शानदार लगा “मरुधर” पत्रिका का नवंबर-दिसम्बर अंक

जमशेदपुर के प्रवासी राजस्थानियों हेतु निकलने वाली द्विमासिक मासिक राजस्थानी-हिंदी पत्रिका “मरुधर” का नवम्बर-दिसंबर अंक आखिर भारतीय डाक विभाग की मेहरबानी से इस बार मिल ही गया| वरना पिछले साल से मरुधर टीम द्वारा पत्रिका भेजे जाने के बावजूद डाक विभाग की मेहरबानी ना होने के चलते हम पत्रिका प्राप्त करने से वंचित ही रहते है! खैर……भारत की लोकतांत्रिक सरकार का डाक विभाग है जिसे लोकतांत्रिक आजादी तो हासिल है ही साथ ही उसके कर्मियों को सरकारी कर्मचारी होने का विशेषाधिकार भी प्राप्त जो है सो मर्जी उनकी, डाक पहुंचाये या नहीं|

मरुधर के इस अंक में मेरे एक लेख “कहाँ है रानी पद्मिनी का जन्म स्थान” के साथ ही चितौड़ जिले का सामान्य परिचय देते हुए चितौड़ किले व उसमें दर्शनीय स्थलों पर संक्षिप्त किन्तु शानदार जानकारी दी गई है, इस लेख को पढ़कर पाठक को चितौड़ के ऐतिहासिक दुर्ग, उसमें बने स्थापत्य कला व इतिहास से जुड़े स्मारकों की सुन्दर चित्रों के साथ जानकारी व चितौड़ की कला एवं संस्कृति पर अच्छा खासा प्रकाश डाला गया| लेख के लेखक को इसके लिए साधुवाद|

राजस्थान के प्रमुख राष्ट्रीय पार्क एवं वन्य जीव अभ्यारणों की जानकारी वाले लेख में सुन्दर चित्रों के साथ प्रदेश के सात वन्य जीव अभ्यारणों की जानकारी दी गई जो निश्चित ही पाठक के मन में इन अभ्यारणों को देखने की इच्छा प्रबल कर देती है, इस तरह की जानकारी राजस्थान में पर्यटन विकास के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है|

इतिहासकार मोहनलाल गुप्ता के लेख “राजस्थान के ऐतिहासिक पुरुष” में ८ महापुरुषों का संक्षिप्त परिचय लिखा गया पर पृथ्वीराज चौहान पर लिखते वक्त विद्वान लेखक ने इतिहासकार होने के बावजूद पृथ्वीराज के तराइन के युद्ध में हारने के कारणों पर लिखते हुए जयचंद की नीचता का जिक्र अखरा कि आखिर एक इतिहासकार ने बिना तथ्यों को जाने सुनी सुनाई बातों के आधार पर जयचंद पर यह घृणित आरोप मढ़ दिया| जबकि पृथ्वीराज के पतन में जयचंद का कोई हाथ नहीं था, ना जयचंद ने गौरी को बुलाया था, ना उसकी सैनिक सहायता की थी|

डा. चेतन स्वामी ने अपने लेख में फतेहपुर शेखावाटी की चित्रांकित हवेलियों की चित्रकला उनका इतिहास और उनकी स्थापत्य कला का अच्छा चित्रण किया है| पत्रिका में लघु कथाओं, कविताओं, राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण के बारे जानकारी के साथ कन्याकुमारी व महातीर्थ गया के बारे में शानदार जानकारी दी गई जो वहां जाने वाले पर्यटकों व श्रद्धालुओं के लिए वाकई बेहद काम की व उपयोगी है|

राजस्थान की बात चले और राजस्थान के खान-पान की चर्चा ना हो ये कैसे हो सकता है ? सो राजस्थान के खान-पान कालम में राजस्थान के विभिन्न वर्गों द्वारा इस्तेमाल व्यंजनों आदि की सटीक जानकारी के साथ नमिता अग्रवाल द्वारा दी गई मिर्ची बड़ा बनाने की विधि ने पत्रिका के अंक को वाकई तीखा व चटपटा बना दिया|
राजस्थान के इतिहास,संस्कृति, पर्यटन, कहानियां, कविताएँ व प्रवासी राजस्थानियों द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों की ख़बरें अपनी पत्रिका “मरुधर” के माध्यम से दूर दूर तक पहुँचाने व इसके प्रचार प्रसार के लिए पत्रिका के प्रधान संपादक डा.नरेश अग्रवाल सहित संपादक मंडल का बहुत बहुत आभार व हार्दिक धन्यवाद |

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