26 C
Rajasthan
Friday, October 7, 2022

Buy now

spot_img

राष्ट्र व समाजद्रोह के नये पैमाने घड़ने में लगे ठेकेदार

जब से मानव समाज के रूप में रहने लगा, मानव की रहन-सहन संस्कृति विकसित हुई| मानव द्वारा सामाजिक व राज व्यवस्था स्थापित करने के बाद समाज व राष्ट्र के विरोधी कार्य को समाज व राष्ट्रद्रोह के रूप में जाना जाने लगा और इस द्रोह की जघन्यता के आधार पर इसके लिए कई दंड लागू किये, जो आज भी विभिन्न देशों के संविधान व सामाजिक नियमों के रूप में विद्यमान है| प्राचीन काल से ही राष्ट्रद्रोह के लिए जहाँ मृत्युदण्ड सहित देश से निष्काषित करने की सजाएं प्रचलित रही, वहीं समाज विरोधी कार्य मसलन सामाजिक परम्पराएं तोड़ने आदि के लिए समाज से निष्काशन की सजाएं प्रचलित रही है| समाज द्वारा स्थापित परम्पराओं को तोड़ने के चलते कुछ वर्ष पूर्व खांप पंचायतों के फरमानों व उनके द्वारा समाजद्रोह के आरोपियों को सुनाई सजाएं चर्चा व बहस का विषय रही है|
किसी भी देश में राष्ट्रद्रोह की सजा उसके संविधान के अनुरूप में न्यायपालिका तय करती है, लेकिन आजकल देखा गया है कि लोग स्वयं को बड़ा राष्ट्रवादी और राजनैतिक विरोधी को राष्ट्रद्रोही घोषित करने में तुले रहते है, हालाँकि उनके इस तरह आरोप की कोई क़ानूनी मान्यता नहीं होती, लेकिन राजनैतिक तौर पर एक दुसरे को नीचा दिखाने के लिए राष्ट्रद्रोह जैसे जघन्य आरोप लगा दिए जाते है| इस तरह लोग अनजाने में ही राष्ट्रद्रोह जैसे जघन्य कृत्य को हल्का करने में लगे है|

ठीक ऐसे कुछ राजनैतिक दल जो खुद जातिवाद, सम्प्रदायवाद का घिनौना खेल खेलते रहते है, विरोधी दल पर जातिवाद, साम्प्रदायिकता का आरोप लगाकर चिल्लपों मचाये रहते है| इस देश में ऐसे जातिवादी व साम्प्रदायिक तत्वों की कमी नहीं है जो खुद हर वक्त अपनी जाति व सम्प्रदाय के हित की बात करते हुए दूसरी जातियों व सम्प्रदायों को कोसते रहते है, पर फिर भी उन्हें अपना किया नजर नहीं आता और जो काम खुद करने में मशगुल रहते है, उसका आरोप दूसरे पर ठोक देते है|

सामाजिक संगठनों के कार्यकर्त्ता भी दूसरे संगठन के लोगों को नीचा दिखाने की होड़ में उन्हें तुरंत समाज के गद्दार या समाजद्रोही घोषित कर देते है| हालाँकि इस तरह आरोप लगाने वाले स्वयंभू सामाजिक ठेकेदारों द्वारा लगाये जाने वाले आरोपों को समाज कोई भाव नहीं देता, लेकिन सामाजिक संगठन के लोग इस तरह के आरोपों के बहाने प्रतिद्वंदी संगठन के चरित्रहनन का कोई मौका नहीं चूकते|
जबसे सोशियल मीडिया का प्रचलन बढ़ा है और लोगों को अभिव्यक्ति के लिए सोशियल मीडिया रूपी एक आसान हथियार मिला है, इसका प्रयोग करते हुए सामाजिक संगठन के कार्यकर्ताओं द्वारा समाजद्रोही या समाज के गद्दार घोषित करने या किसी सामाजिक नेता पर इस तरह के आरोप लगाने के प्रकरण नित्य बढ़ रहे है| प्राय: प्रतिदिन सोशियल साइट्स पर सामाजिक कार्यकर्ता अपने आपको कौम का बहुत बड़ा तारणहार, सिपाही, शुभचिंतक प्रचारित करते हुए प्रतिद्वंदी संगठन, या वे असंतुष्ट होकर जिस संगठन को छोड़ चुके, उस पर इस तरह के घटिया आरोप-प्रत्यारोप लगाते नजर आ जायेंगे|

सोशियल साइट्स पर इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप देख-पढ़कर लगता है कि अपने आपको समाज का सबसे बड़ा हितचिन्तक समझने वाले, समाज के कथित स्वयंभू ठेकेदारों ने अपने-अपने विचारों के अनुरूप समाजद्रोह की परिभाषाएँ घड़ रखी है, और जो व्यक्ति उनके स्वार्थ में बाधक बनता है, उसे तुरंत समाज का गद्दार, समाज के नाम दूकान चलाने वाला, समाजद्रोही, आदि उपमाओं से विभूषित कर देते है| जबकि इस तरह के कार्यों में वे खुद संलग्न रहते है|
सोशियल साइट्स पर अभिव्यक्त कथित राष्ट्रवादियों व कथित कौम के हितैषियों की इस तरह के घटिया आरोपों को देखते हुए लगता है, इन कथितों ने राष्ट्रद्रोह, समाजद्रोह घोषित करने के निज-स्वार्थ अनुरूप नये पैमाने घड़ लिए है|

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Stay Connected

0FansLike
3,514FollowersFollow
20,100SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles