फर्जीवाड़ा उजागर करने का बेमिशाल हथियार आरटीआई

फर्जीवाड़ा उजागर करने का बेमिशाल हथियार आरटीआई

यह RTI सूचना का अधिकार अधिनियम Right to Information की ताकत का ही नतीजा है कि फर्जी डिग्री से वकालत करने का आरोप झेल रहे दिल्ली के कानून मंत्री आज पुलिस हिरासत में है, वहीं कई केन्द्रीय मंत्रियों तक की डिग्री की RTI के माध्यम से पोल खुलने के चलते वे बचाव की मुद्रा में है और आरोप झेल रहे है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने “सूचना का अधिकार अधिनियम” का इस्तेमाल करते हुए तत्कालीन सरकारों, अफसरों व व्यवसायिक घरानों के बीच संबंध उजागर करने वाले दस्तावेज हासिल कर इनके मध्य संबंध व भ्रष्टाचार उजागर किया. केजरीवाल ने भ्रष्टाचार के खिलाफ RTI का अच्छा ख़ासा प्रयोग कर साबित किया कि RTI भ्रष्टाचार उजागर करने का एक शानदार हथियार है. लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहीम चलाकर दिल्ली की मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन होने वाले केजरीवाल के मंत्री-विधायक भी हेराफेरी व फर्जीवाड़े से बाज नहीं आये. कई भ्रष्ट, मौकापरस्त और जालसाज लोग केजरीवाल की पार्टी से जुड़ गए व विधायक-मंत्री भी बन गये.

लेकिन जिस RTI को केजरीवाल ने हथियार बना रखा था, उसी हथियार का इस्तेमाल कर अब विरोधी केजरीवाल की पार्टी में घुसे ऐसे तत्वों को बेनकाब करने में जुटे है. दिल्ली के कानून मंत्री का मामला अभी आपके सामने ही है, उसकी जाँच पूरी नहीं हुई उससे पहले आआपा का एक और विधायक इसी तरह का आरोप झेल रहा है. यही नहीं सूचना के इसी अधिकार से कई केन्द्रीय मंत्री भी डिग्री की जालसाजी में मुकदमों का सामना कर रहे है.

हालाँकि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 में ही बन चूका था, पर जन-जाग्रति के चलते इसका उपयोग काफी कम हुआ. लेकिन अब स्थितियां बदल रही है, लोग इस मामले में जागरूक हो रहे है. “अभिनव राजस्थान” जैसे अभियान चलायें जा रहे है जो जगह जगह आयोजन कर RTI के बारे में जागरूकता फ़ैलाने के साथ RTI का इस्तेमाल करने का प्रशिक्षण दे रहे है. अभिनव राजस्थान अभियान के तहत जहाँ डा.अशोक चौधरी गांव, कस्बों व शहरों में आयोजन कर युवाशक्ति को जागरूक कर रहे है वहीं बीकानेर में आरटीआई कार्यकर्त्ता गोवर्धन सिंह परिहार हर रविवार को प्रशिक्षण देने हेतु बाकायदा क्लास लगा रहे है. ज्ञात हो गोवर्धन सिंह ने RTI के माध्यम से एक बहुत बड़ी लड़ाई जीती है. भ्रष्ट पुलिस अधिकारी ने RTI से सूचनाएं मांगने का बदला लेने को गोवर्धन सिंह पर कई फर्जी मुकदमें भी लगाये जो न्यायालय में ख़ारिज हुए.

इसी जाग्रति का ही कमाल है कि आज बहुत से नेता व अफसर फर्जीवाड़ा करने से डरने लगे है. यदि मैं भ्रष्टाचार रोकने के लिए RTI को जनता का ब्रह्मास्त्र भी कहूँ तो अतिश्योक्ति नहीं होगी. क्योंकि वर्तमान समय में जनता के पास एक RTI रूपी ही हथियार है जिसका इस्तेमाल कर जनता हर सरकारी योजना की इन कानून के तहत मोनिटरिंग कर भ्रष्टाचार व फर्जीवाड़े पर रोक लगा सकती है. जिस क्षेत्र में लोग इस अधिकार का प्रयोग करने लगे है उस क्षेत्र के अधिकारीयों में खौफ है कि गलत काम किया तो पता नही कब लपेटे में आ जायेंगे. इस तरह पहली बार भ्रष्टाचारी व जालसाज दबाव में आये है जो कभी बेख़ौफ़ हुआ करते थे.

अत: RTI की ताकत समझे और आप भी अपने इस अधिकार का प्रयोग कीजिये और भ्रष्टाचार रोकने में अपना कर्तव्य निभाइये. अभिनव राजस्थान अभियान का यह वाक्य याद रखिये “हम नहीं तो कौन ? और अब नहीं तो कब ?”

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