पाथळ और पीथळ

अरै घास री रोटी ही जद बन बिलावडो ले भाग्यो |नान्हो सो अमरयो चीख पड्यो राणा रो सोयो दुःख जाग्यो || हूँ लड़यो घणो हूँ सहयो घणो मेवाडी मान बचावण नै ,हूँ पाछ नहीं राखी रण में बेरयां रो खून बहावण में ,जद याद करूँ हल्दी घाटी नैणा में रगत उतर आवै ,सुख दुःख रो […]

तुम सब जानती व्यथा हमारी किसको पुकारें माँ

तुम सब जानती व्यथा हमारी किसको पुकारें माँ |सपनो की नगरी सूनी है उजड़ा उपवन माँ || प्राण पपीहे ने पी पी करके नभ मंडल है छाना |प्यास बुझाने को आतुर यह जीवन एक बहाना ||चाँद सितारे दे गए धोखा ज्योति न दिखती माँ | नाज हमें है इन गीतों पर इस स्वर को ले […]

बिरखा बिंनणी वर्षा वधू

मानसून पूर्व की वर्षा की बोछारें जगह-जगह शुरू हो चुकी है | किसान मानसून का बेसब्री से इंतजार करने में लगे है | और अपने खेतो में फसल बोने के लिए घास,झाडियाँ व अन्य खरपतवार काट कर (जिसे राजस्थान में सूड़ काटना कहते है ) तैयार कर वर्षा के स्वागत में लगे है | बचपन […]

स्व.कन्हैयालाल सेठिया की कालजयी रचना जलम भोम (जन्म भूमि)

स्व.कन्हैयालाल सेठिया की कालजयी रचना ” जलम भोम ” जलम भोम आ धरती गोरा धोरां री, आ धरती मीठा मोरां रीईं धरती रो रुतबो ऊंचो, आ बात कवै कूंचो-कूंचो,आं फ़ोगां मे निपज्या हीरा, आं बांठा में नाची मीरा,पन्ना री जामण आ सागण , आ ही प्रताप री मा भागण,दादू रैदास कथी वाणी ,पीथळ रै पाण […]

पैसे का ग्रुप चेक किया क्या ?

इन्सान जब जन्म लेता हे तब उसका वजनढाई किलो होता हेओ़र मरने के बाद अग्नि संस्कार के बाद उसकी राख का वजन भीढाई किलो होता हे |जिन्दगी का पहला कपडा जिसका नाम हे ,ज़बला,जिसमे जेब नहीं होती हे |जिन्दगी का आखरी कपडा कफन ,जिसमे भी जेब नहीं होती हे |तो बिचके समय में जेब के […]

एक बेवफा की याद में :कमलेश चौहान

एक बेवफा की याद में :कमलेश चौहान

ए दोस्तो जिंदगी के हादसे कुछ इस तरह् से गुजरे हर बार दर्द के दरिया मै तिनके की तरह बह गये वो क्यों बिछड़ गया ईसकी हमें कोई सोच नाहीगिला तो जिंदगी से है जो हज़ारो लम्हो मै बॅट गयी होगी कोई उसकी मजबूरी जो वो हुमसे बिछड़ गयाहोगा शायद मुझी मै कोई दोष जो […]

आज पनीर नहीं है , दाल में ही खुश रहो

आज पनीर नहीं है , दाल में ही खुश रहो

ऑरकुट पर स्क्रब में तरह तरह की कविताए आदि मिलते रहती है पेश है उन्ही में से मिली कुछ दोस्तों की स्क्रब कविताए जोधपुर से राज शेखावत ज़िन्दगी है छोटी, हर पल में खुश रहो …ऑफिस में खुश रहो, घर में खुश रहो … ჯહઔહჯ═══■■═══ჯહઔહჯ आज पनीर नहीं है , दाल में ही खुश रहो […]

राजिया रा सौरठा -१० अंतिम भाग

नैन्हा मिनख नजीक , उमरावां आदर नही |ठकर जिणनै ठीक, रण मे पड़सी राजिया || जो छोटे आदमियों(क्षुद्र विचारो वाले) को सदैव अपने निकट रखता है और उमरावों ( सुयोग्य व सक्षम व्यक्तियों) का जहां अनादर है, उस ठाकुर (प्रसाशक) को रणभूमि (संकट के समय) मे पराजय का मुंह देखने पर ही अपनी भूल का […]

राजिया रा सौरठा -9

कवि कृपाराम जी द्वारा लिखित नीति सम्बन्धी राजिया के दोहे भाग-9 आछा है उमराव,हियाफ़ूट ठाकुर हुवै |जड़िया लोह जड़ाव, रतन न फ़ाबै राजिया|| जहां उमराव तो अच्छे हो किन्तु उनके सहयोगी ठाकुर मुर्ख हो, तो हे राजिया !वे उसी प्रकार अशोभनीय लगते है जैसे रत्न जड़ित लोहा | खाग तणै बळ खाय , सिर साटा […]

राजिया रा सौरठा -8

कवि कृपाराम जी द्वारा लिखित नीति के राजिया के दोहे भाग-8 विष कषाय अन खाय, मोह पाय अळसाय मति |जनम अकारथ जाय, रांम भजन बिन राजिया || विषय- वासनाओं मे रत रहते हुए अन्न खाकर मोह मे पड़ कर आलस्य मत कर | यह मानव जन्म ईश्वर भजन के बिना व्यर्थ ही बिता जा रहा […]