राह पकड़ तू चल अनवरत

राह पकड़ तू चल अनवरत झंझावातों से डरना मत।
पूर्वजों की यश कीर्ति ,गौरव को ऐ राही ऐसे खोना मत ।।

प्रभु स्वयं अवतरित हुए जिस कुल में,उसके दाग लगाना मत ।
जौहर की आग में कूद पड़ी जो उनका दूध लजाना मत ।।

स्वाभिमानी,गौरव,अमर वीर ,प्रताप का वंशज भूल मत ।
अपना सर्वस्व सुख त्याग कर प्रजा हित ताउम्र रहा रत ।।

समय बदल गया -राज बदल गया, किन्तु कर्त्तव्य न बदला भूल मत ।
तलवार छोड़ कलम पकड़ व्यर्थ समय को टाल मत ।।

इस युग की मृग तृष्णा के इन झुलोनो में झूल मत ।
क्षत्रिय वंश की आदर्श परिपाटी का, ना बना अब मखोल मत ।।

सधे कदम बिना रुके, बढ़ने से बने कारवां भूल मत |
अनावश्यक व्यर्थ प्रपंचों को देना तू अब तूल मत।।

लेखक : गजेन्द्र सिंह ककराना

6 Responses to "राह पकड़ तू चल अनवरत"

  1. Bhom   August 20, 2012 at 2:44 am

    समय बदल गया -राज बदल गया, किन्तु कर्त्तव्य न बदला भूल मत ।
    तलवार छोड़ कलम पकड़, व्यर्थ समय को टाल मत ।।

    Rajasthan ke Vishvavidhyalayo/ Mahavidhyalayo ke chunavee natije bhee to yahee darshate hai…

    Dr. Bhom Singh Deora (Jakhri)

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  2. प्रवीण पाण्डेय   August 20, 2012 at 7:50 am

    उत्साह जगाती रचना..

    Reply
  3. Rajesh Kumari   August 20, 2012 at 8:44 am

    आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल २१/८/१२ को http://charchamanch.blogspot.in/ पर चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका स्वागत है

    Reply
  4. Dr. sandhya tiwari   August 20, 2012 at 3:08 pm

    ओजस्वी रचना ……….

    Reply
  5. dheerendra   August 21, 2012 at 8:32 am

    इस प्रेरक रचना के लिए गजेन्द्र सिंह जी को बधाई ,,,
    रचना पढवाने के लिए रतन सिंह जी बहुत२,,,आभार,,,,

    RECENT POST …: जिला अनुपपुर अपना,,,

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  6. अल्पना वर्मा   August 21, 2012 at 6:39 pm

    तलवार छोड़ कलम पकड़ व्यर्थ समय को टाल मत ।।
    ..बहुत अच्छी प्रेरक कविता .
    कलम की ताकत को पहचानने का वक्त है.

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