रानी पद्मावती के जौहर की कहानी, ममता और कर्तव्य : भाग-4

रानी पद्मावती के जौहर की कहानी,  ममता और कर्तव्य : भाग-4

भाग-३ से आगे…………… पंवारजी तुमने अन्तिम समय में मुझे परास्त कर दिया। मैं भगवान सूर्य की साक्षी देकर प्रतिज्ञा करता हूँ कि तुम्हारे चूड़े के सम्मान को तनिक भी ठेस नहीं पहुँचने ढूँगा।” बोली पंवारजी ने सब शास्त्रीय विधियों को पूर्ण किया और फिर पति से हाथ जोड कर बोली- “नाथ मैं चिता में स्वयं […]

रानी पद्मावती के जौहर की कहानी, ममता और कर्तव्य : भाग-3

रानी पद्मावती के जौहर की कहानी, ममता और कर्तव्य : भाग-3

भाग-२ से आगे………… इतने में पुरोहित ने आकर सूचना दी – माताजी सूर्योदय होने वाला है; चिता-प्रवेश का यही शुभ समय है । माता तुरन्त वहाँ से उठ खड़ी हुई और चिता के पास आकर खड़ी हो गई । गोरा फूट-फूट कर रोने लगा । पुरोहित ने सांत्वना बंधाते हुए कहा – “गोराजी किसके लिए […]

रानी पद्मावती के जौहर की कहानी, ममता और कर्तव्य : भाग-2

रानी पद्मावती के जौहर की कहानी,  ममता और कर्तव्य : भाग-2

भाग-१ से आगे………… पंवारजी दही के लिए हठ करती हुई अपनी तीन वर्षीया पुत्री मीनल को गोद में लेकर आई और बीजल को हाथ पकड़ कर घर के भीतर ले गई । “कितना सुन्दर और प्यारा बच्चा है । ठीक गोरा पर ही गया है । बची भी कितनी प्यारी है । जब वह तुतली […]

रानी पद्मावती के जौहर की कहानी, ममता और कर्तव्य : भाग-1

रानी पद्मावती के जौहर की कहानी,   ममता और कर्तव्य : भाग-1

विक्रम संवत् 1360 के चैत्र शुक्ला तृतीया की रात्रि का चतुर्थ प्रहर लग चुका था । वायुमण्डल शांत था । अन्धकार शनैः शनैः प्रकाश में रूपान्तरित होने लग गया था । बसन्त के पुष्पों की सौरभ भी इसी समय अधिक तीव्र हो उठी थी । यही समय भक्तजनों के लिए भक्ति और योगियों के लिए […]

नकली बूंदी

नकली बूंदी

केवल बीस पच्चीस घुड़सवारों को लेकर महाराणा लाखा ‘‘बूंदी’’ फतह करने को चल पड़े। सूरजपोल से निकल कर उन्होंने बूंदी पर आक्रमण कर दिया। चित्तौड़ दुर्ग की दुन्दुभियों ने विजयराग अलापा। नौबत पर विजयाभियान का डंका पड़ा और नकीबों ने चित्तौड़पति के जयघोष से आकाश गूंजा दिया। “हर-हर महादेव” के कुल-घोष के साथ ही घोड़ों […]

बेचारा बाप

रामलाल सरकारी विभाग में बाबू है अपने विभाग में ही नहीं जिस मुहल्ले में रहते है वहां भी लोग उनकी भलमनसाहित के कायल है, उनके सम्पर्क में रहने वाले किसी भी व्यक्ति से उनकी किसी भी बात पर आलोचना सुनने को आज तक नहीं मिली| अपनी सरकारी नौकरी के वेतन से उन्होंने अपने दो बेटों […]

भाग्य में लिखा वो मिला

“भाग्य में लिखा छप्पर फाड़ कर मिलता है” पूर्वजों की बनाई यह कहावत एकदम सटीक है ऐसे कई उदाहरण देखने, पढने को मिल जाते है कि जिसके भाग्य में राजा बनना लिखा था तो वह किसी राजा की रानी के गर्भ से पैदा नहीं होने के बावजूद भी राजा बना| जोधपुर के राजा मानसिंह हालाँकि […]

जब कवि ने शौर्य दिखाया

जोधपुर के महाराजा मानसिंह का कव्यानुराग, विद्याप्रेम, कलाप्रियता, दानशीलता, गुणग्राहकता, गुरुभक्ति, स्वतान्त्र्यप्रेम के साथ शासक के तौर पर कठोर दंड व्यवस्था में निर्दयी दंडात्मक विधियाँ लोकमानस में आज भी जनश्रुतियों के रूप में काफी लोकप्रिय व प्रचलित है| उनके आचरण के दोनों रूप – पहला प्रतिकारी हिसंक रूप और दूसरा प्रशंसा और आभार प्रदर्शन का […]

जब कवियों ने मनाई मित्र राजा की रूठी प्रेयसी

जब कवियों ने मनाई मित्र राजा की रूठी प्रेयसी

जोधपुर के राजा मानसिंह को इतिहास में शासक के रूप में कठोर, निर्दयी, अत्यंत क्रूर और कूटनीतिज्ञ माना जाता है पर साथ ही उनके व्यक्तित्त्व का एक दूसरा रूप भी था वे भक्त, कवि, कलाकार, उच्च कोटि के साहित्यकार, कला पारखी व कलाकारों, साहित्यकारों, कवियों को संरक्षण देने वाले दानी व दयालु व्यक्ति भी थे|  […]

निबटने (शौच जाने) का खर्च खाता

निबटने (शौच जाने) का खर्च खाता

रामगढ़ शेखावाटी कस्बे के पास एक गांव के पनघट पर पानी भरने आई औरतों में एक औरत का दुखी मुरझाया चेहरा देख दूसरी औरतें उससे कारण पूछ रही थी| हालाँकि वह औरत अपना दर्द उनसे बांटना नहीं चाह रही थी फिर भी गांव की एक औरत का चेहरा मुरझाया हो तो दूसरी औरतों को चैन […]

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