किसनगढ़ धणी नै महादाजी पटेल

श्री सौभाग्य सिंह जी की कलम से………….
Story of Kishangarh Maharaj Bahadur Singh and Mahadaji Patel

किसनगढ़ रा राजाजी महाराजा बादरसिंघजी बिना माथै तरवार बावै जैड़ा मिनख हा। उणा रै समै में किसनगढ़ घणौ चावौ नै ऊघड़तौ ओपतौ रजवाड़ौ गिणीजियौ। दोय सौ दस गांवां रा किसनगढ़ रा राज नै बादरसिंघजी घणौ बधायौ। आंणा-टांणा में, रीत-बैवार में, कानूनां-कायदां में। किसनगढ़ राज में किलाकोट चुणाया। तळाव बावड़ियां खिंणाया, पैदास बधाई। साहित, संगीत, चितराम कळां नै पनपाय नै किसनगढ़ सैली नै जनम दिरायौ। राजस्थान में मरैठां री खाधळव रजवाड़ां री अड़कसी, आपसरी री गोधम-धाड़, रोजीनां रा मारा-कूटा में बादरसिंघजी ऊभा पगां रैया अर किसनगढ़ नै नारां री दाढ़ां बीच रुखाळ राखियौ। कविराज बांकीदास आसियौ लिखियौ है कै-बादरसिंघजी गोडां तांई धोती राखता, कांधे माथै नागौरी धमाकौ अर लोह रा तैनाळ मैनाळ री लोहड़ी मूंठ री तरवार-राखता। इती सादगी सूं रैवता। राड़ में सदा फौज रै साथै रैवता। रजपूतां रौ, सिपायां रौ परगह रौ पूरौ आघमाण राखता। जैड़ा हुंता थकाँ भी अकल हुसियारी नै चात्रगता में सिरै गिणीजता।

अेक बार महादाजी पटेल किसनगढ़ रै सरवाड़ किला में दौय सौ सस्तर पाती ढलैतधारी मिनखां नै लेय राजाजी री मिजमानी में गयौ। महादाजी मरैठां में सिरै बुध, मौटौ सेनाधपत अर जोमराड़ मांटी हौ। मल्हाररावजी, जनकौजी, जयअप्पाजी सगळां सूं घणौ अकलवान, जोधार अर राजनीति में पैराक हौ। मरैठां रा सगळां धड़ां में महादाजी धूजी ज्यूं मरैठां इत्यास में दिसै। महादाजी पटेल बाजिया। पटेल माथा पर पट्टा राखै। उण नै पटेल कैवै। दूजौ पटेलाई, राज रौ लगाण, रेख ऊगावै, उणनै भी पटेल कैवै। तीजौ राज री राजनीतरी चौधर, न्याव थपाव, भांगझड़ करै जिका नै भी पटेल नाँव सूं लोगबाग ओळखै। राजस्थान में जाट जात रा मुखिया नै पटेल कैवै है। पटेल प्रतिष्ठा रौ नै अपणात रौ सबद है।

महादाजी रौ बादरसिंघजी सांतरौ स्वागत कियौ। भांत-भांत री भुगत कर जिमाया। घणी मान मनवार कर गोठ दी। रात रा नाच-गाणा रौ सांसक्रितिक प्रोग्राम नै ख्यालां रौ उछव करायौ। जद सयन रौ बगत हुवौ महादाजी राजाजी नै कैयौ-राजाजी जे अबार म्हारै मन में औ सरवाड़ रौ किलौ खोसबा नै लूटबा री आ जावै तौ थां कांई करौ। अटै थांरै कनै तौ पचास-साठ बूढा ठेरा माणस इज है। राजा बादरसिंघजी कैयौ-‘‘औ, तौ सांच है। म्हांरौ किसनगढ़ है इज कितरौ सौ। पछै ढूंढाड़, मारवाड़, मेवाड़, अजमेरां री कांकड़ सीवाड़ी में बसा हां। कोई खोस लै तौ कांई टणकाई करां ?’’ आ, वात कैय नै राजाजी पटेलजी री निजर बचाय आंख री सैनकारी करी सौ पलक झपकतां रै साथ इज किला री बुरजां में ओलै बैठा पांची हथियारां सूं सजियोड़ा पांच सौ जोधार किला रै औळी-दौळी आय ऊभा व्हिया। पटेलजी राजाजी रा परबन्ध अर सावचेती सूं अचंभित व्है रैया। राजा कह्यौ-महादारावजी ! कंठीर रा कंठा रौ कांठलौ, ब्याळ रै मुंहडा रा बाळ अर रजपूत रै जीवरखां नै हाथ कुंण घालै। पटेलजी हकीगत जाण मुळक पड़या।

पछै दोनूं जुगजोधारां पटेलजी नै राजाजी रै घणौ मेळ रैयौ।

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