आग्यो राज लुगायां को

आग्यो राज लुगायां को

काका-ताऊ ना भायां को
आग्यो राज लुगायां को ।|

कोंग्रेस का च्यारूं मेर सूं कर दिन्या है सफाया
गहलोत सरकार की कुर्सी का तोड़ नाख्या पाया

ना यो पराया जाया , और ना ही माँ का जाया को
आग्यो राज लुगायां को ॥

जनता अर पाणी का रुख न कोई जाण ना पायो
वोट दिन्या वसुंधरा नै ,माल गेहलोत को खायो

ना यो बाणया-बामण अर न ही राज है नायां को
आग्यो राज लुगायां को ॥

राजसत्ता कब किसी की, एक छत्र रह पायी है
जनता के करवट की कीमत हर किसी ने चुकाई है

मंदिर देवता साधू -सन्यासी, हिन्दू धर्म की गायां को
आग्यो राज लुगायां को ||

गजेन्द्र सिंह शेखावत

6 Responses to "आग्यो राज लुगायां को"

  1. सतीश सक्सेना   December 10, 2013 at 4:09 am

    वाह . . .

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  2. ताऊ रामपुरिया   December 10, 2013 at 8:25 am

    इसीलिये तो फ़ारूख अब्दुल्ला साहब जैसों को डर लगता है.:)

    बहुत सटीक रचना.

    रामराम.

    Reply
  3. क्या बात वाह!

    Reply
  4. dr.mahendrag   December 10, 2013 at 11:28 am

    मंदिर देवता साधू -सन्यासी, हिन्दू धर्म की गायां को
    आग्यो राज लुगायां को
    जनतंत्र में यह तो होता ही है.,अच्छी रचना.

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  5. daulat singh bhayal   December 10, 2013 at 6:31 pm

    jai rajputana

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  6. प्रवीण पाण्डेय   December 11, 2013 at 1:49 pm

    वर्तमान की कविता

    Reply

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