बच्चों को शिक्षा में सहयोग देने का अनूठा तरीका था इस राजा का

आधुनिक सीकर के निर्माता व सीकर के अंतिम Rao Raja Kalyansingh ji ने शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बहुत बड़ा योगदान दिया था| देशी रियासतों के विलीनीकरण के बाद भी रावराजा कल्याणसिंह जी ने क्षेत्र में शिक्षा के प्रसार के लिए अपनी निजी संपत्तियां दिल खोलकर दान की थी| सीकर में श्री कल्याण सीनियर सैकंडरी स्कूल, श्री कल्याण कन्या महाविद्यालय, श्री कल्याण संस्कृत महाविद्यालय, श्री कल्याण कन्या पाठशाला, श्री कल्याण बाल मंदिर आदि सभी के लिए भूमि व भवन राजा कल्याणसिंह जी द्वारा दान किये गए है| यही नहीं सीकर में बन रहा मेडिकल कालेज भी राजा साहब द्वारा दान की गई भूमि पर ही बन रहा है अत: उसका नाम भी श्री कल्याण मेडिकल कालेज होगा|

हाल ही 20 जून को उनकी 132 वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में राजस्थान विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष दीपेन्द्रसिंह शेखावत सहित कई वक्ताओं ने छात्रों के प्रति रावराजा के व्यवहार के संस्मरण साझा किये| अपने संस्मरण साझा करते हुए श्री शेखावत ने बताया कि राजा साहब अक्सर शैक्षणिक संस्थाओं में आते थे और छात्रों को लड्डू बांटते थे| जो छात्र पढाई में होशियार होते थे, उन्हें राजा साहब ज्यादा लड्डू देकर प्रेरित करते थे|

श्री शेखावत ने बताया कि राव राजा साहब ने छात्रों को पढाई में आर्थिक सहयोग देने का अनूठा तरीका अपना रखा था| शेखावत के अनुसार उस वक्त राजा के ढोलिये (पलंग) पर पहरा लगाने की परम्परा थी| हालाँकि महल में सुरक्षित शयन कक्ष में पहरे की कोई आवश्यकता नहीं थी पर Rao Raja Kalyansingh ji ने वह परम्परा बंद नहीं की व आर्थिक दृष्टि से कमजोर छात्रों को पहरे पर रखने की व्यवस्था की| उनके शयन कक्ष में बारी से बारी से चार चार छात्र पहरे पर तैनात किये जाते थे, जिसके बदले उन्हें रूपये दिए जाते थे| पहरे पर तैनात छात्रों को राजा के शयन कक्ष में बैठकर पढना होता था| राजा खुद रात में जागकर उन्हें देखते थे कि पहरे पर तैनात छात्र पढ़ रहा है या नहीं|

इस तरह राजा ने ढोलिये (पलंग) पर पहरे की परम्परा को शिक्षा को बढ़ावा देने व जरूरतमंद छात्रों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के रूप में बदलने का एक अनूठा तरीका अपनाया था| आपको बता दें, रियासत के विलीनीकरण के बाद भी Rao Raja Kalyansingh ji Sikar ने अपनी ज्यादातर व्यक्तिगत संपत्तियां जनहित में दान कर दी थी|

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2 Responses to " बच्चों को शिक्षा में सहयोग देने का अनूठा तरीका था इस राजा का"

  1. kavita rawat   August 1, 2018 at 12:53 pm

    बहुत अच्छी प्रस्तुति
    आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं!

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  2. FutureTricks   September 1, 2018 at 11:20 am

    great blog. wonderful post.

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