रानी जवाहर बाई

रानी जवाहर बाई

मेवाड़ के महाराणा संग्रामसिंह का पुत्र विक्रमादित्य विलासी और योग्य शासक था | मेवाड़ राज्य की बागडोर जब उसके हाथ में आई तो उसके कुप्रबंधन के चलते राज्य में अव्यवस्था फ़ैल गई | मेवाड़ की पड़ोसी रियासतें मालवा व गुजरात के पठान शासकों ने इस अराजकता का लाभ उठाकर चितौड़ पर आक्रमण कर दिया | शक्तिहीन विक्रमादित्य मुकाबला करने में अपने आपको असमर्थ समझकर अपने प्राण बचाकर भाग खड़ा हुआ |
शत्रु सेना नगर में जब प्रवेश करने वाली ही थी तो राजपूत नारियों ने “जौहर”करने की ठानी | पर अपने सतीत्व की रक्षा के लिए जौहर में जलने को उद्धत राजपूत नारियों को विक्रमादित्य की राजरानी जवाहर बाई ने ललकारते हुए कहा-“वीर क्षत्राणियों ! जौहर करके हम सिर्फ अपने सतीत्व की ही रक्षा कर पाएंगी,इससे अपने देश की रक्षा नहीं सकती | उसके लिए तो तलवार लेकर शत्रु सेना से युद्ध करना होगा | हमें हर हाल में मरना तो है ही,इसलिए चुपचाप और असहाय की भांति जौहर की ज्वालाओं में जलने से अच्छा है हम शत्रु को मार कर मरें| युद्ध में शत्रुओं का खून बहाकर रणगंगा में स्नान कर अपने जीवन को ही नहीं अपनी मृत्यु को भी सार्थक बनाए |
रानी जवाहर बाई की इस ललकार को सुनकर जौहर को उद्धत कई अगणित राजपूत वीरांगनाएं हाथों में तलवारें थाम युद्ध के लिए उद्धत हो गई | चितौड़ के किले में एक ओर जौहर यज्ञ की प्रचंड ज्वालाएँ धधक रही थी तो दूसरी ओर एक अद्भुत आग का दरिया बह रहा था | रानी जवाहर बाई के नेतृत्व. में घोड़ों पर सवार,हाथों में नंगी तलवारें लिए वीर वधुओं का यह दल शत्रु सेना पर कहर ढा रहा था | इस प्रकार सतीत्व के साथ स्वत्व और देश रक्षा के लिए रानी जवाहर बाई के नेतृत्व में इन क्षत्रिय वीरांगनाओं ने जो अद्भुत शौर्य प्रदर्शन किया करते हुए वीरगति प्राप्त की |
!! नमन है इन वीरांगनाओं के अद्भुत शौर्य और बलिदान को !!

13 Responses to "रानी जवाहर बाई"

  1. Pagdandi   March 9, 2011 at 2:50 am

    natmastak in viragnao k aage

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  2. मनोज कुमार   March 9, 2011 at 2:59 am

    अच्छी जानकारी दी आपने।
    नमन है इन वीरांगनाओं के अद्भुत शौर्य और बलिदान को !

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  3. Udan Tashtari   March 9, 2011 at 3:49 am

    बहुत आभार आपका.

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  4. NEHA MATHEWS   March 9, 2011 at 4:10 am

    नमन …

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  5. padmsingh   March 9, 2011 at 5:28 am

    गर्व है ! नमन है !

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  6. नरेश सिह राठौड़   March 9, 2011 at 7:16 am

    वीरांगना को नमन

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  7. प्रवीण पाण्डेय   March 9, 2011 at 9:28 am

    ऐसी वीरांगनाओं को नमन।

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  8. ताऊ रामपुरिया   March 9, 2011 at 3:26 pm

    इन वीरांगना को सादर नमन.

    रामराम

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  9. राज भाटिय़ा   March 9, 2011 at 4:46 pm

    देश की वीरांगना को सादर नमन, आप का धन्यवाद

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  10. डॉ॰ मोनिका शर्मा   March 9, 2011 at 7:25 pm

    देश की ऐसी वीरांगनाओं को नमन…..

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  11. shekhawat   March 10, 2011 at 6:03 am

    jai ho naari saikti

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  12. shekhawat   March 10, 2011 at 6:06 am

    Ratan singhji aap ka bhauth dhanwad is jankari ke lia

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  13. Patali-The-Village   March 10, 2011 at 12:52 pm

    नमन है इन वीरांगनाओं के अद्भुत शौर्य और बलिदान को| धन्यवाद|

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