कठै गया बे गाँव आपणा ?

कठै गया बे गाँव आपणा कठै गयी बे रीत । कठै गयी बा ,मिलनसारिता,गयो जमानो बीत || दुःख दर्द की टेम घडी में काम आपस मै आता। मिनख सूं मिनख जुड्या रहता, जियां जनम जनम नाता । तीज -त्योंहार पर गाया जाता ,कठै गया बे गीत || कठै गयी बा ,मिलनसारिता,गयो जमानो बीत ||(1) गुवाड़- […]

जब भी दिवाली आती है…

जब भी दिवाली आती है…

जब जब ढलते मौसम में दिल पे वो शीत हवाएं चलती है | मेरे प्यारे वतन , तेरी सुबह तेरी शाम मुझे बहुत रूला जाती है || फिर चमकती रात आई ले कर जलाने मेरे अरमानों की मशालें तेरे दर से आने वाली ठंडी हवा इसकी तपश को मिटा जाती है | वो कलाईयों में […]

नदी की व्यथा

नदी की व्यथा

शांत वातावरण में मदमस्त बहती जा रही थी हिलोरे लेती सजती रहती… कभी उफनती ,तो कभी शांत … बस बहती जा रही थी | सौलह श्रृंगार कर,वन सौन्दर्य लिए.. मै भी कभी नवयुवती थी | तुम्हारा यूँ प्रतिदिन निहारना .. मुझे भाने लगा.. किसी देवी भांति,पूजा करना… मुझे भाने लगा | सच कहूँ तुम्हारे प्रेम […]

जर्जर हो चुके बूढ़े द्वारपाल

जर्जर हो चुके बूढ़े द्वारपाल

अस्त्र शस्त्र ,वेद शास्त्र , विद्या दान सब सिखाया क्षत्राणी का धर्म निभाया कूद के जौहर में रण भूमि में तुम्हारा मान बचाया वैधव्य भी नहीं डिगा सका मेरा स्वाभिमान पुत्र रक्त से रक्तिम धरा देख कर भी रहा ह्रदय पाषण ब्रहमांड की उत्पति प्रक्रिया मे ज्यों अणु टूट टूट के एक हो जाते हैं […]

रास्ते बदल गये : कमलेश चौहान ( गौरी)

रास्ते बदल गये : कमलेश चौहान ( गौरी)

कमलेश चौहान (गौरी) माना कि ये उस मालिक का दस्तूर है कुछ पल सब कुछ है कुछ पल देखो तो कुछ भी नहीं कल जो दिल के करीब था, आज भी है अब, सात समुद्र पार है कल जो अपना था वो आज कहीं नहीं ओह ! हम बहक गए थे किसी की बातों से […]

माँ थारी लाडी नै, तूं लागै घणी प्यारी

माँ थारी लाडी नै, तूं लागै घणी प्यारी

एक बेटी के मन की आवाज माँ के लिए माँ थारी लाडी नै, तूं लागै घणी प्यारी | सगळा रिश्तां में, माँ तूं है सै सूं न्यारी निरवाळी || नौ महीना गरभ मै राखी, सही घणी तूं पीड़ा | ना आबा द्यूं अब, कोई दुखड़ा थारै नेड़ा || तूं ही माँ म्हनै हिंडायो, चौक तिबारा […]

राह पकड़ तू चल अनवरत

राह पकड़ तू चल अनवरत झंझावातों से डरना मत। पूर्वजों की यश कीर्ति ,गौरव को ऐ राही ऐसे खोना मत ।। प्रभु स्वयं अवतरित हुए जिस कुल में,उसके दाग लगाना मत । जौहर की आग में कूद पड़ी जो उनका दूध लजाना मत ।। स्वाभिमानी,गौरव,अमर वीर ,प्रताप का वंशज भूल मत । अपना सर्वस्व सुख […]

बाळपणा नै झालौ

बाळपणा नै झालौ

सुण रै म्हारी सखी सहेली, किती सुखी है आ छोटी सी चिड़कली | जद मन करै रुंख पै आवै, जद मन करै आकास में फुर सूं उड़ जावै | सुण रै म्हारी सखी सहेली, आज्या चालां आपां भी उड़बा बाळपणा मै | खावां खाटा-मीठा बोरया, अर काचर-मतिरा आज्या मौज मनावां कांकड़ मै | आज्या घर […]

स्त्री हूँ

स्त्री हूँ

क्षणों के कांटे सी हूँ मैं हर क्षण धुरी पर परिक्रमा मेरी वक़्त बदल देती हैं मेरी परिक्रमा क्षण घंटे दिन बदले साल सदियां गुजर गई पर मेरी परिक्रमा का अंत नहीं परिक्रमा नियति हैं मेरी पर बदलना स्वभाव नहीं तुम मुझ से बने हो मैं तुम से नहीं तुम्हारा सम्पूर्ण होना मुझ पर निर्भर […]

बिलखती नार..

धोळी-धोळी  चांदनी, ठंडी -ठंडी रात । सेजां बैठी गोरड़ी,कर री  मन री  बात ।। बाट जोवतां -जोवतां,  मैं कागां रोज उडाऊं । जै म्हारा  पिया रो आवै संदेशो  सोने री चांच मंढाऊं ।। धोरा ऊपर झुपड़ी,गोरी उडिके बाट ! चांदनी और चकोर को, छुट गयो छ साथ।। आप बसों परदेस में, बिलखु थां बिन राज […]