कवि ने सिर तुड़वाया पर सम्मान नहीं खोया

अक्सर लोग चारण कवियों पर आरोप लगा देते है कि वे राजपूत वीरों की अपनी रचनाओं में झूंठी वीरता का बखाण करते थे पर ऐसा नहीं था| राजपूत शासन काल में सिर्फ चारण कवि ही ऐसे होते थे जो निडर होकर अपनी बात अपनी कविता में किसी भी राजा को कह डालते थे| यदि राजा […]

किले का विवाह

किले का विवाह

‘बधाई ! बधाई ! तुर्क सेना हार कर जा रही है | गढ़ का घेरा उठाया जा रहा है |” प्रधान बीकमसीं(विक्रमसिंह) ने प्रसन्नतापूर्वक जाकर यह सूचना रावल मूलराज को दे दी |“घेरा क्यों उठाया जा रहा है ?” रावल ने विस्मयपूर्वक कहा |कल के धावे ने शाही सेना को हताश कर दिया है | […]

बत्तीस लक्षणी औरत

उदयपुर के महाराणा राजसिंह जी एक बार रूपनगढ़ पधारे हुए थे | एक दिन सुबह सुबह ही उन्होंने महल के झरोखे में खड़े होकर मूंछों पर हाथ फेरते हुए जोर से खंखारा किया | महल के ठीक नीचे एक महाजन का घर था उस महाजन की विधवा बाल पुत्र वधु अपने घर के आँगन में […]

राजा मानसिंह आमेर

राजा मानसिंह आमेर

मात सुणावै बालगां, खौफ़नाक रण-गाथ |काबुल भूली नह अजै, ओ खांडो, ऎ हाथ || काबुल की भूमि अभी तक यहाँ के वीरों द्वारा किये गए प्रचंड खड्ग प्रहारों को नहीं भूल सकी है | उन प्रहारों की भयोत्पादक गाथाओं को सुनाकर माताएं बालकों को आज भी डराकर सुलाती है | महमूद गजनी के समय से […]

शर्त जीतने हेतु उस वीर ने अपना सिर काटकर दुर्ग में फेंक दिया

बिंधियो जा निज आण बस,गज माथै बण मोड़ |सुरग दुरग परवेस सथ,निज तन फाटक तोड़ || अपनी आन की खातिर उस वीर ने दुर्ग का फाटक तोड़ने के लिए फाटक पर लगे शूलों से अपना सीना अड़ाकर हाथी से टक्कर दिलवा अपना शरीर शूलों से बिंधवा लेता है और वीर गति को प्राप्त होता है […]

खूड का संक्षिप्त इतिहास

शेखावाटी क्षेत्र का खूड ठिकाना सीकर जिले में जिला मुख्यालय से २७ किलोमीटर दूर सीकर डीडवाना (नागौर ) रोड पर स्थित है |आजादी से पूर्व यह क़स्बा जहाँ आस-पास के गांवों का प्रशासनिक केंद्र था वही आज यह क़स्बा आप-पास के गांवों के विद्यार्थियों का प्रमुख शिक्षा केंद्र होने के अलावा आस-पास के गांवों के […]

हाड़ी रानी और उसकी सैनाणी ( निशानी )

हाड़ी रानी और उसकी सैनाणी ( निशानी )

अपने पिछले लेख ” बीच युद्ध से लौटे राजा को रानी की फटकार ” के आख़िर में मैंने एक ऐसी रानी का जिक्र किया था जिसने युद्ध में जाते अपने पति को निशानी मांगने पर अपना सिर काट कर भिजवा दिया था | यह रानी बूंदी के हाडा शासक की बेटी थी और उदयपुर (मेवाड़) […]

राव जोधा जी, जोधपुर

राव जोधा जी, जोधपुर

राव जोधा जी का जन्म भादवा बदी 8 सं. 1472 में हुवा था | इनके पिता राव ridmal मारवाड़ के शासक थे, मेवाड़ का शासन कार्य भी इनकी सहमति से चलता था अतः मेवाड़ के कुछ सरदार इनसे अप्रसन थे और इन्होने मेवाड़ नरेश महाराणा कुम्भा व उनकी माता सोभाग्य देवी को राव रिदमल जी […]