चार लाख रु.लालच भी नहीं भुला सका मित्र की यादें

ज्ञान दर्पण पर आपने ” मित्र के विरह में कवि और विरह के दोहे” में पढ़ा कि अपने मित्र बाघजी राठौड़ की मौत का दुःख कविराज आसाजी बारहट सहन नहीं कर सके और वे उनके विरह में एक पागल की से हो गए वे जिधर भी देखते उन्हें बाघजी की सूरत ही नजर आती और […]

मित्र के विरह में कवि और विरह दोहे

ज्ञान दर्पण पर “इतिहास की एक चर्चित दासी भारमली” के बारे पढ़ते हुए आपने पढ़ा कि जैसलमेर के रावत लूणकरणजी की रानी राठौड़ीजी ने भारमली को जैसलमेर से ले जाने के लिए अपने भाई कोटड़ा के स्वामी बाघ जी को बुलवा भेजा था | बहन के कहने पर बाघजी भारमली को चुपके से उठाकर अपने […]

उजळी और जेठवै की प्रेम कहानी और उजळी द्वारा बनाये विरह के दोहे-3

उजळी और जेठवै की प्रेम कहानी और उजळी द्वारा बनाये विरह के दोहे-3

उजळी द्वारा अपने प्रेमी जेठवा के विरह में लिखे दोहे – जळ पीधो जाडेह, पाबसर रै पावटे |नैनकिये नाडेह, जीव न धापै जेठवा || मानसरोवर के कगारों पर रहकर निर्मल जल पिया था तो हे जेठवा अब छोटे छोटे जलाशयों के जल से तृप्ति नहीं होती | उपर्युक्त दोहे का समानार्थी यह भी है | […]

उजळी और जेठवै की प्रेम कहानी और उजळी द्वारा बनाये विरह के दोहे-2

उजळी और जेठवै की प्रेम कहानी और उजळी द्वारा बनाये विरह के दोहे-2

उजळी द्वारा अपने प्रेमी जेठवा की मृत्यु उपरांत बनाये पिछोले – पाबासर पैसेह हंसा भेला नी हुआ |बुगलां संग बैसेह , जूण गमाई जेठवा || संसार रूपी मान सरोवर में रहकर जेठवा रूपी हंसों का संसर्ग प्राप्त न हुआ और बगुलों (निकृष्ट प्रेमियों) के संग रहकर अपना जीवन नष्ट कर दिया | जेठवै के बिना […]

उजळी और जेठवै की प्रेम कहानी और उजळी द्वारा बनाये विरह के दोहे

उजळी और जेठवै की प्रेम कहानी और उजळी द्वारा बनाये विरह के दोहे

करीब ११ वीं-१२ वीं शताब्दी में हालामण रियासत की धूमली नामक नगरी का राजा भाण जेठवा था | उसके राज्य में एक अमरा नाम का गरीब चारण निवास करता था | अमरा के एक २० वर्षीय उजळी नाम की अविवाहित कन्या थी | उस ज़माने में लड़कियों की कम उम्र में ही शादी करदी जाती […]

पीछोला (मर्सिया) Elegy

साहित्य के ज्यादातर विद्वानों का मत है कि राजस्थानी साहित्य वीर रस का साहित्य है क्योंकि राजस्थानी साहित्य में वीर रस की प्रचुरता है फिर भी उसे केवल वीर रस का साहित्य मानना हमारी भूल है क्योंकि राजस्थानी साहित्य में हमें जहाँ वीर रस का विषद का वर्णन मिलता है वहां श्रंगार ,करुणा,वात्सल्य इत्यादी अन्य […]

चाँद फिर निकला

ये चाँद आज फिर निकला है यु सज धज केमुहबत का जिक्र हो शायद हाथो की लकीरों मे याद दिलाता है मुझे एक अनजान राही कीयाद दिलाता है उन मुहबत भरी बातो की टूट कर चाहा इक रात दिल ने एक बेगाने कोकबूल कर लिया था उसकी रस भरी बातो को वोह पास हो कर […]

चेतावनी रा चुंग्ट्या : कवि की कविता की ताकत

1903 मे लार्ड कर्जन द्वारा आयोजित दिल्ली दरबार मे सभी राजाओ के साथ हिन्दू कुल सूर्य मेवाड़ के महाराणा का जाना राजस्थान के जागीरदार क्रान्तिकारियो को अच्छा नही लग रहा था इसलिय उन्हे रोकने के लिये शेखावाटी के मलसीसर के ठाकुर भूर सिह ने ठाकुर करण सिह जोबनेर व राव गोपाल सिह खरवा के साथ […]