कुछ राजस्थानी कहावतें हिंदी व्याख्या सहित

घोड़ा रो रोवणौ नीं,घोड़ा री चाल रौ रोवणौ है |=घोडे का रोना नही घोडे की चाल का रोना है |

एक चोर किसी का घोड़ा ले गया | पर घोडे के मालिक को घोडे की चिंता नही थी | उसका रोना तो फकत इस बात का था कि अन्भिज्ञ चोर घोडे की चाल बिगाड़ देगा | उपभोक्ता संस्कृति और आधुनिक विज्ञानं एवं प्रोद्योगिकि ने सब देशो की स्वस्थ और जीवन्त परम्परा का अपहरण कर लिया तो कोई बात नही, पर इससे मनुष्य की सारी चाल ही बिगड़ गई | यदि उसका मनुष्यत्व नष्ट हो गया तो क्या उसकी पूर्ति बेइंतहा पूंजी से हो जायेगी ? मनुष्य के लिए उसका आचरण बिगड़ने की क्षति ही सबसे क्षति है |
भौतिक नुकसान चाहे जितना हो,उसकी पूर्ति सम्भव है | किंतु भ्रष्ट चरित्र की पूर्ति लाख कोहिनूर हीरों से भी नही हो सकती | व्यक्ति के आदर्श एवं नैतिक वजूद की आज जितनी जरुरत है,उतनी पहले कभी नही थी | विकार-ग्रस्त मनुष्य की मामूली कुंठा हजारों प्राणियों को सांसत में डाल सकती है |

म्है ही खेल्या अर म्है ई ढाया |= हम ही खेले और हमने ही बिखेरे |

हमने ही घरोंदे बनाये और हमने ही ढहाए | यह कहावत समिष्टि के लिए उपयुक्त है और समिष्टि के लिए भी कि मनुष्य बचपन और युवावस्था में नए-नए खेल खेलता है और उन्हें भूलता रहता है | घरोंदे बनाना और बिखेरना,यह मानव जाति और व्यक्ति के जीवन की अनंत गाथा है |– आधुनिक सभ्यता के नाम पर मनुष्य ने क्या-क्या करतब नही रचे , और साथ ही विध्वंसक हथियारों की होड़ में कोई कसर बाकी नही रखी | मनुष्य ही समूचे विकास का नियंता है और वही समूचे विनाश का कारण बनेगा |- इस कहावत की तह में झांक कर देखें तो अमरीका का चेहरा उस में स्पष्ट नजर आता है कि वह ऐश्वर्य और विलास की उंचाईयों छूने जा रहा है,साथ-साथ वह समूची दुनिया का संहार का भी निमित्त बनेगा | इन लोक-वेद की रचनाओं को अपने प्रादेशिक आँचल से हटा कर अब अंतर्राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में समझना जरुरी है और व्यापक प्रष्ठभूमि में परखना अनिवार्य है |

आज री थेप्योड़ी आज नीं बले = आज के पाथे हुए कंडे आज नही जलते |

प्रत्येक काम के लिए अपना समय अपेक्षित है | जल्दबाजी करने से काम नही होता |किसी भी काम की योग्यता निरंतर अभ्यास से हासिल होती है,कोई भी व्यक्ति एक दिन में पारंगत नही हो सकता | सभी तथ्य समय सापेक्ष होते है,समय के महत्व को नजर-अंदाज करने का नतीजा बड़ा घातक होता है | मनुष्य के जीवन में धेर्य का भी बड़ा महत्त्व है |

ये थी कुछ राजस्थानी कहावते और वर्तमान सन्दर्भ में उनकी हिंदी व्याख्या | ये तो सिर्फ़ बानगी है ऐसी ही 15028 राजस्थानी कहावतों को हिंदी व्याख्या सहित लिखा है राजस्थान के विद्वान लेखक और साहित्यकार विजयदान देथा ने | विजयदान देथा किसी परिचय के मोहताज नही शायद आप सभी इनका नाम पहले पढ़ या सुन चुके होंगे | और इन कहावतों को वृहद् आठ भागो में प्रकाशित किया है राजस्थानी ग्रंथागार सोजती गेट जोधपुर ने |

14 Responses to "कुछ राजस्थानी कहावतें हिंदी व्याख्या सहित"

  1. रंजन   February 13, 2009 at 4:04 am

    बहुत अच्छी.. लगता हो जोधपुर से बहुत किताबें ले कर आये है..

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  2. Udan Tashtari   February 13, 2009 at 4:23 am

    ये बढ़िया काम किया. आभार.

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  3. रवीन्द्र प्रभात   February 13, 2009 at 4:57 am

    राजस्थान की कहाबतों की बड़ी सुंदर व्याख्या हुयी है इस पोस्ट में , बधाईयाँ !

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  4. RAJIV MAHESHWARI   February 13, 2009 at 5:37 am

    अच्छा प्रयास …..जारी रखना भाई……..

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  5. pankajrago   February 13, 2009 at 8:34 am

    Nice post Sir

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  6. अजित वडनेरकर   February 13, 2009 at 8:43 am

    बहुत अच्छा लगा। बढिया पोस्ट थी। आनंददायक अनुभव…

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  7. अजित वडनेरकर   February 13, 2009 at 8:44 am

    “घी ढुळे तो कांई नी, पाणी ढुळे तो जीव बळे” कहावत याद आ गई…

    ::)))))

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  8. ताऊ रामपुरिया   February 13, 2009 at 10:47 am

    बहुत आभार आपका. ये विजयदान जी देठा वहीं हैं क्या, जिनकी कहानी पर शाहरुख खान ने पहेली पिक्चर बनाई थी?

    रामराम.

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  9. Ratan Singh Shekhawat   February 13, 2009 at 12:56 pm

    हाँ ताऊ , ये वही विजयदान देथा है जिनके उपन्यास पर शाहरुख़ खान ने “पहेली” नामक फ़िल्म बनाई थी !

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  10. बहुत सुंदर प्रयास है। इसे लगातार करते चलें तो राजस्थानी और हिन्दी का बहुत उपकार होगा।

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  11. योगेन्द्र मौदगिल   February 13, 2009 at 2:03 pm

    बेहतरीन……… इन आंचलिक लोकोक्तियों के लिये साधुवाद स्वीकारें…

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  12. राज भाटिय़ा   February 13, 2009 at 6:07 pm

    बहुत ही सुंदर,कहवते होती है हमे शिक्षा देने के लिये,
    धन्यवाद.

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  13. नरेश सिह राठौङ   February 14, 2009 at 3:21 am

    जोधपुर कि हवा पानी लेने से काफ़ी ताजगी आ गयी है इस लिये लगातार पोस्ट पेल रहे है । वैसे आपकी यह पोस्ट भी हमेशा कि तरह अच्छी है । इस प्र्कार कि कहावतो का एक ओन लाइन संग्रह jatland.com पर भी है ।

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  14. नितिन व्यास   February 15, 2009 at 1:34 am

    बढ़िया

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