आजाद भारत में कब तक विस्थापित रहेंगे महाराणा प्रताप ?

महाराणा प्रताप ने शक्तिशाली मुग़ल बादशाह अकबर से अल्प संसाधनों के सहारे स्वतंत्रता की रक्षा हेतु वर्षों संघर्ष किया, महल छोड़ जंगल जंगल भटके, सोने चांदी के बर्तनों में छप्पन भोग करने करने वाले महाराणा ने परिवार सहित घास की रोटियां खाई, पर अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं किया और लम्बे संघर्ष […]

महाराणा प्रताप एक बार फिर विस्थापित

दिल्ली के बादशाह अकबर के साथ अपने स्वातंत्र्य संघर्ष के दौरान महाराणा प्रताप (Bharat Mata ke veer saput maharana pratap) को चितौड़गढ़ छोड़कर वर्षों तक जंगलों व पहाड़ों में विस्थापित जीवन जीना पड़ा| उनके उसी संघर्ष से आजादी की प्रेरणा लेकर भारत के लोगों ने अंग्रेज सत्ता से मुक्ति पाई| आज भी महाराणा प्रताप राष्ट्र […]

राष्ट्रगौरव महाराणा प्रताप को नमन

आज देश के हर कोने में राष्ट्र गौरव मेवाड़ के महाराणा हिंदुआ सूर्य महाराणा प्रताप को याद किया जा रहा है | देश के कई नगरों व गांवों में आज राणा प्रताप की जयंती के अवसर पर रैलियां व सभाओं का आयोजन किया जा रहा है | इस देश में अनेक राजा-महाराजा ,बादशाह व नबाब […]

महाराणा प्रताप के बारे में एक गलत भ्रांती

Bhupendra Singh Chundawat राजपूताने में यह जनश्रुति है कि एक दिन बादशाह ने बीकानेर के राजा रायमसिंह के छोटे भाई पृथ्वीराज से, जो एक अच्छा कवि था, कहा कि राणा प्रताप अब हमें बादशाह कहने लग गए है और हमारी अधीनता स्वीकार करने पर उतारू हो गए हैं। इसी पर उसने निवेदन किया कि यह […]

राणा प्रताप के प्रन की जय

दूग दूग दूग रन के डंके, मारू के साथ भ्याद बाजे!ताप ताप ताप घोड़े कूद पड़े, काट काट मतंग के राद बजे! कल कल कर उठी मुग़ल सेना, किलकर उठी, लालकर उठी!ऐसी मायाण विवार से निकली तुरंत, आही नागिन सी फुल्कर उठी! फ़र फ़र फ़र फ़र फ़र फेहरा उठ, अकबर का अभिमान निशान!बढ़ चला पटक […]

धन्य हुआ रे राजस्थान,जो जन्म लिया यहां प्रताप ने।

धन्य हुआ रे राजस्थान,जो जन्म लिया यहां प्रताप ने। धन्य हुआ रे सारा मेवाड़, जहां कदम रखे थे प्रताप ने॥ फीका पड़ा था तेज़ सुरज का, जब माथा उन्चा तु करता था। फीकी हुई बिजली की चमक, जब-जब आंख खोली प्रताप ने॥ जब-जब तेरी तलवार उठी, तो दुश्मन टोली डोल गयी। फीकी पड़ी दहाड़ शेर […]

विलक्षण व्यक्तित्व के धनी महाराणा प्रताप

‘‘माई ऐहडा-पूत जण, जेहा राण प्रताप। अकबर सूतो ओझके, जाण सिराणे सांप ।। भारतीय इतिहास में एक गौरवशाली रणक्षेत्र् हल्दीघाटी का नाम आते ही मन में वीरोचित भाव उमडने – घुमडने लगते हैं। अरावली पर्वतमाला की उपत्यकाओं से आच्छादित इस रणक्षेत्र् में स्थित 432 वर्ष पूर्व के विशाल वृक्ष और जल प्रवाह के नाले मूक […]