माण्डण युद्ध : जब राजपूत-जाट सेना के आगे भागी मुगल सेना

माण्डण युद्ध : जब राजपूत-जाट सेना के आगे भागी मुगल सेना

माण्डण युद्ध : अपनी मातृभूमि शेखावाटी-प्रदेश की स्वतंत्रता की रक्षार्थ 6 जून, 1775 ई. को रेवाड़ी के पास माण्डण नामक स्थान पर शेखावतों तथा शाही सेनाधिकारी के बीच एक भयंकर युद्ध हुआ था। जिसमें आक्रान्ता शाही सेनाधिकारी राव मित्रसेन अहीर को पराजित हो युद्धस्थल से भागना पड़ा था और शेखावत पक्ष की विजय हुई| यद्यपि […]

राव शेखा जी का आमेर से युद्ध और विजय

Rao Shekha history in Hindi, Rao Shekhaji, Shekhawati, Shekhawat Vansh राव शेखा के दादा बालाजी आमेर से अलग हुए थे | अतः अधीनता स्वरूप कर के रूप में प्रतिवर्ष आमेर को बछेरे देते थे | शेखा के समय तक यह परम्परा चल रही थी | राव शेखा ने गुलामी की श्रंखला को तोड़ना चाहा | […]

महाराव शेखाजी का घाटवा युद्ध

महाराव शेखाजी का घाटवा युद्ध

एक स्त्री की मान रक्षा के लिए महाराव शेखाजी ने झुन्थर के कोलराज गौड़ का सर काट कर अपने अमरसर के गढ़ के सदर द्वार पर टंगवा दिया,ऐसा करने का उनका उद्देश्य उदंड व आततायी लोगों में भय पैदा करना था हालांकि यह कृत्य वीर धर्म के खिलाफ था शेखा जी के उक्त कार्य की […]

माण्डण का युद्ध : यूँ मिला प्रमाणिक इतिहास

माण्डण का युद्ध : यूँ मिला प्रमाणिक इतिहास

माण्डण का युद्ध (Mandan near Rewari and Narnol) सं. 1822 वि. (सन् 1775 ई.) में लड़ा गया था, जिसकी स्मृति प्रत्येक शेखावत घराने में आज भी ताजा बनी हुई है। विशेष रूप से झुंझुनू और उदयपुरवाटी परगनों का प्रत्येक Shekhawat परिवार इस बात का दावा करता है कि उसका कोई एक पुरुखा माण्डण के युद्ध […]

बीकानेर का राजकुमार वीर अमरसिंह

बीकानेर का राजकुमार वीर अमरसिंह

बीकानेर के राजा रायसिंहजी का भाई अमरसिंह किसी बात पर दिल्ली के बादशाह अकबर से नाराज हो बागी बन गया था और बादशाह के अधीन खालसा गांवों में लूटपाट करने लगा इसलिए उसे पकड़ने के लिए अकबर ने आरबखां को सेना के साथ जाने का हुक्म दिया | इस बात का पता जब अमरसिंह के […]

नमक का मोल

नमक का मोल

मारवाड़ में उस वर्ष सूखा पड़ा था,खेतों में पुरे वर्ष खाने लायक बाजरा तक पैदा नहीं हुआ ऐसे में जोधपुर से कुछ कोस दुरी पर एक ढाणी में रहने वाले गरीब राजपूत खेतसिंह ने लकड़ियाँ इक्कठा कर उन्हें जोधपुर शहर आकर बेचना शुरू कर दिया ताकि लकड़ी बेचने से हुई आमदनी से अपने घर का […]

स्वाभिमानी कवि का आत्म बलिदान

स्वाभिमानी कवि का आत्म बलिदान

बादशाह औरंगजेब मेवाड़ के महाराणा राजसिंह से बहुत ईर्ष्या रखता था |वह मेवाड़ पर आक्रमण हेतु हमेशा किसी न किसी बहाने की तलाश में रहता था | उन दिनों औरंगजेब ने हिन्दुओं पर जजिया कर लगा दिया था उसका एलान था कि या तो इस्लाम स्वीकार करो या जजिया कर चुकाओ | महाराणा राजसिंह ने […]

1672 सतनामियों का नारनोल विद्रोह

मार्च 1672 : आज बादशाह औरंगजेब नारनोल से भाग आई अपनी सेना का मनोबल बढ़ा रहा था पर उसके मुग़ल सैनिक 5000 हजार सतनामी सम्प्रदाय के विद्रोही लोगों का सामना करने से डर रहे थे वे मानकर चल रहे थे कि सतनामी सम्प्रदाय के लोगों को अमरता का वरदान प्राप्त है और उन्हें मार कर […]

देवालयों की रक्षार्थ शेखावत वीरों का आत्मोत्सर्ग

देवालयों की रक्षार्थ शेखावत वीरों का आत्मोत्सर्ग

8 मार्च 1679 औरंगजेब की विशाल सेना ने जो तोपखाने और हाथी घोड़ो पर सजी थी सेनापति दाराबखां के नेतृत्व में खंडेला को घेर कर वहां के शासक राजा बहादुर सिंह को दण्डित करने के लिए कूच चुकी थी | इस सेना को औरंगजेब की हिन्दू-धर्म विरोधी नीतियों के चलते विद्रोही बने राजा बहादुरसिंह को […]

धरती माता को रक्त-पिंडदान

भड पडियो रण-खेत में,संचै पूँजी साथ |राज सांधे निज रगत सूं,पिण्ड- दान निज हाथ || वीर-योद्धा रण-क्षेत्र में धराशायी हो गया,किन्तु सत्य की संचित सम्पत्ति फिर भी उसके साथ है | इसीलिए किसी दुसरे को उसका पिंडदान कराने की आवश्यकता नहीं है | वह स्वयम ही अपने रक्त से भीगी हुई मिट्टी के पिण्ड बनाकर […]