इस जाट वीर ने अकबर की कब्र खोदकर अस्थियाँ जला डाली थी

इस जाट वीर ने अकबर की कब्र खोदकर अस्थियाँ जला डाली थी

ज्ञान दर्पण पर इतिहास के लेखों की श्रंखला में आप अक्सर राजस्थान के राजपूत वीरों का इतिहास पढ़ते रहते है, पर इस वीर प्रसूता भूमि ने राजपूतों के अलावा अन्य जातियों में भी अनेक वीर पैदा किये है जिन्होंने धर्म की रक्षा के लिए हल (कृषि के औजार) छोड़कर तलवार थाम धर्म विरोधी शासकों से जमकर लोहा ले अपनी वीरता का प्रदर्शन किया है| खास बात तो यह है कि ऐसे वीरों ने बिना प्रशिक्षित सेना के सिर्फ जन समुदाय को इक्कठा कर उसी के सहारे क्रूर धर्म विरोधी सत्ता से टक्कर ली | आज ऐसे ही एक वीर से परिचय करते है जिसने अपना कृषि कार्य छोड़कर किसान मजदूरों के सहारे भारत के सबसे कट्टर धार्मिक उन्मादी बादशाह औरंगजेब के खिलाफ विद्रोह कर अपनी वीरता डंका बजाया |
इस बांके वीर द्वारा औरंगजेब की धर्म विरोधी नीतियों के खिलाफ विद्रोह के बारे में ठाकुर सुरजनसिंह शेखावत अपनी पुस्तक ‘गिरधर वंश प्रकाश’ जो राजस्थान के तत्कालीन खंडेला ठिकाने का वृहद् इतिहास है में लिखते है –
मेवात प्रान्त के बृजमंडल-क्षेत्र के निवासी जाट वीर, यद्धपि खेतिहर किसान थे, किन्तु वे जन्म-जात लड़ाकू वीर योद्धा भी थे| अन्याय और अत्याचार के प्रतिकार हेतु शक्तिशाली सत्ता-बल से टकराने के लिए भी वे सदैव कटिबद्ध रहते थे | बादशाह औरंगजेब की हिन्दू धर्म विरोधी नीति व मथुरा व वृन्दावन के देवमन्दिरों को ध्वस्त करने के चलते उत्तेजित जाटों ने जाट वीर गोकुला के नेतृत्व में संगठित होकर स्थानीय मुग़ल सेनाधिकारियों से डटकर मुकाबला किया था | उनसे लड़ते हुए अनेक मुग़ल मनसबदार मारे गए | जाटों ने गांवों का लगान देना बंद कर दिया | मुग़ल सेना से लड़ते हुए जाट वीर गोकुला के मारे जाने पर सिनसिनी गांव के चौधरी भज्जाराम के पुत्र राजाराम जो अप्रतिम वीर एवं योद्धा था ने उस विद्रोह का नेतृत्व संभाला |

जाट वीर राजाराम ने बादशाह के खालसा गांव में जमकर लूटपाट की एवं दिल्ली आगरा के बीच आवागमन के प्रमुख मार्गों को असुरक्षित बना दिया |जो भी मुग़ल सेनापति उसे दबाने व दण्डित करने के लिए भेजे गए वे सब पराजित होकर भाग छूटे |

जाट वीर राजाराम ने आगरा के समीप निर्मित सम्राट अकबर के भव्य एवं विशाल मकबरे को तोड़फोड़ कर वहां पर सुसज्जित बहुमूल्य साजसामान लुट लिया व कब्रों को खोदकर सम्राट अकबर व जहाँगीर के अवशेषों (अस्ति-पंजरों) को निकालकर अग्नि को समर्पित कर दिया | केसरीसिंह समर के वर्णानुसार –

ढाही मसती बसती करी, खोद कबर करि खड्ड |
अकबर अरु जहाँगीर के , गाडे कढि हड्ड ||

केसरीसिंह समर का उक्त वर्णन अतिश्योक्ति न होकर एक प्रमाण-पुष्ट तथ्य है,जिसकी पुष्टि तत्कालीन फ्रेंच यात्री निकोलो-मनूची के यात्रा विवरण के निम्नांकित उल्लेख से भी होती है | उसने लिखा है –
‘The Sikandara was looted by jats in march 1688 A.D. Even the skelaton of Akbar the great,was taken out and the bones were consumed to flames ‘ (Storia-Mogor by Manucci)प्रसिद्ध अंग्रेज इतिहास लेखक विन्सेंट स्मिथ ने भी अपनी पुस्तक “अकबर दी ग्रेट मुग़ल” में निकोलो-मनूची के उल्लेख की पुष्टि करते लिखा है – ‘बादशाह औरंगजेब जब दक्षिण में मराठा युद्ध में सलंग्न था -मथुरा क्षेत्र के उपद्रवी जाटों ने सम्राट अकबर का मकबरा तोड़ डाला | उसकी कब्र खोदकर उसके अवशेष अग्नि में जला डाले | इस प्रकार अकबर की अंतिम आंतरिक -इच्छा की पूर्ति हुई |'(Akbar the great mugal-P328, vincent smith)

आगरा सूबा में नियुक्त मुग़ल सेनाधिकारियों से राजाराम का दमन नहीं किया जा सका, तो बादशाह ने आम्बेर के राजा बिशनसिंह को,जिसका पिता राजा रामसिंह उन्ही दिनों में मृत्यु को प्राप्त हुए थे -मथुरा का फौजदार बनाकर जाटों के विरुद्ध भेजा | राजा बिशनसिंह उस समय नाबालिग था सो लाम्बा का ठाकुर हरिसिंह उसका अभिभावक होने के नाते सभी कार्य संचालित करता था | ठाकुर हरीसिंह ने ही खंडेला के राजा केसरी सिंह जो खुद भी बाद में औरंगजेब का विद्रोही बना और शाही सेना से युद्ध करता हुआ वीर गति को प्राप्त हुआ था को समझाकर साथ ले आया था | हालांकि खंडेला का राजा केसरीसिंह उस वक्त शाही सेवा में नहीं था |

केसरीसिंह समर के अनुसार-‘राजाराम को दण्डित करने हेतु राजा केसरीसिंह को भी शाही फरमान भेज कर आमंत्रित किया गया था | अपने भाई बांधवों के साथ केसरीसिंह ने युद्धार्थ प्रयाण किया | रेवाड़ी परगने के खोहरी नामक कस्बे के पास अपनी सैनिक चौकी स्थापित करके केसरीसिंह ने राजाराम के ठिकानों पर आक्रमण किए | राजाराम भी मुकाबले के लिए अपने साथियों के आया और दोनों दलों के बीच जमकर घोर युद्ध हुआ | जाटों की सेना पराजित होकर समर-भूमि से पलायन कर गई | “जाटों के नवीन इतिहास” के अनुसार -राजाराम युद्ध में घायल होकर बंदी बना लिया गया था | सेना के मुग़ल सैनिकों ने उसका मस्तक काटकर बादशाह के पास भेज दिया |

इस प्रकार इस जाट वीर ने धर्म विरोधी शाही नीति के खिलाफ विद्रोह में वीर-गति प्राप्त की|

Rajaram Jat History in Hindi

34 Responses to "इस जाट वीर ने अकबर की कब्र खोदकर अस्थियाँ जला डाली थी"

  1. ललित शर्मा   October 18, 2010 at 1:33 am

    इतिहास की अच्छी जानकारी दी आपने

    विजयादशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

    Reply
  2. एकलव्य   October 18, 2010 at 2:29 am

    बहुत ही अच्छी रोचक एतिहासिक जानकारी दी है … बहुत कुछ जानने का मौका मिला …आभार

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  3. Pagdandi   October 18, 2010 at 3:05 am

    bhut acchi jankari hukum …..sabse jyada ye accha laga ki aap ne dusri jatiyo k viro ka bhi samman kiya …aur unki virta ke itihas ko hamare samne lane ka pryas …..prshsniy h .thnx hukum ….

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  4. प्रवीण पाण्डेय   October 18, 2010 at 3:19 am

    रोचक जानकारी।

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  5. Uncle   October 18, 2010 at 3:30 am

    आज तो बहुत ही रोचक जानकारी मिली | अकबर की अस्थियाँ खोदकर अग्नि के हवाले कर दी गई थी ये पहली बार पता चला |

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  6. नीरज जाट जी   October 18, 2010 at 5:34 am

    शेखावत जी, नमस्कार
    आजकल मैं वृन्दावन लाल वर्मा द्वारा लिखित पुस्तक "माधवजी सिंधिया" पढ रहा हूं। इसमें औरंगजेब के बाद का वर्णन है। जाट राजा सूरजमल का वर्णन भी पूरे विस्तार से किया गया है।
    राजपूताने में केवल मेवाड को छोडकर सभी राजा मुगलों के अधीन थे। अगर वे एक बार मराठों और जाटों के साथ कन्धे से कन्धा मिला लेते, तो क्या मजाल थी अब्दाली की कि पानीपत से जिन्दा लौटता।

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  7. कमाल है… आज ही पता चला…

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  8. संजय बेंगाणी   October 18, 2010 at 7:31 am

    अकबर का अंतिम संस्कार हुआ…. रोचक जानकारी.

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  9. नरेश सिह राठौड़   October 18, 2010 at 9:20 am

    धन्य है ये धरती इस प्रकार के वीरो से | इस ऐतिहासिक जानकारी हेतु आभार |

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  10. रंजन   October 18, 2010 at 10:02 am

    वाह पता नहीं इतिहास में ये क्यों नही पढ़ाया जाता..

    धन्यवाद..

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  11. ज़ाकिर अली ‘रजनीश’   October 18, 2010 at 10:24 am

    गजब की जानकारी मिली आज।

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  12. arganikbhagyoday   October 18, 2010 at 12:42 pm

    इतिहास की अच्छी जानकारी दी आपने

    विजयादशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

    Reply
  13. dhiru singh {धीरू सिंह}   October 18, 2010 at 2:07 pm

    कुछ अज़ीब सी खुशी मिली यह पढकर.

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  14. kunwarani nisha kanwar   October 18, 2010 at 3:12 pm

    Thanx hukam yah is baat ka sabut hai ki jat vir bhi kabhi kshatriya hi the,aur humare bichude huye bhai hi hai,,,,,,,,,,jai kshatra-dharm jai marudhra ma
    Aise Vir Rajaram ji ki seva me sat-sat naman

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  15. काजल कुमार Kajal Kumar   October 18, 2010 at 3:20 pm

    मेरे लिए यह नई जानकारी रही. मैंने यह पहले कहीं नहीं पढ़ा था.

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  16. राज भाटिय़ा   October 18, 2010 at 3:49 pm

    अति सुन्दर प्रस्तुति . धन्यवाद

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  17. शेखावत जी प्रणाम
    सर्वप्रथम आपको धन्यवाद , जाटों के इतिहास के बारे में लिखने के लिये । जाट लेखन के बारे में सदैव ही उपेक्षित रहे हैं , खैर मेरे आपसे कुछ प्रश्न हैं यदि सम्भव हो तो गौर कीजिएगा ।
    क्या ग्वालियर का किला जाटों द्वारा निर्मित था ?
    सोलंकी , गहलौत , तोमर आदि बहुत से गोत्र जाटों तथा राजपूतों
    दोनो में पाये जाते हैं इस विषय में क्या विचार है?
    मेरा गोत्र पलावत है , हमारे गोत्र के कुछ लोग जयपुर के पास
    रहते हैं , क्या उनके निकास के बारे में आपको कुछ पता है?

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  18. नई जानकारी

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  19. RAHUL PUNDHIR   October 20, 2010 at 10:32 am

    vey good new informaition

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  20. P.N. Subramanian   October 22, 2010 at 8:46 am

    वीर राजाराम के बारे में पहली बार यह जाना. अकबर और जहाँगीर के हड्डियों को निकाल कर अग्नि में जलाए जाने की भी जानकारी हमारे लिए नईं है. आभार.

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  21. Learn By Watch   November 17, 2010 at 5:30 am

    आप अच्छी जानकारियाँ देते है पर आप paragraph के बीच मे यदि एक लाइन का अंतर रखेंगे तो पढने मे काफी सुविधा होगी

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  22. रोचक जानकारी। यह बात एक पाकिस्तानी डॉक्टर ने (थोडा अलग प्रकार से) बताई थी तब यक़ीन करना मुश्किल था लेकिन अब यहाँ पढकर शक़ का कोई कारण नहीं दिखता।

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  23. mukesh choudhary   October 21, 2011 at 9:15 am

    Gud evening sir ji,,

    Mene first time contnue pure din tak rajasthan ki histry padhi,,, mere ko lagta hai ki, yadi hum logo me unity hoti to koi bhi hume hara nahi pata…
    Or mere ko ye bhi lagta h ki jatto ko histry me space nahi mila,,, jis kom ne desh ke liye aapni jann humensa di h or aage bhi deta rahega…
    jai hind, jai hinde , jai humanity

    Ajay choudhary
    mca
    jaipur

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  24. संजय बेंगाणी   May 23, 2012 at 1:16 pm

    गर्व होता है.

    Reply
  25. संजय बेंगाणी   May 23, 2012 at 1:16 pm

    गर्व होता है पढ़ कर.

    Reply
  26. Anil Singh   May 26, 2012 at 8:48 am

    जाटों के इतिहास के बारे मै पढकर मुझे गर्व मेहसू हुआ है .जाटों के गोत्र भी साईट पर डालने की कृपा केरे …:)

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  27. Ankit   June 8, 2012 at 7:36 pm

    इतिहास की बहुत अच्छी जानकारी दी जिसे बहुत कम लोग ही जानते होंगे, बहुत अच्छा ऐसे लेख प्रशंसनीय हैं.

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  28. Ghanshyam Kumar   August 13, 2012 at 3:39 pm

    nic words acha laga bhatiya history ko jankar

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  29. Gauri   September 16, 2012 at 4:03 am

    Respected Shekhwat:
    I am writing a book Novel right now " Saat Janam Ke Baad" when I find interesting Information , I try to mention that in my book as I am writing Novel about Rajputs Familes,
    Some of the Rajputs have settled and migrate in Punjab where they changed their Profession as Goldsmith and they been called Sonar. No one ever mention that the Migration fo Rajputs in other states instead treat each other differently. Even Indian History never informed the common Indian that Kashmir was also ruled by Rajputs. Many Bharati Have this notion as Kashmiri only Belong to Kashmiri Pundit and Muslims. Please Inform the readers about the Rajput History of Kashmir. Many Rajputs peace loving families were killed in Kashmir at the wake of terrorism in Kashmir 1987. I will give Credit in My Novel about Gyan Darpan as well mention your name thanks– Kamlesh Chauhan ( Gauri) The Author

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  30. प्रवीण पाण्डेय   May 20, 2013 at 9:04 am

    वीरों से भरी इस धरती को नमन।

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  31. ePandit   May 20, 2013 at 3:17 pm

    नमन है वीर राजाराम को। आपको धन्यवाद अकबर सम्बन्धी इस नवीन जानकारी के लिये।

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  32. bhagour shahab   September 24, 2016 at 6:25 am

    jatto ki veerata ke wareme bataneke liye dhanyabad

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  33. Rupendar Jat   December 2, 2016 at 11:23 am

    Ghrw Hota Hai jato ka itihas padh kar…..l
    Virasat Ki Is Dharti ko naman …..l
    Naman h veer Raja Ram jaat Ko

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  34. RAMA RAWAT   March 22, 2017 at 12:01 pm

    pls mujhe ye bataiye rajput or jaat me kya fark he kya ye ek hi he ya alag he aour agar alag he to diffrence kya he

    Reply

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