रानी पद्मावती के जौहर की कहानी, ममता और कर्तव्य : भाग-4

रानी पद्मावती के जौहर की कहानी,  ममता और कर्तव्य : भाग-4

भाग-३ से आगे…………… पंवारजी तुमने अन्तिम समय में मुझे परास्त कर दिया। मैं भगवान सूर्य की साक्षी देकर प्रतिज्ञा करता हूँ कि तुम्हारे चूड़े के सम्मान को तनिक भी ठेस नहीं पहुँचने ढूँगा।” बोली पंवारजी ने सब शास्त्रीय विधियों को पूर्ण किया और फिर पति से हाथ जोड कर बोली- “नाथ मैं चिता में स्वयं […]

रानी पद्मावती के जौहर की कहानी, ममता और कर्तव्य : भाग-3

रानी पद्मावती के जौहर की कहानी, ममता और कर्तव्य : भाग-3

भाग-२ से आगे………… इतने में पुरोहित ने आकर सूचना दी – माताजी सूर्योदय होने वाला है; चिता-प्रवेश का यही शुभ समय है । माता तुरन्त वहाँ से उठ खड़ी हुई और चिता के पास आकर खड़ी हो गई । गोरा फूट-फूट कर रोने लगा । पुरोहित ने सांत्वना बंधाते हुए कहा – “गोराजी किसके लिए […]

रानी पद्मावती के जौहर की कहानी, ममता और कर्तव्य : भाग-2

रानी पद्मावती के जौहर की कहानी,  ममता और कर्तव्य : भाग-2

भाग-१ से आगे………… पंवारजी दही के लिए हठ करती हुई अपनी तीन वर्षीया पुत्री मीनल को गोद में लेकर आई और बीजल को हाथ पकड़ कर घर के भीतर ले गई । “कितना सुन्दर और प्यारा बच्चा है । ठीक गोरा पर ही गया है । बची भी कितनी प्यारी है । जब वह तुतली […]