दूध की लाज

दूध की लाज

A Hindi Story on Veer Shiromanhi Durgadas Rathore By lt.Kr.Ayuvan Singh Shekhawat, Hudeel “शायद आश्विन के नौरात्र थे वे । पिताजी घर के सामने के कच्चे चबूतरे पर शस्त्रों को फैला कर बैठे हुए थे । उनके हाथ में चाँदी के मूठ की एक तलवार थी जिस पर वे घी मल रहे थे । माताजी […]

रानी पद्मावती के जौहर की कहानी, ममता और कर्तव्य : भाग-4

रानी पद्मावती के जौहर की कहानी,  ममता और कर्तव्य : भाग-4

भाग-३ से आगे…………… पंवारजी तुमने अन्तिम समय में मुझे परास्त कर दिया। मैं भगवान सूर्य की साक्षी देकर प्रतिज्ञा करता हूँ कि तुम्हारे चूड़े के सम्मान को तनिक भी ठेस नहीं पहुँचने ढूँगा।” बोली पंवारजी ने सब शास्त्रीय विधियों को पूर्ण किया और फिर पति से हाथ जोड कर बोली- “नाथ मैं चिता में स्वयं […]

रानी पद्मावती के जौहर की कहानी, ममता और कर्तव्य : भाग-3

रानी पद्मावती के जौहर की कहानी, ममता और कर्तव्य : भाग-3

भाग-२ से आगे………… इतने में पुरोहित ने आकर सूचना दी – माताजी सूर्योदय होने वाला है; चिता-प्रवेश का यही शुभ समय है । माता तुरन्त वहाँ से उठ खड़ी हुई और चिता के पास आकर खड़ी हो गई । गोरा फूट-फूट कर रोने लगा । पुरोहित ने सांत्वना बंधाते हुए कहा – “गोराजी किसके लिए […]

रानी पद्मावती के जौहर की कहानी, ममता और कर्तव्य : भाग-2

रानी पद्मावती के जौहर की कहानी,  ममता और कर्तव्य : भाग-2

भाग-१ से आगे………… पंवारजी दही के लिए हठ करती हुई अपनी तीन वर्षीया पुत्री मीनल को गोद में लेकर आई और बीजल को हाथ पकड़ कर घर के भीतर ले गई । “कितना सुन्दर और प्यारा बच्चा है । ठीक गोरा पर ही गया है । बची भी कितनी प्यारी है । जब वह तुतली […]

रानी पद्मावती के जौहर की कहानी, ममता और कर्तव्य : भाग-1

रानी पद्मावती के जौहर की कहानी,   ममता और कर्तव्य : भाग-1

विक्रम संवत् 1360 के चैत्र शुक्ला तृतीया की रात्रि का चतुर्थ प्रहर लग चुका था । वायुमण्डल शांत था । अन्धकार शनैः शनैः प्रकाश में रूपान्तरित होने लग गया था । बसन्त के पुष्पों की सौरभ भी इसी समय अधिक तीव्र हो उठी थी । यही समय भक्तजनों के लिए भक्ति और योगियों के लिए […]

फौज देवरे आई

फौज देवरे आई

“बारात चल पड़ी है। गाँव समीप आ गया है इसलिए घुड़सवार घोड़ों को दौड़ाने लगे हैं। ऊँट दौड़ कर रथ से आगे निकल गए हैं । गाँव में ढोल और नक्कारे बज रहे हैं – दुल्हा-दुल्हिन एक विमान पर बैठे हैं । दुल्हे के हाथ में दुल्हिन का हाथ है । हाथ का गुदगुदा स्पर्श […]

क्षमा दान : पृथ्वीराज द्वारा गौरी को माफ़ी का वर्णन

क्षमा दान : पृथ्वीराज द्वारा गौरी को माफ़ी का वर्णन

कीर्ति-स्तम्भ (कुतुबमीनार) के ठीक सामने जहाँ आजकल दर्शकों के विश्राम के लिये हरी दूब की क्यारियाँ बनी हुई हैं, वहाँ आज से लगभग पौन आठ सौ वर्ष पहले तक सुन्दर संगमरमर का छोटा सा मन्दिर बना हुआ था। उस मन्दिर के निर्माण का इतिहास भी बड़ा मनोरंजक और विचित्र है। दिल्ली के सिंहासन पर बैठने […]

नकली बूंदी

नकली बूंदी

केवल बीस पच्चीस घुड़सवारों को लेकर महाराणा लाखा ‘‘बूंदी’’ फतह करने को चल पड़े। सूरजपोल से निकल कर उन्होंने बूंदी पर आक्रमण कर दिया। चित्तौड़ दुर्ग की दुन्दुभियों ने विजयराग अलापा। नौबत पर विजयाभियान का डंका पड़ा और नकीबों ने चित्तौड़पति के जयघोष से आकाश गूंजा दिया। “हर-हर महादेव” के कुल-घोष के साथ ही घोड़ों […]

किले का विवाह

किले का विवाह

‘बधाई ! बधाई ! तुर्क सेना हार कर जा रही है | गढ़ का घेरा उठाया जा रहा है |” प्रधान बीकमसीं(विक्रमसिंह) ने प्रसन्नतापूर्वक जाकर यह सूचना रावल मूलराज को दे दी |“घेरा क्यों उठाया जा रहा है ?” रावल ने विस्मयपूर्वक कहा |कल के धावे ने शाही सेना को हताश कर दिया है | […]

जय जंगलधर बादशाह -2

जय जंगलधर बादशाह -2

भाग एक शेष ………..” हैं ? परसों ही ?”” हाँ ! परसों ही,कटक नदी के इसी तट पर हमें कलमा पढाया जायेगा,हमारे मुंह में गौ-मांस और मौलवियों का थूक ठूँसा जायेगा | हमारी सुन्नत की जाएगी और फिर उस काली संध्या की भयावनी छाया में हम सूर्य,चन्द्र और अग्नि कुल के अंतिम भग्नावशेषों को मुहम्मद […]