कुछ राजस्थानी कहावतें हिंदी व्याख्या सहित

घोड़ा रो रोवणौ नीं,घोड़ा री चाल रौ रोवणौ है |=घोडे का रोना नही घोडे की चाल का रोना है | एक चोर किसी का घोड़ा ले गया | पर घोडे के मालिक को घोडे की चिंता नही थी | उसका रोना तो फकत इस बात का था कि अन्भिज्ञ चोर घोडे की चाल बिगाड़ देगा […]

स्व.पु.श्री तनसिंहजी द्वारा लिखित पुस्तकें

स्व.पु.श्री तनसिंहजी द्वारा लिखित पुस्तकें 1-राजस्थान रा पिछोला – पिछोला को अंग्रेजी में Elegy कहते है और उर्दू में मरसिया | मर्त्यु के उपरांत मृतात्मा के प्रति उमड़ते हुए करूँ उदगारों के काव्य रूप को ही पिछोला कहतें है | पिछोले म्रत्यु की ओट में गए प्रेमी की मधुर स्मृति पर श्रद्धा व प्रेम के […]

शेखावाटी का राजनैतिक इतिहास

श्री रघुनाथ सिंह जी शेखावत ,काली पहाड़ी द्वारा लिखित ” शेखावाटी का राजनैतिक इतिहास ” एक अच्छी पुस्तक है जिसमे शेखावाटी की आदि काल से लेकर अब तक की राजनैतिक स्थिति , समय – समय पर इस भू भाग पर शासन करने वाले शासकों व उनके वंसजों एवम उनके द्वारा शासित ठिकानो के इतिहास पर […]