राजिया रा सौरठा- 7

कवि कृपाराम जी द्वारा लिखित नीति सम्बन्धी राजिया के दोहे भाग- 7 चोर चुगल वाचाळ, ज्यांरी मांनीजे नही |संपडावै घसकाळ , रीती नाड्यां राजिया || चोर चुगल और गप्पी व्यक्तियों की बातो पर कभी विश्वास नही करना चाहिए,क्योंकि ये लोग प्राय: तलाइयों मे ही नहला देते है अर्थात सिर्फ़ थोथी बातों से ही भ्रमा देते […]

राजिया रा सौरठा -6

कवि कृपाराम जी द्वारा लिखित नीति सम्बन्धी राजिया के दोहा भाग -6 नहचै रहौ निसंक,मत कीजै चळ विचळ मन |ऐ विधना रा अंक,राई घटै न राजिया || निश्चय्पुर्वक नि:शंक रहो और मन को चल विचल मत करो,क्योकि विधाता ने भाग्य मे जो अंक लिख दिये है, हे राजिया ! वे राई भर भी नही घटेंगे […]

राजिया रा सौरठा -5

कृपाराम पर द्वारा लिखित राजिया के नीति सम्बन्धी दोहे | मानै कर निज मीच, पर संपत देखे अपत |निपट दुखी व्है नीच , रीसां बळ-बळ राजिया || नीच व्यक्ति जब दुसरे की सम्पति को देखता है तो उसे अपनी मृत्यु समझता है,इसलिए ऐसा निकृष्ट व्यक्ति मन में जल-जल कर बहुत दुखी होता है | खूंद […]

राजिया रा सौरठा -4

कवि कृपाराम जी द्वारा लिखित नीति सम्बन्धी राजिया रा दोहा | आवै नही इलोळ बोलण चालण री विवध |टीटोड़यां रा टोळ, राजंहस री राजिया || महान व्यक्तियों के साथ रहने मात्र से ही साधारण व्यक्तियों में महानता नही आ सकती | जैसे राजहंसों का संसर्ग पाकर भी टिटहरियों का झुण्ड हंसो की सी बोल-चाल नहीं […]

राजिया रा सौरठा – 3

कवि कृपाराम जी द्वारा लिखित नीति के दोहे देखै नही कदास, नह्चै कर कुनफ़ौ नफ़ौ |रोळां रो इकळास, रौळ मचावै राजिया || जो लोग हानि-लाभ की और कभी देखते नही,ऐसे विचारहीन लोगों से मेल-मिलाप अंततः उपद्रव ही पैदा करता है | कूड़ा कुड़ प्रकास, अण हुती मेलै इसी |उड़ती रहै अकास, रजी न लागै राजिया […]

राजिया रा सौरठा -2

अपने सेवक राजिया को संबोधित करते कवि कृपाराम जी द्वारा लिखित नीति सम्बन्धी दोहे | खळ धूंकळ कर खाय, हाथळ बळ मोताहळां |जो नाहर मर जाय , रज त्रण भकै न राजिया || सिंह युद्ध में अपने पंजों से शत्रु हाथियों के मुक्ताफल-युक्त मस्तक विदीर्ण कर ही उन्हें खाता है | वह चाहे भूख से […]

राजिया रा सौरठा -1

पिछले लेख कवि “कृपाराम जी और रजिया के दोहे” पढने के बाद कई बंधुओ ने राजिया के दोहे लिखने का अनुरोध किया था अतः आज से “राजिया रा सौरठा” नाम से यह श्रंखला पेश कर रहा हूँ | कुट्ळ निपट नाकार, नीच कपट छोङे नहीं |उत्तम करै उपकार,रुठा तुठा राजिया || कुटिल और नीच व्यक्ति […]

कवि कृपाराम जी और ” राजिया के दोहे”

नीति सम्बन्धी राजस्थानी सौरठों में “राजिया रा सौरठा” सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है भाषा और भाव दोनों द्रष्टि से इनके समक्ष अन्य कोई दोहा संग्रह नही ठहरता | संबोधन काव्य के रूप में शायद यह पहली रचना है | इन सौरठों की रचना राजस्थान के प्रसिद्ध कवि कृपाराम जी ने अपने सेवक राजिया को संबोधित करते […]

क्या पता कल हो ना हो

ऑरकुट पर भी इंटरनेट दोस्तों से तरह-तरह के और बड़े मजेदार स्क्रब मिलते रहते है इसी कड़ी में बाड़मेर से थान सिंह राठौड़ ने यह कविता स्क्रब की जो यहाँ प्रस्तुत है | आज एक बार सबसे मुस्करा के बात करो बिताये हुये पलों को साथ साथ याद करो क्या पता कल चेहरे को मुस्कुराना […]

मै हूँ नेता तेरे देश का

लोगों को भड़काता हूँ, आपस में लड़वाता हूँ !उनकी धन संपदा लेकर, फ़िर मै मौज मनाता हूँ !!गबन करके सरकार की, आंखों में धुल उडाता हूँ !गेहूँ,चावल,दाल दबाकर, महंगे दाम कमाता हूँ !!बढ़ गई है आबादी देश की, दंगे करके मरवाता हूँ !स्वार्थ सिद्ध करने को अपने, लोगों की बलि चढाता हूँ !!तिकड़म से कुर्सी […]