क्या है जोधा अकबर सीरियल विवाद ?

क्या है जोधा अकबर सीरियल विवाद ?

Zee TV पर प्रसारित होने जा रहे एकता कपूर की कम्पनी बालाजी टेलीफिल्म्स द्वारा निर्मित धारावाहिक जोधा अकबर के खिलाफ क्षत्रिय समाज में काफी रोष है और देश भर के क्षत्रिय संगठन श्री राजपूत करणी सेना की अगुवाई में इस धारावाहिक को रोकने के लिए आंदोलनरत है| एक तरफ सोशियल साइट्स पर राजपूत नवयुवकों द्वारा सीरियल के खिलाफ आवाज मुखर हो रही है वहीँ करणी सेना द्वारा इस सीरियल को रोकने के लिए शुरू किया गया अभियान देश की राजधानी दिल्ली तक पहुँच गया| और दो दिन पहले Zee TV के नोयडा स्थित कार्यालय के बाहर देशभर से आये एक हजार कार्यकर्ताओं ने इस धारावाहिक को रोकने के लिए Zee TV पर दबाव बनाने के लिए प्रदर्शन किया|

इससे पहले राजपुताना संघ व करणी सेना के कार्यकर्ताओं द्वारा Zee TV पर इस धारावाहिक के प्रसारण को रोकने के लिए इंडियन ब्राडकास्टिंग फाउंडेशन के अधिकारीयों को शिकायती ईमेल भेजे व अधिकारीयों से मिलकर इसके विरोध में लिखित शिकायत देते हुए इस धारावाहिक के प्रसारण को रोकने का अनुरोध किया|

Zee TV प्रबंधन ने IBF अधिकारीयों से मिले नोटिस व विभिन्न क्षत्रिय संगठनों के कार्यकर्ताओं द्वारा भेजे गए विरोध ईमेल्स को पढने व क्षत्रिय संगठनों द्वारा 5 जून को Zee TV कार्यालय पर प्रदर्शन करने का कार्यक्रम घोषित करने के बाद इस मुद्दे पर संवेदनशीलता बरतते हुए क्षत्रिय संगठनों के प्रतिनिधियों से वार्ता कर विवाद सुलझाने हेतु तथ्य समझने की कोशिश की|
और इसी के तहत Zee TV प्रबंधन टीम के अजय भंवरकर, सुचिता पद्मनाभन व पुरुषोतम आदि के साथ क्षत्रिय संगठनों के प्रतिनिधि व नेता लोकेन्द्र सिंह कालवी, रतन सिंह भगतपुरा, नारायण सिंह दिवराला, राजेंद्र सिंह बसेठ, भंवर सिंह रेटा, यु.एस. राणा, पूर्व विधायक वी.पी.सिंह, नन्द सिंह झाला IBF के दफ्तर में IBF के अधिकारीयों के सामने वार्ता हुई, जिसमें लोकेन्द्र सिंह कालवी ने आईने अकबरी, जहाँगीरनामा व विभिन्न प्राचीन इतिहास पुस्तकों के ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए तथ्यों के आधार पर साबित किया कि जोधा नाम की अकबर के कोई बीबी नहीं थी, और न ही किसी इतिहास पुस्तक में जोधा नाम की अकबर किसी पत्नी का जिक्र तो फिर किसी फिल्म या धारावाहिक का नाम जोधा अकबर रखना इतिहास को तोड़मरोड़ कर पेश करने का कुत्सित षड्यंत्र क्यों ?
कालवी ने Zee TV टीम को बताया कि यदि आप पुरानी इतिहास की किताबें नहीं पढ़ सकते तो कम से कम NCERT की ही किताबें पढ़ लीजिये जो सरकारी मान्यता प्राप्त है और बच्चों को स्कूली शिक्षा में पढाई जाती है उनमें भी जोधा नाम की अकबर की किसी बेगम का जिक्र नहीं है|

Zee TV प्रबंधन टीम कालवी द्वारा उपलब्ध कराये तथ्यों से प्रभावित हुई और उन्होंने वे सभी ऐतिहासिक संदर्भ बालाजी टेलीफिल्म्स को दिखाकर उनसे वार्ता कर इस मुद्दे को सुलझाने के प्रयास करने का वायदा किया साथ ही क्षत्रिय नेताओं के साथ बालाजी टेलीफिल्म्स प्रबंधन के साथ भी वार्ता कराने की इच्छा जाहिर की|

क्षत्रिय नेताओं को कहना था कि वे सारे सबूत दे चुके है कि अकबर के जोधा नाम की कोई पत्नी नहीं थी, हाँ जोधा नाम की जोधपुर के राजा उदयसिंह की एक दासी पुत्री जिसका नाम मनमती था कि शादी जहाँगीर से हुई थी जिसे जोधपुर की होने के चलते जोधा या जोधा बाई कहा गया जो अकबर की पुत्रवधू थी| अत: एक पुत्रवधू का नाम ससुर के साथ जोड़कर दिखाना इतिहास को तोड़ने मरोड़ने के अलावा सामाजिक मूल्यों के विपरीत भी है| अत: वार्ता करने का कोई फायदा नहीं बल्कि वार्ता करने के बजाय धारावाहिक का नाम बदला जाय या फिर इसका प्रसारण ही रोक दिया जाय|

ज्ञात हो कुछ वर्ष पहले आशुतोष गोवरिकर ने भी जोधा अकबर के नाम से फिल्म बनायीं थी तब उसका भी देशभर में विरोध हुआ था और देश की चार राज्य सरकारों ने अपने अपने राज्य में उसका प्रदर्शन बंद कर दिया था जहाँ न्यायायल के आदेश के बाद ही प्रदर्शित हो सकी पर राजस्थान में करणी सेना के सशक्त विरोध के चलते यह फिल्म आज तक राजस्थान के किसी भी छविगृह में प्रदर्शित नहीं हुई|

सोशियल साइट्स पर चर्चा के दौरान देखा गया कि बहुत से लोगों को जिनमें कई बुद्दिजीवी भी है को यह विवाद झूंठा लगा क्योंकि मुगले आजम फिल्म के बाद आम आदमी के मन में यह धारणा गहरे से बैठ गयी कि- जोधा नाम की आमेर की राजकुमारी की शादी अकबर के साथ हुई थी जो सरासर गलत है| मुगले आजम फिल्म के समय भी राजस्थान विश्व विद्यालय के एक इतिहास प्रोफ़ेसर आर.एस भार्गव ने जोधा नाम पर सवाल उठाते हुए विरोध किया था, इस विषय पर उनका एक शोध लेख भी अजमेर से निकलने वाले एक समाचार पत्र “न्याय” में छपा था पर सूचना तकनीकि के अभाव में उनका विरोध ज्यादा लोगों के सामने नहीं आ पाया जिन्हें पता भी चला उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया कि- क्या फर्क पड़ता है ? फिल्म तो मनोरंजन के लिए ही है| पर मनोरंजन वाली उसी फिल्म ने अपनी एक छोटी सी गलती के चलते आज इतिहास में भ्रम पैदा कर दिया|

यही नहीं बुद्धिजीवियों का एक ख़ास वर्ग पूर्वाग्रह के चलते यह भ्रम फ़ैलाने में भी लगा है कि- जोधा अकबर का विरोध कर राजपूत अपने अतीत में किये पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहें है उन्हें मैं साफ़ बता देना चाहता हूँ कि- राजपूत मुस्लिम विवाह संबंध बराबरी के आधार पर मुगलों के आने से पहले ही शुरू हो गए थे उस वक्त आज की तरह दोनों धर्मों के अनुयायियों में किसी भी तरह का साम्प्रदायिक मतभेद व विद्वेष नहीं था| इस संबंध में विस्तार से कभी बाद में चर्चा करूंगा|

आमेर की जिस राजकुमारी की शादी अकबर के साथ होना माना गया है इतिहास में उसका नाम हरका बाई लिखा गया है, खुद जहाँगीर ने अपनी पुस्तक जहाँगीर नामा (तजुक ए जहांगीरी) में अपनी माँ का नाम हरका बाई लिखा है| हालाँकि इतिहासकारों के अनुसार हरका के भी आमेर के राजा की पुत्री होने के बारे में विवाद है| बहुत से इतिहासकार हरका को राजा भारमल की एक पारसी दासी की पुत्री मानते है|

आमेर की इस राजकुमारी हरका के विवाह पर “अकबर ए महुरियत” में स्पष्ट रूप से लिखा है,”ہم راجپوت شہزادی یا اکبر کے بارے میں شک میں ہیں” ( हमें राजपुत विवाह पर संदेह है क्योंकि राजभवन में किसी की आँखों में आँसु नहीं था तथा ना ही हिन्दु गोद भराई की रस्म हुई थी )|” जबकि कोई भी माता-पिता अपनी पुत्री के विदा होते समय आँख में आंसू नहीं रोक सकते।
तजुक ए जहांगीरी जिसमें जहांगीर की आत्मकथा है उसमें जोधा बाई का उल्लेख नहीं है।
अरब की कई सारी किताबों में ऐसा वर्णित है “ونحن في شك حول أكبر أو جعل الزواج راجبوت الأميرة في هندوستان آرياس كذبة لمجلس” ( हमें यकिन नहीं है इस निकाह पर )
ईरान के ” Malik National Museum and Library” की किताबों में भारतीय मुगलों का दासी से निकाह का उल्लेख मिलता है।

हिस्ट्री के प्रोफेसर राजेंद्र सिंह खंगरोट का कहना है,’फैशन के लिए इतिहास के तथ्यों को तोड़ने मरोड़ने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। जोधा बाई का अकबर से कभी विवाह नहीं हुआ। इसके उलट अकबर के बेटे जहांगीर के साथ जोधा की शादी हुई थी। इस बात के भी कई संदर्भ मौजूद हैं कि जोधपुर के राजा मोटा राजा उदय सिंह की बेटी मनमती, जिनकी शादी जहांगीर के साथ हुई थी, जोधपुर की होने के कारण उनका नाम जोधा बाई पड़ा था। जहांगीरनामा में भी इसका जिक्र है। लेकिन इसे शर्मनाक ही कहा जाएगा कि जोधा का नाम उनके ससुर के साथ जोड़कर दिखाया जाता है। अगर फिल्में और सीरियल बनाने वालों के पास जानकारी नहीं है तो वे एनसीईआरटी की किताब पढ़ सकते हैं।“

नोट : इस विषय पर जल्द ही विभिन्न इतिहासकारों द्वारा अपनी इतिहास पुस्तकों में दी गयी जानकारियों के सन्दर्भ पुस्तक का लेखक सहित नाम, पृष्ठ संख्या सहित एक लेख ज्ञान दर्पण पर प्रकाशित किया जायेगा ताकि आम व्यक्ति इस विवाद की सच्चाई से रूबरू हो सके|

14 Responses to "क्या है जोधा अकबर सीरियल विवाद ?"

  1. Vineet Kumar Singh   June 7, 2013 at 2:04 pm

    कृपया तथ्यों को जनता के भी सामने लाया जाये केवल प्रसारण बोर्ड तक ही सीमित ना रखें

    ऐसा मेरा आग्रह है

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  2. kalyansingh rathore   June 7, 2013 at 2:16 pm

    शायद इन कोशिशों से तथाकथित बुद्धिजीवियों की अक्ल पर पड़े पत्थर हटें और उन्हें सही इतिहास जानने का मौका मिले। साधुवाद।

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  3. Gajendra singh Shekhawat   June 7, 2013 at 2:20 pm

    अकबर ए महुरियत की आयात देकर आपने प्रमाणिकता को पुष्टता प्रदान की है ।उस काल की कई दासियों का मुगलों को भ्रमित कर उसे राजपुत्री का नाम देकर विवाह करने को उन्हें ही राजपुत्री कुछ अल्पज्ञ इतिहास वेताओं ने मान लिया है ।
    राज्य पर आये संकट व् हजारों निर्दोष लोगो को युद्ध की विभित्सका से बचाने के लिए उस काल में राजपूती रनिवासों से दासियों को मुगलों से परिणय में बांध दिया जाता था ।

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  4. ताऊ रामपुरिया   June 7, 2013 at 2:44 pm

    ऐतिहासिक तथ्यों के साथ तोडमरोड करना अपनी संस्कृति का अपमान है जो कदापि बर्दाश्त नही किया जाना चाहिये. आपके अगले आलेख का इंतजार रहेगा.

    रामराम.

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  5. HARSHVARDHAN   June 7, 2013 at 2:48 pm

    आपकी बातों से सहमत हूँ। सच्चाई देश की जनता के सामने आनी ही चाहिए।
    इस सन्दर्भ में आपके अगले लेख का इंतजार रहेगा। आभार

    घुइसरनाथ धाम – जहाँ मन्नत पूरी होने पर बाँधे जाते हैं घंटे।

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  6. Rajput   June 7, 2013 at 3:05 pm

    जातिगत वैमनस्य की देन है इस तरह के उल्लेख जो अक्सर विवादों मे रहे हैं। अब समय है ऐसे विवादित शोध को संसोधित करने का ।

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  7. anshumala   June 7, 2013 at 5:21 pm

    टीवी धारावाहिक पृथ्वी राज चौहान , और झासी की रानी जैसे धारावाहिकों का क्यों नहीं विरोध किया गया , उन धारावाहिकों ने तो उसे चंद्रकांता से भी बकवास फेंटेसी कहानी बना दी थी लेकिन कही से कोई विरोध नहीं उठा , क्या वो लोग राजपूत नहीं थे , या ऐतिहासिक लोग नहीं थे , इस विरोध में भी लोगो के स्वार्थ है तभी हो रहा है नहीं तो यहाँ भी नहीं होता , ये कही न कही मात्र इतिहास की चिंता नहीं बल्कि कुछ निजी सोच के कारण है , राजपूत और मुस्लिम संबंधो के कारण हो रहा हो तो इसमे आश्चर्य नहीं है ।

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    • Ratan Singh Shekhawat   June 8, 2013 at 12:34 am

      आपने पूरी बात पढ़ी ही नहीं यदि पढ़ी होती तो आपको जरुर समझ आता !
      इसमें व्यक्तिगत स्वार्थ क्या हो सकते है ?
      राजपूत मुस्लिम सबंधों को हम खुद स्वीकारते है और उन्हें गलत ही भी नहीं मानते तो उनकी वजह से विरोध कैसा ?
      बात सिर्फ इतिहास को तोड़ने की है !!

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  8. Shalini Kaushik   June 7, 2013 at 5:27 pm

    virodh sahi hai aur hona bhi chahiye .itihas ke sath khilwad band honi chahiye ..आभार . चमन से हमारे जाने के बाद . साथ ही जानिए संपत्ति के अधिकार का इतिहास संपत्ति का अधिकार -3महिलाओं के लिए अनोखी शुरुआत आज ही जुड़ेंWOMAN ABOUT MAN

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  9. तेजवानी गिरधर   June 8, 2013 at 2:37 am

    बेहतरीन जानकारी और अच्छी समीक्षा है

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  10. पूरण खण्डेलवाल   June 8, 2013 at 6:16 am

    इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश करने की इजाजत किसी को भी नहीं दी जानी चाहिए और उसको सही तथ्यों के साथ दिखाया जाना चाहिए ! लेकिन एक एतिहासिक सच्चाई ये तो है ही कि नाम का फर्क हो लेकिन आमेर की राजकुमारी का विवाह अकबर के साथ हुआ था !!

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    • kunwarani nisha kanwar   June 10, 2013 at 5:34 pm

      आमेर की जिस राजकुमारी की शादी अकबर के साथ होना माना गया है इतिहास में उसका नाम हरका बाई लिखा गया है, खुद जहाँगीर ने अपनी पुस्तक जहाँगीर नामा (तजुक ए जहांगीरी) में अपनी माँ का नाम हरका बाई लिखा है| हालाँकि इतिहासकारों के अनुसार हरका के भी आमेर के राजा की पुत्री होने के बारे में विवाद है| बहुत से इतिहासकार हरका को राजा भारमल की एक पारसी दासी की पुत्री मानते है|

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  11. कुन्नू सिंह   June 9, 2013 at 6:16 pm

    ईतीहास हो तोडने और मरोडने से अगली पिढी पर बहुत बुरा असर पडेगा और ईससे हमारे देश को नुकशान होगा। ईतीहास के साथ खिलवाड नही करना चाहीए।

    जय हिन्द!

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  12. wakai me itihaas ko apni man marzi se batana sbhyta k sath khilwad hai . ab is par lagam ksana jruri ho jata hai .

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