आरटीआई का असर

आरटीआई का असर

भारत में सरकारें योजना बनाती है, जिम्मेदार और ईमानदारी अधिकारी जनहित में निर्णय लेते हुए अपने अधीनस्थों को काम करने हेतु निर्देश देते है, लेकिन अक्सर देखा जाता है कि सरकारी विभागों में बैठे अधिकारी, बाबू हरामखोरी करते हुए उन निर्देशों का पालन नहीं करते और जनता दुखी होती है|
ऐसा ही एक जनहित व निगम के हित में 21 फरवरी 2013 को निर्णय कर निर्देश दिया था राजस्थान परिवहन निगम के कार्यकारी निदेशक (यातायात) जयपुर ने सीकर आगार प्रबंधक को- “दिनांक 21-02-2013 को अपने आदेश क्रमांक :- एफ12 /मु/याता./संचा./2013/314 के तहत यात्रीगणों की मांग/ सुविधार्थ एवं निगम हित को ध्यान में रखते हुए सीकर आगार के अधीनस्थ ग्राम+पोस्ट “भगतपुरा” तह. दांतारामगढ, जिला सीकर को निगम द्वारा संचालित समस्त द्रुतगामी बसों का ठहराव स्थल घोषित किया गया था| इस हेतु संबंधित मुख्य प्रबंधक को उक्त मार्ग पर संचालित समस्त वाहनों के चालकों, परिचालकों को उक्त निर्धारित बस स्टैंड पर यात्रियों को चढाने/उतारने हेतु आवश्यक रूप से पाबन्द करने का आदेश जारी किया गया था| आदेश में उक्त ठहराव स्थल की किराया तालिका मुख्य प्रबंधक, सीकर आगार को निर्धारित करने का निर्देश था|”

लेकिन अपनी आदत के अनुरूप सीकर आगार प्रबंधक ने कोई कार्यवाही नहीं की, इस बीच दो बार ग्रामीण जोनल मैनेजर, सीकर आगार से भी मिले| जोनल मैनेजर ने भी आदेश की पालना का निर्देश दिया, लेकिन प्रबंधक पर कोई असर नहीं हुआ| मैं खुद एक दिन जोनल मैनेजर से मिला तब गांव का नाम सुनते ही जोनल मैनेजर मामला समझ गया और सम्बंधित अधिकारी व बाबू को काफी लताड़ा व एक हफ्ते में कार्य पूर्ण करने का निर्देश दिया| मेरे अनुरोध पर भास्कर समाचार पत्र ने भी मामला उठाया और प्रबंधक से बात की तब प्रबंधक ने एक हफ्ते में काम करने का आश्वासन दिया, लेकिन कार्य नहीं किया| जिसका खुलासा अभी एक आरटीआई के जबाब में मिली प्रति की तारीख देखने पर हुआ|

मैंने इस सम्बन्ध में 24 अक्टूबर 2014 को सीकर आगार में स्पीड पोस्ट के माध्यम से एक आरटीआई भेजी, जिसके बाद साल भर पहले जो कार्य करना था, वह आगार प्रबंधक ने 31 अक्टूबर 2014 को किया और उसके बाद मुझे 03 नवंबर को जबाब भेजा| इससे साफ़ है कि यदि मैं आरटीआई से जबाब नहीं मांगता तो ये अधिकारी अभी भी इस कार्य को आगे नहीं बढ़ता| लेकिन आरटीआई का जबाब देने के दबाव में पहले काम किया फिर जबाब दिया|
इससे साफ़ जाहिर है कि हम हरामखोर सरकारी कर्मचारियों को सुधारने के लिए आरटीआई को एक शानदार औजार के रूप में इस्तेमाल कर सकते है, बिना कहीं जाए, घर बैठे !!

अत: आईये और आरटीआई के माध्यम से अपनी ताकत का इस्तेमाल कर अपने देश प्रदेश व जिले को अभिनव बनायें !! मैं तो अपने जिले सीकर को इस माध्यम से “अभिनव सीकर” बनाने में जुट गया हूँ यदि आप नहीं जुटे तो जुट जाईये और देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के यज्ञ में अपनी आरटीआई रूपी आहुति दें !!

वह आदेश जो कार्यकारी निदेशक (यातायात) जयपुर ने सीकर आगार प्रबंधक को भेजा

आरटीआई आवेदन

आरटीआई आवेदन मिलने के बाद आगार प्रबंधक द्वारा अन्य आगारों को भेजे गए पत्र की प्रति

आरटीआई का जबाब

मांगी गई किराया सूची

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