धाड़ौ (डाका)

धाड़ौ  (डाका)

राजस्थानी भाषा के मूर्धन्य साहित्यकार श्री सौभाग्यसिंह जी की कलम से……… चौकड़ी (सेखावाटी) रा ठाकुर गोपालसिंघ आपरा जमाना रा अखडै़त सिरदार हूंता। अंग्रेजां रौ राज हौ पण बै कदेई किंणी रौ डर भी नीं मानियौ। साचा, खरा, टणका अर अडर सिरदार। घोड़ां रजपूतां रौ घणौ चाव। चौकड़ी रजवाड़ां मानीजतौ ठिकाणौ। चौकड़ी रा तबेला में लाछी […]

जूनौ खेड़ौ-खेड़

जूनौ खेड़ौ-खेड़

राजस्थानी भाषा के मूर्धन्य साहित्यकार, इतिहासकार श्री सौभाग्य सिंह की कलम से मारवाड़ के पुराने नगर खेड़ पर आलेख राजस्थान रा जूनां नगरां में बैराठ, सांभर, मंडौर, खंडेलौ, मेड़तौ, अजमेर, नागौर, पाली, किराडू नै खेड़ (Khed) आदि गिणीजै है। अै नगरियां न जाणै कितरी वेळा बसी नै कितरी बार उजड़ी। पण इणां पुराणां नगरां में […]

कवियां रौ कलपतरू मानसिंघ

कवियां रौ कलपतरू मानसिंघ

राजस्थानी भाषा के मूर्धन्य साहित्यकार श्री सौभाग्यसिंह जी शेखावत की कलम से……….. जोधांण जोध महाराजा मानसिंघ (Maharaja Man Singh, Jodhpur) आपरै समै में घणा ठणका जोमराड़ राजा बाजियां। मारवाड़ में घणौ धळ-धौकळ, गोधम-धाड़ मानसिंघ रै बखत हुयौ। मारवाड़ रा थाप उथाप सांवत सूरमावां, रावां उमरावां नै पड़ौसी जैपुर, सेखावाटी, बीकानेर रै राजावां रै साथ मानसिंघ […]

लोकदेवी-सूंक

लोकदेवी-सूंक

रिश्वत पर राजस्थानी भाषा के मूर्धन्य साहित्यकार श्री सौभाग्यसिंह जी शेखावत का राजस्थानी भाषा में लेख— ‘पूजापौ’, ‘नजराणौ’ अर ‘सूंक’ (रिश्वत, bribe) सबद देखण में तौ न्यारा-निरवाळा है। पण ब्यौवार में अै तीनूं ही अेक सारखा है। ‘पूजापौ’, देई-देवतावां रै चढीजै। पूजापै नै इज सीरणी प्रसादी, बळ, भोग नै चढावौ कैवै। देई-देवतावां री महर खातर […]

जीभां री लपालोळ

जीभां  री लपालोळ

साहित्यकार, इतिहासकार श्री सौभाग्यसिंह जी शेखावत की कलम से…. कांई भणियां गुणियां नै कांई अणभणियां सगळा मिनख अेक भरम पाळियां बैठा देस सूं है कै भारत सूं पातसाई अर राजासाई उठ गई। अंगरेज आपरा बोरिया बिछावणां करनै घरै गया। गुलामी सुं पिण्ड छूटौ। छै सौ रै अडै़ गड़ै देसी रजवाड़ां रा राजावां रौ खूटौ टूटौ। […]

भाखर भोपाळ- भाद्राजूण

भाखर भोपाळ- भाद्राजूण

राजस्थानी भाषा लेख श्रंखला में साहित्यकार, इतिहासकार श्री सौभाग्य सिंह जी शेखावत का राजस्थान के भाद्रजुन कस्बे पर लेख……. मारवाड़ मेदनी री मरदांनी महिमा रा मोकळा मांडणां राजस्थानी भासा रै आखरां में मंडिया मिलै। इण सूं मारवाड़ नरां समंद कहावै अर वीरता री नोखचौख में बधतौ लखावै। मारवाड़ रै जालौर खण्ड में भादराजण Bhadrajun अेक […]

खेटां रौ खावंद-राव मालदेव

मूर्धन्य साहित्यकार, इतिहासकार श्री सौभाग्यसिंह शेखावत की कलम से………. नौकूंटी मारवाड़ री गौरव पूजा में बढौतरी करबा वाळा सूर वीर नर नाहरां में मारवाड़ रा धणी राव मालदेव (Rao Maldeo Rathore Jodhpur) रौ नांव सिरै गिणीजै। जोधपुर रै माटै जितरा राजा बिराजिया, जितरा खळ खैटा हुवा उण में सगळां सूं टणका, ठाढ़ा, लूठा नै जबरा […]

राजस्थान रो ख्यात साहित्य

राजस्थान रो ख्यात साहित्य

साहित्यकार, इतिहासकार श्री सौभाग्यसिंह जी शेखावत की कलम से….. राजस्थानी भासा रा पद्य री भांत गद्य भी घणौ सबळौ है। जूनै गद्य में ख्यातां, बातां, वचनिकावां, हकीकतां, विगतां, वंसावळियां पट्टावळियां, आद कई भांत रा गद्य रौ चलण पायौ जावै। अै सगळा गद्य री न्यारी-न्यारी विधावां या प्रकार कहीजै। आं प्रकारां में अठै ख्यात री ओळखाण […]

स्वतंत्रता सेनानी डूंगजी जवाहरजी

स्वतंत्रता सेनानी डूंगजी जवाहरजी

लेखक : सौभाग्यसिह शेखावत भारतीय स्वतन्त्रता के लिए संघर्षरत राजस्थानी योद्धाओं में शेखावाटी के सीकर संस्थान के बठोठ पाटोदा के ठाकुर डूंगरसिंह (Dungji), ठाकुर जवाहरसिंह शेखावत (Jawaharji), बीकानेर के ठठावते का ठाकुर हरिसिंह बीदावत, भोजोलाई का अन्नजी (आनन्दसिंह), ठाकुर सूरजमल ददरेवा, जोधपुर के खुशालसिंह चांपावत, ठाकुर बिशनसिंह मेड़तिया गूलर, ठाकुर शिवनाथसिंह प्रासोप, ठाकुर श्यामसिंह बाड़मेरा […]

राजस्थान रा इतिहास रौ वेदव्यास-नैणसी

राजस्थान रा इतिहास रौ वेदव्यास-नैणसी

ठाकुर सौभाग्यसिंह जी शेखावत की कलम से………… राजस्थान री धरती सूरां वीरां री कर्तव्य भौम, प्रेम रा पुजारियां री रंग-थळी, साध-संतां री साधना स्थळी नै जती-मुनियाँ री भ्रमण भौम रैयी है। जुद्ध अनै प्रेम, हिंसा नै अहिंसा, भौतिक नै आध्यात्मिक कमाँ रौ अैड़ौ अेक-दूजा सूं मेळ किणी बीजा भूखण्ड में नीं मिलै। मरुथळ रै नांव […]