादी तक के लिए समय तक नहीं मिल पाता था|कई बार ऐसे भी अवसर आते थे कि शादी की रस्म […]