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रिछपाल सिंह कविया : परिचय

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वर्ष १९८५ के लगभग लोसल कस्बे में भाजपा की एक सभा थी जिसे संबोधित करने के लिए भाजपा के एक बड़े नेता ललित किशोर चतुर्वेदी को आना था, सभा शुरू हो चुकी है थी और स्थानीय सभी नेता मंच से अपनी अपनी बात जनता के सामने रख चुके थे तभी दूरभाष पर आयोजकों को सूचना मिली कि नेता जी एक ढेढ़ घंटे देरी से आयेंगे जिसका पता हमें मंच संचालक द्वारा की गयी उदघोषणा से चला| यह सूचना मिलने लोसल कस्बे के सभी नेता अपना भाषण दे चुके थे सो सभा में सीकर से पहुंचे भाजपा युवा मोर्चा के युवा नेता रिछपाल सिंह कविया Richhpal Singh Kaviya को आयोजकों द्वारा यह कह कर माइक पकड़ा दिया गया कि- जब तब नेताजी आयें तब तक जनता को रोके रखने के लिए यह माइक आपको ही संभालना है|

रिछपाल सिंह कविया ने यह चुनौती स्वीकार करते हुए अपने भाषण में एशियाड खेलों पर सरकार द्वारा मनोरंजन के नाम पर किये खर्च और यदि उतनी ही राशी से विकास कार्यों पर सरकार द्वारा खर्च की जाती तो उससे कितना विकास हो सकता था, कितने किलोमीटर सड़कें बनाई जा सकती थी, कितने किलोमीटर बिजली की लाइन बिछा, कितने नलकूपों पर बिजली कनेक्शन दे कितनी कृषि उपज बढ़ा, कृषक परिवारों की प्रति व्यक्ति आय कितनी बढाई जा सकती थी पर विस्तार से व जोशीले शब्दों में प्रकाश डाला| गांवों से आये कृषक उनके अर्थशास्त्री आंकड़े बड़े मनोयोग से एकटक सुनते रहे| उनकी भाषा हर किसान समझ रहा था|

उनके लंबे भाषण के बीच ही बड़े नेता जी पहुंचे और माइक पकड़ अपनी संघ वाली भाषा में भाषण झाड़ना शुरू किया, कुछ ही देर में गांवों से आये किसान यह कहते हुए उठ जाने लगे कि – “इस नेता से तो वो छोरा ही अच्छा और काम की बोल रहा था|” और देखते ही देखते चतुर्वेदी जी के भाषण ख़त्म करने से पहले काफी भीड़ छंट गयी थी|

२३ फरवरी १९५९ में सीकर के पास संतोषपुरा गांव में चारण जाति की कविया शाखा के चारण जी.एस. कविया के घर रिछपाल सिंह कविया का जन्म हुआ| सीकर से ही पोलिटिकल साइंस से पोस्ट ग्रेजुएट कविया स्कूली दिनों से ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से जुड़ छात्र राजनीति में सक्रीय हो गए| एबीवीपी में सीकर के नगर मंत्री से लेकर आप प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य रहे| बाद में आपने भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री की जिम्मेदारी निभाई व वर्ष १९८३से १९९३ तक आप भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे| और वर्ष १९९३ से अब तक आप भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य है|

वर्ष १९९३ व १९९८ के राजस्थान विधानसभा में धोद क्षेत्र में आपने अल्प साधनों से सिर्फ कार्यकर्ताओं के बूते चुनाव लड़कर अच्छा प्रदर्शन किया पर धोद विधान सभा क्षेत्र में जातीय समीकरण आप के पक्ष में न होने के चलते दोनों ही चुनाव जीतने में असफल रहे|

चारण जाति में जन्में कविया को बोलने की कला जन्म-जात विरासत में मिली है, आज भी यदि कई- कई घंटे किसी विषय बोलने पड़े तो वे श्रोताओं को अपनी ओजस्वी वाणी व शानदार लहजे में बोलते हुए बांधे रखने की क्षमता रखते है| सीधा सादा जीवन जीने वाले, मृदुभाषी और अपने क्षेत्र के हर व्यक्ति से बिना छोटे-बड़े का भेदभाव किये व्यक्तिगत सम्पर्क रखने वाले कविया ने वर्ष १९८६ में शेरे राजस्थान स्व.भैरोंसिंह जी शेखावत और किसान नेता नाथूराम जी मिर्धा द्वारा प्रदेश में आहूत किसान आन्दोलन का सीकर जिले में १० दिन तक सफल संचालन किया, अपने क्षेत्र से दूर सवाई माधोपुर में भी आपने एक सीमेंट फैक्टी के श्रमिकों के हित में आवाज उठाकर उन्हें न्याय दिलाया यही नहीं आपातकाल सहित आपने विभिन्न आंदोलनों में 6 बार जेल यात्रा भी की| १९८४ से आप राजस्थान प्रदेश ही नहीं देश के विभिन्न क्षत्रों की राजनीति में निरंतर सक्रीय है| पूर्व राष्ट्रपति स्व.भैरोंसिंह जी शेखावत अपने मुख्यमंत्री काल से आपके आत्मीय व्यवहार रखते थे|

पिछले दिनों सीकर में हुई मुलाकात के समय कविया जी चीन सीमा विवाद मामले पर भारत सरकार के रुख से बड़े विचलित थे, नीचे विडियो में पेश है उसी मामले में व्यक्त उनके संक्षिप्त विचार :-

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3 COMMENTS

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति…!

    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (10-11-2013) को सत्यमेव जयते’" (चर्चामंच : चर्चा अंक : 1425) पर भी होगी!

    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर…!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

  2. “इस नेता से तो वो छोरा ही अच्छा और काम की बोल रहा था"

    इसीलिये नेताओं से लोगों को ऊब होने लगी है.

    बहुत सटीक वाकये लिखे आपने.

    रामराम.

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