आओ आरक्षण का नाम भुनाएं

आओ आरक्षण का नाम भुनाएं

इस देश में आरक्षण एक ऐसी चीज है जिसे पाने के लिए हर कोई लालायित है| कोई व्यक्ति, जाति, समाज, सम्प्रदाय अपने आपको पिछड़ा, बेचारा, शोषित, गरीब नहीं समझता| लेकिन हमारे संविधान निर्माता व नेता यह आरक्षण शब्द पता नहीं कहाँ से ले आये कि इसे पाने यानी आरक्षण व्यवस्था रूपी मलाई खाने के लिए […]

परम्पराएं ही बचा सकती है जातीय सौहार्द

परम्पराएं ही बचा सकती है जातीय सौहार्द

भारतीय संस्कृति में अनेकों जातियों का समावेश है. अनेक जातियां सदियों से इस देश में आपसी सौहार्द से एक साथ रहती आई है. यहाँ जो भी व्यक्ति पैदा होगा वो किसी न किसी जाति में पैदा होगा, उसी में ही पलेगा बढेगा. अत: वह अपने आप इस व्यवस्था का एक अंग बन जाता है. उसकी […]

सामाजिक समरसता के प्रतीक महाराज शारिवाहन

सामाजिक समरसता के प्रतीक महाराज शारिवाहन आजादी के बाद इस देश में क्षत्रिय शासकों के चरित्र हनन का एक फैशन सा चला है. ऐसा कोई राजनैतिक दल नहीं जिसनें समय समय पर क्षत्रिय शासकों को शोषक, आय्यास आदि की संज्ञा देकर उनके खिलाफ जहर ना उगला हो. सिनेमा व टेलीविजन ने भी क्षत्रिय शासकों को […]

अतिक्रमण को जातिवाद का संरक्षण

इस देश में आजादी के बाद जातिवाद ख़त्म कर समानता की बड़ी बड़ी बातें की जाती है पर आज भी समानता की जगह लोगों को जातीय आधार पर विशेषाधिकार चाहिए| किसी को दलित होने के नाम पर तो, किसी को पिछड़ा होने के नाम पर, किसी को आर्थिक आधार पर किसी को किसी अन्य आधार […]

भारतीय शक्ति दल का राजनैतिक शंखनाद

भारतीय शक्ति दल का राजनैतिक शंखनाद

संत योगेन्द्र सिंह जी ध्येय-प्राप्ति के लिए की जाने वाली परिवर्तनकारी चेष्टाओं का नाम ही क्रांति है| राजनैतिक ध्येय-प्राप्ति के लिए की जाने वाली परिवर्तनकारी चेष्टायें राजनैतिक क्रांति और सामाजिक परिवर्तनकारी ध्येय के लिए की जाने वाली चेष्टायें सामाजिक क्रांति कहलाती है| राजनैतिक क्रांति तक पहुंचना और समाज को उसके लिए तैयार करना सरल कार्य […]

समानता की सोच को निगल गया आरक्षण

समानता की सोच को निगल गया आरक्षण

देश की आजादी के बाद देश के राजनेताओं ने आजादी पूर्व सामंती शासन में कथित जातिय भेदभाव व असमानता को दूर कर देश के सभी नागरिकों को समान अधिकार व अवसर देने हेतु लोकतांत्रिक शासन प्रणाली अपनाई| साथ ही पूर्व शासन काल में जातिय भेदभाव के शिकार पिछड़े लोगों को आगे बढ़ने के अवसर देने […]

कट्टरवाद : यत्र तत्र सर्वत्र

कट्टरवाद : यत्र तत्र सर्वत्र

सदियों से संसार में अनेक वाद चलते आये है, समय समय पर पुराने वाद को पछाड़ते हुए नए वादों का प्रादुर्भाव होता आया है ये वाद राजनीति, धर्म, भक्ति सहित सभी सामाजिक क्रियाकलापों में बनते बिगड़ते रहे है| वर्तमान में भी हमारे देश सहित दुनियां में कई वाद मौजूद है जैसे- पूंजीवाद, समाजवाद, गांधीवाद, दक्षिणपंथ […]

जब भ्रष्टाचार बनेगा गरीबी मिटाने का औजार

बेशक देश के नागरिक भ्रष्टाचार से त्रस्त है आये दिन किसी न किसी के नेतृत्व में देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए आन्दोलन करते रहते है पर यदि देश के नेताओं, अफसरों व आम नागरिक का आचरण देखें तो लगता है जैसे भ्रष्टाचार के खिलाफ होने वाले आन्दोलन तो महज एन्जॉय करने के […]

जातिप्रथा को कोसने का झूँठा ढकोसला क्यों ?

ब्लॉग, सोशियल साईटस हो या किसी राजनेता (पक्ष विपक्ष दोनों) का भाषण या फिर किसी चैनल की बहस हो सबमें जातिवाद को पानी पी पी कर कोसा जाता है राजनेता या मिडिया चैनल में बैठी अपने आपको सेकुलर कहने वाली ताकतें बढ़ चढ़ कर जातिवादी व्यवस्था को गरियाती है तो दूसरी और जातिवाद के नाम […]

ठाकुर साहब की अकड़ और मूंछ की मरोड़ का राज

ठाकुर साहब की अकड़ और मूंछ की मरोड़ का राज

ठाकुर साहब की अकड़, मूंछ की मरोड़ आदि के बारे में तो आपने सुना ही होगा| अक्सर गांवों में ठाकुर साहबों की आपसी हंसी मजाक में कह दिया जाता कि- ठाकुर साहब “पेट से आधे भूखे जरुर है पर अकड़ पुरी” है| दरअसल राजस्थान में आजादी से पहले राजपूत राजाओं का राज था| बड़े भाई […]