कहाँ है रानी पद्मिनी का जन्म स्थान ?

कहाँ है रानी पद्मिनी का जन्म स्थान ?

चितौड़ की रानी पद्मिनी जिसे रानी पद्मावती के नाम से भी जाता है, अपनी बहादुरी, त्याग, बलिदान व अप्रितम सौन्दर्य के लिए इतिहास में विश्व विख्यात है, रानी पद्मावती के जौहर की कहानी बिना राजस्थान का इतिहास भी अधुरा लगता है| राजस्थान सहित भारतवर्ष के इतिहासकारों, लेखकों, साहित्यकारों ने रानी पद्मिनी के जौहर पर बहुत कुछ लिखकर इतिहास व साहित्य की पुस्तकों के ढेरों पन्ने भरे है|
ज्यादातर लेखकों, इतिहासकारों, कवियों ने अपनी अपनी रचनाओं में रानी पद्मिनी द्वारा रावत रतन सिंह को अल्लाउदीन खिलजी की कैद से छुडाने के लिए किये गए कमांडो कार्यवाही व उसके बाद जौहर की चर्चाएँ तो खूब की पर रानी पद्मिनी का जन्म कहाँ हुआ, उसके पिता का नाम क्या था ? वह किस राज्य की राजकुमारी थी ? उसका जन्म से नाम पद्मिनी ही था या फिर उसके रूप सौन्दर्य, बुद्धिमता व वीरता के चलते उसे हमारे शास्त्रों में वर्णित महिलाओं की चार श्रेणियों में सबसे श्रेष्ठ श्रेणी पद्मिनी श्रेणी में शामिल कर पद्मिनी नाम दिया गया| इस पर किसी भी लेखक ने प्रकाश नहीं डाला|

गोरा बादल कवित्त, गोरा बादल चौपाई, गोरा बादल पद्मिनी चौपाई, पद्मिनी चरित्र चौपाई, खोमन या खुमान रासो आदि के लेखकों जायसी, हेमरतन, जटमल नाहर, दौलत विजय आदि लेखकों, साहित्यकारों ने हमारी राष्ट्रीय नायिका रानी पद्मिनी को सिंघलदीप या सिलोन की राजकुमारी माना है|

जायसी के अनुसार रानी पद्मिनी सिलोन के राजा गंधर्वसेन की पुत्री थी जिसे पाने के लिए चित्तौड़ के रावत रतन सिंह को आठ वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा था उसके बाद वे रानी पद्मिनी को विवाह कर चितौड़ लाये| जबकि उस काल सिलोन का राजा पराक्रम बाहू चतुर्थ था, साथ ही उस काल की सामरिक परिस्थितियों में रावत रतन सिंह के पास इतना समय ही नहीं था कि वे एक शादी के लिए आठ वर्षों तक संघर्ष कर सके| अत: सिलोन में रानी पद्मिनी के जन्म की बात सिर्फ साहित्यिक उपज लगती है|

साहित्यकारों ने अपने साहित्य में रानी पद्मिनी का जन्म सिंघलदीप बताना भी साहित्यिक दिमाग की ही उपज लगता है हो सकता पद्मिनी चरित्र चौपाई में पद्मिनी श्रेणी की महिलाओं के मिलने का स्थान सिंघलदीप लिखा है अत: हो सकता है उसी को ध्यान में रख साहित्यकारों ने चित्तौड़ की रानी पद्मिनी को सिंघलदीप की राजकुमारी बताया हो|

मुस्लिम लेखकों अबुल फजल व हाजी उद दाविर आदि ने अपने लेखन में चित्तौड़ की रानी का नाम पद्मिनी उल्लेखित करने के बजाय सिर्फ एक अति सुन्दर रानी का ही उल्लेख किया है|

कर्नल जेम्स टॉड ने अपनी पुस्तक एनल्स एंड एंटीक्यूटी ऑफ़ राजस्थान में हमारी राष्ट्रीय ऐतिहासिक नायिका रानी पद्मिनी को राजा हमीर संक (हमीर सिंह चौहान) की पुत्री माना है| कर्नल टॉड लिखता है- रानी का मूल नाम दूसरा हो सकता है और हो सकता है उसकी विशेष सुंदरता व गुणों के चलते उसे पद्मिनी नाम बाद में दिया गया हो|

यूँ तो राजस्थान में बीकानेर के पास एक पूंगल नामक स्थान है जो पद्मिनियों के लिए विख्यात है, राजस्थान की प्रसिद्ध प्रेम कहानी “ढोला मारू” की नायिका मारुवणी इसी पूंगल की राजकुमारी थी| आज भी राजस्थान के गांवों में किसी सुंदर महिला को पद्मिनी की उपमा देते हुए कह दिया जाता है- ये तो पूंगल की पद्मिनी है, या अति सुन्दर पत्नी की कामना रखने वाले किसी लड़के से मजाक में कह दिया जाता है –इसको तो पूंगल की पद्मिनी चाहिये|

राजस्थान के सुप्रसिद्ध इतिहासकार ओझा जी के अनुसार हमारी इस ऐतिहासिक राष्ट्र नायिका रानी पद्मिनी का जन्म स्थान चित्तौड़ से चालीस मील दूर सिंगोली नामक गांव है, अमर काव्य वंशावली में भी रानी पद्मिनी का जन्म स्थान सिंगोली गाँव ही उल्लेखित है|

मुझे ओझा जी का मत ज्यादा सटीक लगता है क्योंकि रानी पद्मिनी चित्तौड़ के ही आस पास की किसी छोटी रियासत की राजकुमारी रही होगी| गोरा बादल पर साहित्य व इतिहास में जो थोड़ी बहुत जानकारी मिलती है उसके अनुसार भी यही लगता है कि वे चित्तौड़ के पास सिंगोली की ही राजकुंवरी थी| गोरा बादल चौहान राजपूत थे, उनकी चित्तौड़ के किले में हवेली भी थी जो आज भी खंडित अवस्था में मौजूद है, गोरा रानी पद्मिनी के ककोसा (चाचा) थे तो बादल रानी का चचेरा (कजिन) भाई था जिसके पिता का नाम गजानन था| गोरा बादल की वीरता पर तो साहित्यकारों, इतिहासकारों, कवियों ने खूब लिखा पर उनके परिचय के बारे में इससे ज्यादा जानकारी नहीं मिलती|

“रानी पद्मिनी दी हिरोइन ऑफ़ चित्तौड़” नामक अंग्रेजी पुस्तक के लेखक बी.के. करकरा भी इसी तरह विश्लेषण करते हुए लिखते है यह सत्य है कि रानी पद्मिनी हमारी गौरवपूर्ण राष्ट्रीय नायिका है जो सिंघलदीप या सिलोन की नहीं चित्तौड़ के ही पास के किसी स्थान के शासक की राजकुमारी थी|

ओझा जी का मत सटीक लगने के बावजूद मैं मानता हूँ कि रानी के जन्म स्थान के बारे में और शोध की आवश्यकता है| आपके पास यदि इस संबंध में कोई जानकारी हो तो कृपया संझा करे|

हमारे शास्त्रों के अनुसार रूप सौन्दर्य,विचार, व्यवहार आदि गुणों के आधार पर स्त्रियों को चार श्रेणियों में बांटा गया है- पद्मिनी,चित्रणी,हस्तिनी व संखिणी, पद्मिनी चरित्र चौपाई नामक पुस्तक में लेखक ने इन चारों श्रेणियों की महिलाओं के अलग अलग गुणों आदि पर इस तरह प्रकाश डाला है-

पद्मिनी पद्म गन्धा च पुष्प गन्धा च चित्रणी|
हस्तिनी मच्छ गन्धा च दुर्गन्धा भावेत्संखणी||

पद्मिनी स्वामिभक्त च पुत्रभक्त च चित्रणी|
हस्तिनी मातृभक्त च आत्मभक्त च संखिणी ||

पद्मिनी करलकेशा च लम्बकेशा च चित्रणी |
हस्तिनी उर्द्धकेशा च लठरकेशा च संखिणी ||

पद्मिनी चन्द्रवदना च सूर्यवदना च चित्रणी |
हस्तिनी पद्मवदना च शुकरवदना च संखिणी ||

पद्मिनी हंसवाणी च कोकिलावाणी च चित्रणी |
हस्तिनी काकवाणी च गर्दभवाणी च संखिणी ||

पद्मिनी पावाहारा च द्विपावाहारा च चित्रणी |
त्रिपदा हारा हस्तिनी ज्ञेया परं हारा च संखिणी ||

चतु वर्षे प्रसूति पद्मन्या त्रय वर्षाश्च चित्रणी |
द्वि वर्षा हस्तिनी प्रसूतं प्रति वर्ष च संखिणी ||

पद्मिनी श्वेत श्रृंगारा, रक्त श्रृंगारा चित्रणी |
हस्तिनी नील श्रृंगारा, कृष्ण श्रृंगारा च संखिणी ||

पद्मिनी पान राचन्ति, वित्त राचन्ति चित्रणी |
हस्तिनी दान राचन्ति, कलह राचन्ति संखिणी ||

पद्मिनी प्रहन निंद्रा च, द्वि प्रहर निंद्रा च चित्रणी |
हस्तिनी प्रहर निंद्रा च, अघोर निंद्रा च संखिणी ||

चक्रस्थन्यो च पद्मिन्या, समस्थनी च चित्रणी |
उद्धस्थनी च हस्तिन्या दीघस्थानी संखिणी ||

पद्मिनी हारदंता च, समदंता च चित्रणी |
हस्तिनी दिर्घदंता च, वक्रदंता च संखिणी ||

पद्मिनी मुख सौरभ्यं, उर सौरभ्यं चित्रणी |
हस्तिनी कटि सौरभ्यं, नास्ति गंधा च संखिणी ||

पद्मिनी पान राचन्ति, फल राचन्ति चित्रणी |
हस्तिनी मिष्ट राचन्ति, अन्न राचन्ति संखिणी ||

पद्मिनी प्रेम वांछन्ति, मान वांछन्ति चित्रणी |
हस्तिनी दान वांछन्ति, कलह वांछन्ति संखिणी ||

महापुण्येन पद्मिन्या, मध्यम पुण्येन चित्रणी |
हस्तिनी च क्रियालोपे, अघोर पापेन संखिणी ||

पद्मिनी सिंघलद्वीपे च, दक्षिण देशे च चित्रणी |
हस्तिनी मध्यदेशे च, मरुधराया च संखिणी ||

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