आओ आरक्षण का नाम भुनाएं

आओ आरक्षण का नाम भुनाएं

इस देश में आरक्षण एक ऐसी चीज है जिसे पाने के लिए हर कोई लालायित है| कोई व्यक्ति, जाति, समाज, सम्प्रदाय अपने आपको पिछड़ा, बेचारा, शोषित, गरीब नहीं समझता| लेकिन हमारे संविधान निर्माता व नेता यह आरक्षण शब्द पता नहीं कहाँ से ले आये कि इसे पाने यानी आरक्षण व्यवस्था रूपी मलाई खाने के लिए […]

अतिक्रमण को जातिवाद का संरक्षण

इस देश में आजादी के बाद जातिवाद ख़त्म कर समानता की बड़ी बड़ी बातें की जाती है पर आज भी समानता की जगह लोगों को जातीय आधार पर विशेषाधिकार चाहिए| किसी को दलित होने के नाम पर तो, किसी को पिछड़ा होने के नाम पर, किसी को आर्थिक आधार पर किसी को किसी अन्य आधार […]

समानता की सोच को निगल गया आरक्षण

समानता की सोच को निगल गया आरक्षण

चित्र साभार : youthtimes.in देश की आजादी के बाद देश के राजनेताओं ने आजादी पूर्व सामंती शासन में कथित जातिय भेदभाव व असमानता को दूर कर देश के सभी नागरिकों को समान अधिकार व अवसर देने हेतु लोकतांत्रिक शासन प्रणाली अपनाई| साथ ही पूर्व शासन काल में जातिय भेदभाव के शिकार पिछड़े लोगों को आगे […]

क्या भारत में निर्वाचन क्षेत्रों का आरक्षण न्याय संगत है ?

कुँवरानी निशा कँवर नरुका कहने को तो भारत में लोकतंत्र है, किन्तु सही मायने में इसे लोकतंत्र नहीं बल्कि इसमें एक अनोखा “जाति तंत्र “पनपा है, जो न राष्ट्र के हित में है और न ही समाज के हित में| वैसे तो हर प्रकार का आरक्षण किसी भी आधार पर (चाहे जाति आधारित हो या […]