सामाजिक दशा और दिशा: निर्भर है योग्य नेतृत्व पर

किसी भी समाज की आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक दशा की कसौटी आदर्श, ईमानदार, सिद्धांतो पर चलने वाले योग्य राजनैतिक व सामाजिक नेतृत्व पर निर्भर करती है। कोई भी समाज जब पतन और उत्थान के संक्रमणकाल से गुजर रहा होता है तब सबसे पहले उसे योग्य नेतृत्व की आवश्यकता की अनुभूति होती है। हमारे समाज की वर्तमान […]

विधा एवं अविधा

“कुँवरानी निशा कँवर”विधा एवं अविधा में भेद बहुत ही हल्का होता है ,बल्कि वास्तव में तो लोग अविधा की गठरी को ही, विधा समझ कर उसे उपने सिर पर लादे फिरते है |भारतीय मनीषियों ,ऋषि ,मुनियों ने हमेशा ही विधा के धोखे में अविधा से सचेत रहने के लिए लगभग सभी शास्त्रों में अवगत कराया […]

स्वाभिमान एवं अभिमान

अभिमान की लोगो ने जितनी निंदा की है, उतनी ही प्रंशसा स्वाभिमान की गयी है !किन्तु इस स्वाभिमान का स्पष्ट चरित्र-चित्रण नहीं होने के कारन अभिमानी लोग स्वाभिमान की ढाल बना कर अपने अहंकार की रक्षा करने का कुत्सित प्रयत्न करते देखे गए है |इसीलिए स्वाभिमानी लोगो का समाज में अभाव और अभिमानी लोगो का […]

हम किस संस्कृति की और बढ़ रहे है ?

कुँवरानी निशा कँवरसभ्यता और संस्कृति ,संस्कार और व्यवहार ,खान-पान और रहन-सहन,चाल-ढाल ,बोली-भाषा के आकलन से किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्त्व का या चरित्र का अनुमान लगाया जाता है |लेकिन उक्त चरित्र या व्यक्तित्त्व निर्माण में सर्वाधिक भूमिका यदि होती है तो वो है सभ्यता, संकृति और संस्कार |वैसे यह सभी शब्द सामान अर्थी तो नहीं […]

वर्ण-व्यवस्था कि उत्पत्ति और पतन

कुँवरानी निशा कँवर नरुकाजैसा कि आदरणीय श्री देवी सिंह जी महार साहब ने “हमारी भूलें” के जरिये यह समझाने का सफल प्रयत्न किया है कि सभी धर्म शास्त्र जोकि वर्तमान में प्रचलित है| यह मूल ,संस्करण नहीं है | मूल संस्करणों को जानबूझकर बुद्धिजीवीयों(जो केवल बुद्धि को व्यवसाय बना बैठा हो ) ने ओझल कर […]