क्या पारम्परिक परिधान रूढ़ीवाद व पिछड़ेपन की निशानी है ?

पिछले दिनों फेसबुक पर अपने आपको एक पढ़ी-लिखी, आत्म निर्भर, नौकरी करने, अकेले रहने, आजाद, बिंदास व स्वछंद जिंदगी जीने वाली लड़की होने का दावा करने वाली एक लड़की ने लिखा- “पढाई के दिनों उसकी एक मुस्लिम लड़की सहपाठी थी वो पढने लिखने में होशियार, समझदार, आधुनिक विचारों वाली थी पर जब बुर्के की बात […]