जयचन्द ने नहीं, गौरी को इन गद्दारों ने बुलाया था

जयचन्द ने नहीं, गौरी को इन गद्दारों ने बुलाया था

देश में मुस्लिम राज्य की स्थापना का सारा दोष जयचंद के माथे थोप दिया गया| जबकि इतिहास में कहीं भी इसका जिक्र का नहीं कि जयचंद ने गौरी को बुलाया था| जयपुर के वरिष्ठ पत्रकार और लेखक डाक्टर आनन्द शर्मा ने भी अपने शोध के बाद लिखा कि इतिहास की किसी किताब व पृथ्वीराज रासो […]

राजपूत स्त्रियों की सामाजिक स्थिति और उनके गुण

शत्रु से अपने सतीत्व की रक्षा के निमित हजारों राजपूत महिलाएं निर्भयता के साथ जौहर की धधकती हुई आग में जलकर भस्मीभूत हो गई, जिनके ज्वलंत उदाहरण चित्तौड़ की राणी पद्मनी और कर्मवती,चांपानेर के पताई रावल (जयसिंह) की राणियां, जैसलमेर के रावल दूदा की रमणियां आदि अनेक हैं,

राजपूत स्त्रियों की सामाजिक स्थिति और उनके गुण

राजपूत समाज में स्त्रियों का बड़ा आदर होता रहा और वे वीर पत्नी और वीरमाता कहलाने में अपना गौरव मानती थी। उन वीरांगनाओं का पातिव्रत धर्म, शूरवीरता और साहस भी जगद विख्यात है। इनके अनेक उदाहरण इतिहास में पाये जाते हैं, उनमें से थोड़े से यहां उद्धृत करते हैं- चौहान राजा पृथ्वीराज ने जब महोबा […]

परमार राजवंश और उसकी शाखाएँ : भाग-3

परमार राजवंश और उसकी शाखाएँ : भाग-3

भाग-2 से आगे ….Parmar Rajvansh ka itihas जगनेर के बिजौलिया के परमार- मालवा पर मुस्लिम अधिकार के बाद परमारों चारों ओर फैल गये। इनकी ही एक शाखा जगनेर आगरा के पास चली गई। उनके ही वंशज अशोक मेवाड़ आये। जिनको महाराणा सांगा ने बिजौलिया की जागीर दी। जगदीशपुर और डुमराँव का पंवार वंश- भोज के […]

तांत्या टोपे की फांसी का सच

तांत्या टोपे की फांसी का सच

सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के चर्चित और महत्त्वपूर्ण नायक तांत्या टोपे के बारे में इतिहास में प्रचलित है कि- “तांत्या टोपे को उनके एक सहयोगी राजा मानसिंह कछवाह अंग्रेजों से मिल गये और तांत्या के साथ विश्वासघात कर उन्हें पकड़वा दिया। पकड़ने के बाद अंग्रेजों ने तांत्या टोपे को 18 अप्रैल सन 1859 को […]

पृथ्वीराज चौहान: महानतम हिन्दू शासक

पृथ्वीराज चौहान: महानतम हिन्दू शासक

Prithviraj Chauhan : The Great Hindu King लेखक : सचिन सिंह गौड़, संपादक, सिंह गर्जना भारत वर्ष के अंतिम हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान को उनकी जयंती पर समर्पित खोज परक लेखों की एक विशेष श्रंखला जिसका उद्देश्य पृथ्वीराज चौहान के विराट और महान व्यक्तित्व को सही ढंग से प्रस्तुत करना है। पृथ्वीराज चौहान भारतीय इतिहास […]

कन्नौज नरेश महाराज जयचन्द गहरवाल

jaichand History in Hindi, History of Jaychand gaharwal जयचन्द्र (जयचन्द), महाराज विजयचन्द्र के पुत्र थे। ये कन्नौज के राजा थे। जयचन्द का राज्याभिषेक वि.सं. १२२६ आषाढ शुक्ल ६ (ई.स. ११७० जून) को हुआ। राजा जयचन्द पराक्रमी शासक था। उसकी विशाल सैन्य वाहिनी सदैव विचरण करती रहती थी, इसलिए उसे ‘दळ-पंगुळ’ भी कहा जाता है। इसका […]

पृथ्वीराज चौहान : महानतम राजपूत शासक

पृथ्वीराज चौहान : महानतम राजपूत शासक

भारत वर्ष के अंतिम हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान (Prithviraj Chauhan) को उनकी जयंती पर समर्पित खोज परक लेखों की एक विशेष श्रंखला जिसका उद्देश्य पृथ्वीराज चौहान के विराट और महान व्यक्तित्व को सही ढंग से प्रस्तुत करना है। पृथ्वीराज चौहान भारतीय इतिहास का एक ऐसा चेहरा है जिसके साथ वामपंथी और धर्मनिरपेक्ष इतिहासकारों ने सबसे […]

अधूरा ज्ञान प्रमाणिक इतिहास में बाधक : एक उदाहरण

अधूरा ज्ञान प्रमाणिक इतिहास में बाधक : एक उदाहरण

अधकचरा यानी अधूरा ज्ञान हमेशा हर जगह नुकसानदायक होता है और यह तब और ज्यादा नुकसान करता है जब अधूरे ज्ञान वाला स्वयंभू ज्ञानी शिक्षक, नेता, साधू के रूप में अपने अधूरे ज्ञान को अपने उद्बोधनों में बांटते फिरते है तथा लेखक आने वाली पीढ़ी के लिए अपने अधूरे ज्ञान के सहारे पुस्तकें लिखकर भ्रांतियां […]

टीवी चैनल इतिहास को दूषित करने वाले सबसे बड़े तत्व

टीवी चैनल इतिहास को दूषित करने वाले सबसे बड़े तत्व

भारत के इतिहास को दूषित और विकृत कर उसमें मनघडंत झूंठे किस्से, कहानियां जोड़कर जहाँ वामपंथी व कथित सेकुलर लेखक प्रमाणित इतिहास लेखन में बाधक तत्व साबित हुए, उससे ज्यादा इतिहास को तोड़ मरोड़कर ऐतिहासिक पात्रों पर फ़िल्में, सीरियल आदि बनाकर इतिहास को दूषित व विकृत करने में टीवी चैनल्स का सबसे बड़ा हाथ रहा| […]

क्या होता यदि पृथ्वीराज चौहान गौरी का वध कर देता ?

क्या होता यदि  पृथ्वीराज चौहान गौरी का वध कर देता ?

लेखक : सचिन सिंह गौड़, संपादक, “सिंह गर्जना” पृथ्वीराज चौहान को समर्पित इस विशेष श्रंखला के प्रथम भाग को हमनें इस प्रश्न के साथ समाप्त किया था कि- क्या होता यदि तराइन के दूसरे युद्ध में (1192) पृथ्वीराज की हार नहीं होती, बल्कि जीत होती और मोहम्मद गौरी को मार दिया जाता? यधपि ये एक […]