जातां जुगां न जाय-मेड़तौ

जातां जुगां न जाय-मेड़तौ
राजस्थानी भाषा साहित्य, संस्कृति अकादमी के पूर्व अध्यक्ष सौभाग्यसिंह जी शेखावत की कलम से ………..
सुतंतरता तांई बरोबर दो पीढ़ियां लड़ता-झगड़ता रहबाळा मेड़तिया साखा रा राठौड़ां रौ मूळ स्थान मेड़तौ (Merta City) राजस्थान रै बीचौ बीच मारवाड़ में पडै़ है। मेड़तौ राजस्थान रा घणां पुराणा नगरां में गिणीजै है। बूढ़ा वडेरा कैवै है कै मेड़ता री नींव परतापीक राजा मान्धाता आपरा हाथ सूं दिवी ही अर पुराणकाल में इण रौ नांव मान्धातापुरी हौ। संस्क्रति ग्रंथौं में मान्धातापुरी री जगै मेड़ता रौ ‘मेरुताल’ नांव भी मिळे है। पछै जोधपुर रै पास-पड़ौस राव जोधा रौ हांमपाव संवत् 1515 रै लगैढगै हुयौ। राव जोधै मंडोर कन्है चिड़िया टूंक भाखरी माथै गढ़ मांडि आप रा नांव पर जोधपुर नगर बसायी अर आप रा बेटां नै न्यारा निरवाळा पड़गना दिया। राव बीका, बीदा बेहूं भायां नै जांगळू द्रोणपर दियौ। राव बरसिंघ नै राव दूदा नै जिका मां जाया भाई हुंता मेड़तौ दियौ। जद संवत् 1515 विक्रम रै नैडै़ ढूकडै़ इज बरसिंघ अर दूदै मेड़ता माथै आप रौ हक हासल जमायौ चलायौ। इण भांत मेड़तौ घणी उथळ पुथळ, नै राजदुराजी देखी भोगी, सही। जाळोर रा सोनगिरा चुवाण, अजमेर रा सुबायत, नागौर रा खानजादां, जोधपुर रा धणी अर दिल्ली रा मुगल पातसाहां री घणी मारकाट मेड़तौ सही है। कई बार उजड़ियौ अर कई बार पाछौ बसियौ। अदीठ चक्र चालता राजा मान्धाता नै मेड़तौ देख्यौ तौ पणधर राव कान्हड़दै सोनगरा नै तपतां मेड़तौ देख्यौ। राव बरसिंघ जोधावत, राव दूदा नै राव वीरमदेव मेड़तिया नै खागां खड़कातां मेड़तौ देखिया। ‘म्हारे तो गिरधर गोपाल दूसरौ न कोई’ रौ सुर ऊगेरती लोकनिध राजराणी मीरांबाई नै मेड़तौ आप री गोद में पाळी, रमायी। खोळे बैसाण नै लडाई। नीतिकार व्रंद कवि नै मेड़तौ इज पाळपोस नै मोटी कियौ। भारत भौम री सुंततरता रै अमर जोधार नै चीतौड़ रै तीजे साके रा जूझार राव जैमल अर ईसरदास मेड़तिया री जलमभौम रौ गौरव मेड़ता नै इज है। इण भांत मेड़तौ सगती, भगती, रजपूती, सपूती, नीति अर सुरसत उपासकां री टणकी ठौड़ रैयौ है।

आज वरतमान में मेड़तौ जठै थिर है उणनै राव बरसिंघ नै राव दूदै जोधावत बसायौ है। राव बरसिंघ अर राव दूदै आपरा पिता राव जोधा रै पगां लाग अर जोधपुर सूं चालनै राजस्थान री ठावी ठौड़ जोवता भाळता मेड़ता रै कुंडळ बेझपा तळाब माथै आयनै घोडै़ रा पागड़ा छांटिया। आप री बसी रा गाडा ठहराया अर अंतेवर बीरबानियां, परगह, धानपात नीचौ उतारिया, गाडा ढाळिया। सखरी, रूपाळी नै सबळी मनभावती ठौड़ जांण नै संवत् 1518 चैत सुद 6 हसत नखतर रा सुभ मुहरत में मेड़ता रै कोट री रांग भराई। छत्तीस पूंण रा छांटवां मिनखां नै तेड़ तेड़नै आबादान किया। सवाळख दिस रा घणां मानखां नै मेड़ता में बुलाय-बुलाय नै बसाया अर मेड़तौ जिकौ फिरती-घिरती छांवळी री भांत ऊजड़ पड्यौ हौ फेर सरजीवण-सौ हू उठौ।

वरतमान मेड़तौ राठौड़ां री मेड़तिया खांपरा सूर वीरां री वीरता नै साहस भरिया बळिदानां री गरबीली गाथावां सूं अंजसै है। मेड़ता में निवास रै कारण इज दूदावत राठौड़ मेड़तिया बाजिया है। मेड़ता रै धणियां में राव दूदौ, राव बरसिंघ, राव बीरमदेव, राव जैमल, सुरताण, केसोदास, गिरधरदास, प्रिथीसिंघ आद घणा टणकेत, अड़ीला, अणखीला जोधार हुया। बादसाही फौजां सूं रढ़ रोप नै घणा लोह रटाका लिया। मेड़ता रा धणी मेड़तिया किणी रा तळेडू बण जीवणौ न चायौ। राव दूदै मांडू रा पातसाह रा सेनाधपत मल्लूखां नै लोह रा चिणा चबाय उणां रा तीखा दांत भांगिया जिकां रौ राजस्थानी साहित में ओपतौ बखाण बखाणीज्यौ। राव बीरमदेव हिन्दूपत राणा सांगा नै साथ देय अर अहमदनगर, बिसलनगर अर फतैपुर सीकरी में यवन दळां रौ विधूंस कियौ। बीरमदेव री वीरता पर घणा कवि रीझ नै उणरा गुण-गीत रचिया। रियां रा जुद्ध पर जग चावौ दूहौ है:

माई अेहा पूत जण, जेहा बीरमदेह ।।
रीयां थाणौ रहच्चियौ, समहर खाग सजेह ।।
दातार जूझार बीरमदेव खाग अर त्याग बेहूं भांत जबरौ हुवै। बो बीसलदेव चुवाण अजमेर री तरै धन माथै सरप री भांत पालथी मार नीं बैठौ। धन बांट नै जस खाटियौ:

बीसलदे अजमेर पत, की गौ हाथ करेह।
काचौ आंबे नांव फळ, माया बीरमदेह।।

राव बीरमदेव री बधती कीरत नै अनड़पणा सूं रूस नै जोधपुर रौ राव मालदे मेड़ता पर धारोळियौ। जोमरौ अधायौ सौ उण नै अैड़ौ जरकायौ कै नाठ नै जोधपुर जावतौ मुंहडौ ल्हुकायौ। मेड़तौ अर मेड़तिया जोधपुर री रण बांकी बाईसी में पैलां तो घणी खोटी करी। री सेना जीव लेनै नाठी । जोधपुर री सेना जीव लेनै नाठी। पण, जोधपुर अर मेड़ता री अदावट ठाढ़ी बंधगी। राव मालदे घणौ पाछौ कियौ। मारकणा मेड़तिया जबरा जूंझिया पर जोधपुर धकै लुळिया नीं। पछै। संवत् सौलै सौ तेरोतरै राव मालदेव मेड़ता नै दाब ही लियौ। मेड़ता रा कोट नै पाड़ कोकरियौ-कोकोरियौ खिंडाय नांखियौ अर कोट री पाखती आपरै नांव माथै कोट (मालगढ़) मंडायौ। आधौ राव मालदेव राखियौ आधौ मेड़तौ जगमाल बीरमदेवोत नै दियौ। घर रौ भेदी लंका ढावै। राव मालदेव कोट इज नी ढाइयौ मेड़ता री च्यारूंमेर री नहर (खाई) अर कुंडळ नै कूकसो दोन्यूं तळावा नै रेत सू भर नै मेड़ता री कीरत नै सांवळी करण रौ अजोग कारज कियौ। अर मेड़ता रौ नांव पलट नै नुंवौनगर दियौ। राव मालदेव, राव वीरमदेव रा दो बेटा चांदा अर जगमाल नै आप में मिलाय नै धोखा फरेबी सूं मेड़ता नै सर कियौ। पण मेड़तौ इण विजोग नै अंगीकार न कियौ। ढमढ़ेर ढूंढा, छांन छपरां अर कोट कोटड़ी र्री इंटा पाछी भेळी हुई अर बीरमदेव रै मोबी पूत सपूत जैमल राव मालदेव सूं खंवाठौर मांडी अर सरफुदीन नै साथ लै मालदेव नै संवत् 1618 में पछाड़ नै आप री करत रै कांगरा लगाया। कवीसरां भणियो है- जैमल जपै जपमाळा, भाग्या राव मैंडोवर वाळा ! पछै राव मालदेव काळ कियौ जद मेड़तौ सुख रा सांस लिया।

मेड़ता रै गोखडै सहनायां री मंगळ घुनां सुणीजण लागी। चारभुजा रै मिंदर पर बांनरवाळां लटकबा लागी। केसरिया धुज कोट माथै फहरायौ। सुख री सोरम महकबा लागी इज ही कै जितरा में बादसाह अकबर री फौज धरती ने घसकावती, रोही नै रंदौळती, रड़ियां रा जंगळां ने तोड़ती, गांवां ने उजाड़ती गह घूमती काळी कांठळरूप, दळ बादळ बण मेड़ता पर आयी। कारण मुगल बादसाह अकबर रौ दोखी नबाब सरफुदीन राव जैमल री ओट आप रा जीव री भीख सरणौ मांगबा आयौ हौ। प्राण जाय पण पण ना जाय बिड़द रा पाळक मेड़तिया सरफुदीन नै सरण दीन्ही। बादसाह सरफुदीन नै गरदन काट’र मारणौ चावतो हौ उणनै राव जैमल साथ मेल सिरोही तांई आगै पहुंचतौ कियौ। जैमल फेर मेड़ता नै ऊभौ मेल आडावळा रै पार बधनोर गयौ। मेड़तौ फेर मुगलाई रा दौरा दिन देखण लागौ। तठा पछै संवत् 1636 में बादसाह अकबर पुराणी अड़कसी बिसार अर सुरताण अर केसीदास जैमलौत नै आधौ-आधौ मेड़तौ दियौ। फेर बादसाह अकबर री मां गुजरात सुं आवती मेड़तै ठहरी। मेड़तिया उण री क्यूंही आवभगत, ग्यान गिणत नीं की। तद उण री सिकात पर फेर मेड़तौ रंडापौ भोगियौ। जिकौ संवत 1642 वि. में पाछौ केसीदास नै सुरताण रै रस आयौ। जिकां मेड़ता रा धणिया रा नांव सूं हिरण खोड़ा हुंता उण री आ हालगत हुई कै कदै मेड़तिया, कदै मुगल अर कदै जोधपुर रा कामेती मेड़ता रै गोखै बैस नै हुकम हासल चलायौ। काळगत कुण जाणी है ? राव सुरताण मेड़तिया रै पछै बलभदर मेड़तियै, गोपालदास सुरताणोत मेड़तियै रौ नै केसवदास जैमलोत रै पट्टै रहियौ। दिखण में बीड़ स्थान री राड़ में गोपालदास, केसोदास नै दुवारकादास तीनों काका भतीजा रण खेत रह्या। जद जगन्नाथ गोपालदासोत अर कान्हड़दास केसोदासोत मेड़ता रा धणी हुवा। जगन्नाथ दुबळौ सौ ठाकर हुंतौ। मेड़तौ ढाब न शकियौ। उण री माड़ाई पर कहणगत है:

ईंडूणी सी पागड़ी, तूळी सरखा हाथ।
भलो गमायौ मेड्तो, पातळिया जगनाथ।।

कान्हड़दास रै काळ किया पछै सं. 1676 में बादसाह मेड़तौ राजा सूरसिंघ नै जोधुपर नै दियौ। जद सूं ले’र आजादी ताई मेड़तौ जोधपुर रा धणी रै रैयौ। मुगल काल में मेड़ता रौ जिकौ राजनीत रै कारण गौरव हुंतौ बौ जोधपुर रै हेटै लागणै सूं मिट गयौ। जोधपुर रा अेक परगना सू बेसी घणी पछै मेड़ता री गिणत कौ रही नीं। आपणां इतिहास गौरव नै मेड़तौ फेर चितारियौ अर मरेठां काल में छाती रोप अर कांधा ठोक उठ खड़ी हुवौ। महाराजा रामसिंघ जोधपुर अर बखतसिंघ नागौर री आपसी गोधम-धाड़ में मेड़तौ अर मेड़ता परगने री भौम में घणा गोळा गरणाया। ठाकुर सेरसिंघ रियां ठाकुर जालमसिंघ कुचामण, सगतसिंघ मीठड़ी, देवीसिंघ पांचोता, आद मेड़ता रा ठिकाणादार लोह री लाट ज्यूं अडिग रह्या अर मेड़ता पर दुसमी रौ मरियां पछै हांमपाव होबा दियौ।
मरैठां काल में तो जयअप्पा, जनकू, दत्ता अर महादा पटेल सू घणा खेटा किया। खगांटा बजाड़ी। जयअप्पा सिंध्या रौ मेड़ता पर धावौ तौ जोधपुर रा धणी बिजैसिंघ रा पग छुड़ाय दिया हा। जियां तियां करनै बिजैसिंघ नागौर नैड़ी पकड़ अर आबरू बचाई ही। मेड़ता रा उण जुद्ध पर महाकवि सूरजमल मीसण लिख्यौ है:

संध्या जया ओ बिजैसिंघ रट्टोर,
यों मेड़ता खेत जुट्टे बड़े़ जोर।।
भारी मच्यौ सेस के सीस पर भार,
यों कुंडळी सो फटा डारि फुंकार।।
बाराह की दढ्ठ में पीर व्है,
होने लग्यौ कामठी पिट्ठी को चूरि ৷
कंपै सबे दिल्ल री धिक्कारी पारि,
धुज्जी धरित्रीहु भैकप्ल को धारि।
आदित्य आभा गई धूळि से ढंकि,
लोकेस अटढ्ों परे सोक में संकि।
धांधा बढ्यौ धूमकी धार अंधार,
उलंधिबे सेतु लग्गे अकूपार।।
यों सस्त्र संवाहिनी बेग,
दोऊ भिली ओर ऊजळी चली तेग।।

मरेठां राजस्थान में घणी खाधळ कौनी ही। मारवाड़ नै जीतबा वाळां तांई मेड़तौ सदा वैरियां रै सांम्हे ढालबण मै आडौ आयौ। मेड़ता सूं मुजरो कियां बिना जोधपुर सांम्है पग बढ़ाता गनीमां रा काळजा कांपता हा। मारवाड़ रौ रुखाळौ मेड़तौ बजर कपाट साबित हुयौ। सं. 1847 में महादा पटेल रौ मेड़ता रौ जुद्ध तौ सैंसार भर घोड़ां रा हमला में अेकइइज गिणीजै है, जिणरी जोड़ रौ बीजौ उदारण लाख खोज्यां नीं मिलै। भेड़ता री रण भौम में आग बरसाती डिबोइन री तोपां रा मुंहडा घोडां री टापां री टक्करां सूं पाछा फेर दिया हा। महादाजी पटेल नै मेड़ता में छठी रौ दूध याद अणांय दियौ है। जोधपुर री रुखाळी जद मेड़तै ही करी। ठाकुर महेसदास कूपावत री वीरता पर किणी कवीसर कइयी है:

जुड़ दळ अरियां जुट्टीयौ, रिण खागां दे रेस ৷
मुरधर राखी भेड़तै, सांची साख भरेस।।

इण भांत मेड़तौ खळखेटा सहिया अर सदा बैरियां सूं लोह झटाका लिया।
जिण भांत जुद्ध लड़ नै बैरियां नै पछाड़िया उणी भांत मीरांबाई अर वृंद जेहड़ा भक्त अर नीतिकार देस नै सौंप नै ऊजळौ गरबीलौ जस पायौ। मेड़ता में जूंझारा री छत्रियां जिकी अणगित ऊभी है, महेस दरवाजौ, चारभुजा रौ मिंदर, दुदासागर, मालकोट, कुंडळसागर आद मेड़ता रै पुराणै वैभव री निसाणियां है। बीचळा बरसां में मेड़तौ राजनीत अर बिणज व्यौपार में पाछौ रह गियौ हौ पण भारत री सुतंतरता रै पछै अ बरसां में फेर आगै बध रह्यौ है। पोसाळां, दवाखानां, धानमंडी, सड़कां, रेलां संू जुड़ जांणै रै कारण राजस्थान में गिणत रौ कस्बो बण गयौ है। पण मेड़ता री महता ती मेड़तियां री वीरता पांण इज ओळखीजै है-

तणौ सुजस सुण राव राजा चवै,
आ सुण जैत रिड़माल ऊदा।
आड रा मुदायत हुवा सह ऊससौ,
देखज्यो राड़ रा मुदी दूदा।।

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