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राव रायमल जी, अमरसर

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घाटवा युद्ध में विजय के बाद राव शेखा जी के निधन उपरांत उनके सबसे छोटे पुत्र राव रायमल जी बेशाख सुदी 15 वि.सं. 1545 ई.सं. 1488 को अमरसर के विधिवत शासक बने,इनके राजतिलक के समय आमेर के जेस्ठ राजकुमार प्रथ्वीराज जी व भैराना के स्वामी नरु जी अमरसर पधारे थे |
शेखा जी की वीर गति के कारण संयुक्त कछवाह शक्ति के आक्रमण से घबरा कर गौड़ प्रमुख मारोठ के राव रिदमल जी ने विरोध समाप्त करने के लिए अपनी पुत्री का विवाह रायमल जी करके झुन्थर के 51 गावं दहेज़ में देकर कछवाहों व गौडों के मध्य वर्षों से चली आ रहा खूनी संघर्ष समाप्त कर मित्रता करली |

मुगलों को हरा कर दिल्ली का सुलतान बनने वाले शेरशाह सूरी का पिता मियां हसन खां ने कई वर्षों तक राव रायमल जी की सेना में नौकरी की थी |राव रायमल जी को राव शेखा जी द्वारा संगठित विशाल राजपूत व पठान सेना व 360 ग्रामों का राज्य विरासत में मिलने के अलावा झुन्थर के 51 गावं गौडों से मिल गए | टोडा के सोलंकियों से नरेणा व पश्चिमी मेवात का बसी,बानसूर,मामोड़,साम्भर के भाग व आमेर के कुछ गावं दबाकर रायमल जी अपने पैत्रिक राज्य को 360 गावों से बढाकर 555 गावों के विस्तृत राज्य में बदल दिया |

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