खीरां आई खिचड़ी अर टिल्लो आयो टच्च

खीरां आई खिचड़ी अर टिल्लो आयो टच्च = मौके पर आना| गांवों में आज भी शादी हो या अन्य समारोह इंतजाम के लिए गांव वाले मिलकर ही कार्य करते है| शादी समारोह में मिठाइयाँ आदि बनाने के लिए हलवाई तो जरुर आता है पर उसकी सहायता के लिए गांव वाले ही कार्य करते है और […]

लादड्या में रहणों है तो जै ठाकुर जी की कैणी पड्सी

लादड्या में रहणों है तो जै ठाकुर जी की कैणी पड्सी = दबंग की ही चलेगी| संदर्भ कहानी:- लादड्या नामक गांव में एक ताऊ रहता था उसके परिवार में उसके अलावा कोई नहीं था और न ही वह जीविका के लिए कभी कोई काम करता था| उसी गांव में एक अंधा फकीर भी रहता था| […]

बनिये की राम राम और मिस्ड कॉल

बनिये की राम राम = उधारी का तकादा गांव में अक्सर बनिये (दुकानदार) अपने किसी भी देनदार से सीधे उधारी का तकादा नहीं करते, शायद कोई बुरा मान जाय और आगे से उसकी दूकान से उधार सामान ही ना ख़रीदे| और तकादा ना करे तो उधारी कैसे वसूल हो इसलिए पैदायशी एमबीए डिग्रीधारी बनिया कभी […]

हाथ लुळीयौ जकौ ई आछौ = हाथ झुका वही बहुत अच्छा

हाथ लुळीयौ जकौ ई आछौ = हाथ झुका वही बहुत सन्दर्भ कथा – एक मुस्टंड साधू सवेरे सवेरे कंधे पर झोली टांग कर बस्ती में घर घर आटे के लिए घूमता | एक घर में एक ताई के अलावा उसे कोई भी मना नहीं करता था | फिर भी वह बिना नागा किये ताई के […]

चेतावनी रा चुंग्ट्या : कवि की कविता की ताकत

1903 मे लार्ड कर्जन द्वारा आयोजित दिल्ली दरबार मे सभी राजाओ के साथ हिन्दू कुल सूर्य मेवाड़ के महाराणा का जाना राजस्थान के जागीरदार क्रान्तिकारियो को अच्छा नही लग रहा था इसलिय उन्हे रोकने के लिये शेखावाटी के मलसीसर के ठाकुर भूर सिह ने ठाकुर करण सिह जोबनेर व राव गोपाल सिह खरवा के साथ […]

कांम ई रांम है = काम ही राम है

कांम ई रांम है = काम ही राम है केवल चार शब्दों की नन्ही मुन्ही कहावत में प्रागैतिहासिक युग से भी बहुत पहले की झांकी मिल जाती है कि किसी ईश्वरीय चमत्कार से मनुष्य-मनुष्य नहीं बना ,बल्कि वह मेहनत और काम का ही करिश्मा है कि उसने मनुष्य के अगले दो पांवों को हाथों में […]

टका वाळी रौ ई खुणखुणियौ बाजसी

टका वाळी रौ ई खुणखुणियौ बाजसी = टका देने वाली का ही झुनझुना बजेगा | सन्दर्भ कथा — एक बार ताऊ मेले में जा रहा था | गांव में ताऊ का सभी से बहुत अच्छा परिचय था सो गांव की कुछ औरतों ने अपने अपने बच्चो के लिए ताऊ को मेले से झुनझुने व अन्य […]

राजिया रा सौरठा -१० अंतिम भाग

नैन्हा मिनख नजीक , उमरावां आदर नही |ठकर जिणनै ठीक, रण मे पड़सी राजिया || जो छोटे आदमियों(क्षुद्र विचारो वाले) को सदैव अपने निकट रखता है और उमरावों ( सुयोग्य व सक्षम व्यक्तियों) का जहां अनादर है, उस ठाकुर (प्रसाशक) को रणभूमि (संकट के समय) मे पराजय का मुंह देखने पर ही अपनी भूल का […]

राजिया रा सौरठा -9

कवि कृपाराम जी द्वारा लिखित नीति सम्बन्धी राजिया के दोहे भाग-9 आछा है उमराव,हियाफ़ूट ठाकुर हुवै |जड़िया लोह जड़ाव, रतन न फ़ाबै राजिया|| जहां उमराव तो अच्छे हो किन्तु उनके सहयोगी ठाकुर मुर्ख हो, तो हे राजिया !वे उसी प्रकार अशोभनीय लगते है जैसे रत्न जड़ित लोहा | खाग तणै बळ खाय , सिर साटा […]

राजिया रा सौरठा -8

कवि कृपाराम जी द्वारा लिखित नीति के राजिया के दोहे भाग-8 विष कषाय अन खाय, मोह पाय अळसाय मति |जनम अकारथ जाय, रांम भजन बिन राजिया || विषय- वासनाओं मे रत रहते हुए अन्न खाकर मोह मे पड़ कर आलस्य मत कर | यह मानव जन्म ईश्वर भजन के बिना व्यर्थ ही बिता जा रहा […]