नेताजी की बेफिक्री का राज

नेताजी की बेफिक्री का राज

एक के बाद एक बड़े बड़े घोटालों का नित्य प्रति भंडाफोड होने से पार्टी की हुई बदनामी के बावजूद नेताजी अब भी अपनी जीत के प्रति के आश्वत है| इसलिए जब भी मिलते है बड़े बेफिक्र दिखते है, उन्हें बेफिक्र और बेशर्म देखकर हमने सोचा, इनकी इस बेशर्मी व बेफिक्री का राज जाना जाय| सो […]

एक पत्र आरक्षण पीड़ित सामान्य वर्ग के नाम

एक पत्र आरक्षण पीड़ित सामान्य वर्ग के नाम

प्रिय सामान्य वर्ग, जबसे सत्ताधारी दल व कुछ अन्य दल जो आरक्षण रूपी हथियार का इस्तेमाल कर दलित वोट बैंक रूपी बैसाखियों के सहारे सत्ता तक पहुंचे है या पहुँचने की कोशिश कर रहे है द्वारा आरक्षण का दायरा बढ़ाकर अल्प-संख्यकों को भी इसमें शामिल करने का अभियान छेड़े है तब से तुम बहुत ज्यादा […]

खूंटी पर विचारधारा

किसी भी सामाजिक,राजनैतिक संघठन की अपनी एक विचारधारा होती है उसी विचारधारा को देखकर सुनकर उसी विचारधारा के समान विचार रखने वाले लोग उन संघठनों में शामिल होते है ,उसका समर्थन करते है| इसी तरह समान विचारधारा के लोगों का समर्थन पाकर संघठन बढ़ते है, मजबूत होते है|हमारे देश सहित विश्व के हर देश में […]

नागरिको के बीच भेदभाव क्यों ?

लेखक : कुंवरानी निशाकंवर नरूका कहने को तो भारत में समानता का अधिकार है, लेकिन व्यवहारिक तौर पर देखे तो यहाँ नागरिकों के मध्य बड़ा अंतर किया गया है। चाहे वह भेद अल्पसंख्यकवाद के नाप पर हो या दलितोद्धार के नाम पर। निसंदेह इस समय नागरिक-नागरिक के बीच अधिकारों ,नियमो के पालन ,अवसरों की उपलब्धता […]

जातिय वैमनष्यता : दोषी कौन ?

कुँवरानी निशा कँवरजितनी जातीय वैमनष्यता आज है इतनी ज्ञात इतिहास ,लोक कथाओं और किंवदन्तियो में कही भी देखने को नहीं मिलती है |जर्मनी का नाजीवाद इसका एक उदहारण विश्व इतिहास में जरुर नजर आता है किन्तु वह राज्य प्रायोजित था |किन्तु आज हमारे देश में एक नहीं अनेको संगठन लोगो के कल्याण और उद्धार के […]

दीनता और हीनता ही है पतन की जड़

कुँवरानी निशा कँवर नरुकायदि कोई व्यक्ति रास्ते में चलते चलते ठोकर खा जाये, और लड़खड़ा कर गिर जाये तो यह एक सामान्य घटना है | ठोकर चाहे रास्ते में पड़े किसी पत्थर से लगी हो या किसी ने टंगड़ी मारी हो,फिर भी परिणाम तो गिरना ही होगा |लेकिन गिरने के बाद उठने का प्रयत्न ही […]

स्वतंत्रता समर के योद्धा : श्याम सिंह, चौहटन

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में जूझने वाले राजस्थानी योद्धाओं में ठाकुर श्याम सिंह राठौड़ का बलिदान विस्मृत नहीं किया जा सकता | 1857 के देशव्यापी अंग्रेज सत्ता विरोधी सशस्त्र संघर्ष के पूर्व राजस्थान में ऐसे अनेक स्वातन्त्र्यचेता सपूत हो चुके है जिन्होंने ब्रिटिश सत्ता के वरदहस्त को विषैला वरदान समझा था | शेखावाटी , बिदावाटी, हाडौती […]

विविध

ज्ञान दर्पण पर विविध विषयों के सभी लेख यहाँ है 1-भारत की सुरक्षा के सूत्र2-हिंदी पर बंदिश लगाने वाले आज सीख रहे हैं हिंदी3-जौहर और शाका4-कांग्रेसी,कामरेड तंग करते है,बीजेपी अनाज नही होने देती5- दिल्ली से वीरता पुरुस्कार और गांव में दुत्कार6-फेल होने वाले छात्रों का क्या दोष ?7-कुछ मजेदार परिभाषाएं8-ब्लॉग पढने के फायदे9-मै हूँ नेता […]

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