कन्हैयालाल सेठिया की कविता “अरे घास री रोटी ही” का ये है सच

भारत में इतिहास लेखन कभी रुचिकर नहीं रहा| भारतीय शासक इतिहास लेखन को लेकर प्राचीन काल से उदासीन रहे| लेकिन भारत के साहित्यकारों ने अपने साहित्य में ऐतिहासिक घटनाकर्मों का जमकर जिक्र किया| यही कारण है कि राजस्थान सहित भारत का ज्यादातर साहित्य वे ही लोग समझ सकते है जो इतिहास के जानकार है| और […]

काव्य कथा ने बना दिया इस देशभक्त राजा को देशद्रोही : फ़िल्में कितना इतिहास बिगड़ेगी सोचो

काव्य कथा ने बना दिया इस देशभक्त राजा को देशद्रोही : फ़िल्में कितना इतिहास बिगड़ेगी सोचो

ज्ञान दर्पण पर पिछली पोस्ट में भी आपने पढ़ा कि पत्रकार, साहित्यकार डा. आनन्द शर्मा ने कैसे जयचंद पर शोध किया और उन्हें जयचंद के खिलाफ इतिहास में ऐसे कोई सबूत नहीं मिले कि जिनके आधार पर जयचंद को गद्दार ठहराया जा सके| डा. आनंद शर्मा अपने ऐतिहासिक उपन्यास “अमृत पुत्र” के पृष्ठ 48 पर […]

शानदार लगा “मरुधर” पत्रिका का नवंबर-दिसम्बर अंक

शानदार लगा “मरुधर” पत्रिका का नवंबर-दिसम्बर अंक

जमशेदपुर के प्रवासी राजस्थानियों हेतु निकलने वाली द्विमासिक मासिक राजस्थानी-हिंदी पत्रिका “मरुधर” का नवम्बर-दिसंबर अंक आखिर भारतीय डाक विभाग की मेहरबानी से इस बार मिल ही गया| वरना पिछले साल से मरुधर टीम द्वारा पत्रिका भेजे जाने के बावजूद डाक विभाग की मेहरबानी ना होने के चलते हम पत्रिका प्राप्त करने से वंचित ही रहते […]