उजळी और जेठवै की प्रेम कहानी और उजळी द्वारा बनाये विरह के दोहे-2

उजळी और जेठवै की प्रेम कहानी और उजळी द्वारा बनाये विरह के दोहे-2

उजळी द्वारा अपने प्रेमी जेठवा की मृत्यु उपरांत बनाये पिछोले – पाबासर पैसेह हंसा भेला नी हुआ |बुगलां संग बैसेह , जूण गमाई जेठवा || संसार रूपी मान सरोवर में रहकर जेठवा रूपी हंसों का संसर्ग प्राप्त न हुआ और बगुलों (निकृष्ट प्रेमियों) के संग रहकर अपना जीवन नष्ट कर दिया | जेठवै के बिना […]

आभास

आभास

आभास ही सही क्षितीज पर धरा और अम्बर का मिलन तो दिखता है ….. पर तुम को क्या हुआ तुम तो मेरे अपने थे ना, फिर तुमने अपना रुख क्यों मोड़ लिया हर आहट पर लगता है तुम आये हो , पर क्यों रखु मैं अपने ह्रदय द्वार खुले अगर वो तुम ना हुए तो […]

बस अनन्त अनमोल है माँ

ममता बरसाती बारिश सी है माँसागर मे उफनती लहरों सी है माँपानी की बूंद को तरसते बच्चो के लिए दुध की धार सी है माँअपनी ममता की रक्षा के लिए तलवार सी है माँना इसकी ममता की सीमा है ना इसके प्यार की हद हैमई जून की गर्मी में जाड़े की धुप सी है माँकभी […]

सलवटे

सलवटे

क्या लिखू क्या न लिखू , कलम ये ख़ामोश हे !गिर गया आंख से आंसू सलवटे हे फिर कागज़ पे ! क्या लिखू क्या न लिखू ………..लिखने बेठा जो में हाल मेरे दिल का !रुका न अश्क पलकों से गिरा वो दिल की कब्र पे !सुलग उठे वो अरमा सोये दिल के महरबान !किया मुझको […]

मानव मूल्य

मानव मूल्य

उपरोक्त रचना फेसबुक मित्र श्री हरिकृष्ण लाल सचदेव द्वारा ज्ञान दर्पण पर प्रकाशनार्थ भेजी गयी जो आपके सम्मुख प्रस्तुत है संघर्ष एवं क्षत्रिय | pc to phone काल करे जी मेल के द्वाराताऊ अस्पताल में बाबाश्री ललितानंद जी महाराजहिंदुस्तान का दिल है दिल्ली !

मुस्कुराहट

मुस्कुराहट

पाँच ही दिन हुए उसे ब्याह कर ……आज जा रही हे पगफेरे के लिए अपने पीहर …….गहनों से लदी चुनरी में लिपटी ….कितनी खुबसूरत लग रही है इसकी मुस्कुराहट होठों पर ….चली जा रही है सिमटी सी …….और मैं कर रहा हूं इसका पीछा ..अरे मैं ,,,,,मैं …मैं इसके सुहाग सेज के कक्ष का सन्नाटा […]

यह दुनियां

यह दुनियां

आप सब लोगों ने पढ़ी मेरी पहली कविता “क्यूँ यह दुनियां?” जो सिक्के का एक पहलु थी | जिसमे सिर्फ बुराइयाँ थी,दुनियां से शिकायतें थी | पर जब मैंने सिक्के का दूसरा पहलु देखा तो उसमे बुराइयाँ ही नहीं,कुछ और भी था | जानना चाहेंगे?“यह दुनियां”आसान नहीं जीवन की डगर यहाँ …फिर भी जीना सिखाती […]

नन्हीं शिकायत

नन्हीं  शिकायत

भगवान जी माँ बाबा को कभी तो मेरा बना दो. भैया को कभी तो डांट पिलवा दो. माँ सारी चीजे भैया की पसंद की बनाती हैं . एक बार तो बाबा के हाथो से मुझे भी एक प्यार का निवाला खिलवा दो. बाबा सारा प्यार भैया पे क्यों लुटाते हैं . भैया के हाथो में […]

सूनापन

सूनापन

जिस कागज पे कोई इबादत न हो . उस कागज को दिल से लगाएगा कौन . फ़ेंक देंगे उसे फिर कदमो तले, पलकों पे अपनी बिठाएगा कौन . मेरा जीवन भी है उस कागज के जैसा , मुझे यूँ जमीं से उठाएगा कौन . जिस कागज पे कोई ………………….. मेरा जीवन भी उस कागज के […]

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