जीत आखिर सच्चाई की ही होती है

जीत आखिर सच्चाई की ही होती है

जी टीवी पर चल रहे धारावाहिक जोधा अकबर के प्रसारित होने के पहले इसके प्रोमो देखकर सीरियल में ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़मरोड़ कर पेश करने के खिलाफ राजपूत समुदाय के युवाओं व राजस्थान के इतिहासकारों में रोष व्याप्त हो गया था, इसी रोष के चलते एक दिन जय राजपुताना संघ के भंवर सिंह का इस संबंध में जानकारी जुटाने हेतु फोन आया, भंवर सिंह ने उचित जानकारी प्राप्त कर इस सीरियल के खिलाफ IBF को शिकायत भेजी साथ ही मेल द्वारा ढेर सारी शिकायतें भेजने का सोशियल साइट्स पर अनुरोध किया फलस्वरूप हजारों की तादाद में IBF कार्यालय में शिकायती ई-मेल पहुंचे, इसके साथ भंवर सिंह समेत समाज के कुछ जागरूक युवाओं ने IBF के ऑफिस में जाकर सीरियल के खिलाफ ज्ञापन दिया|

दूसरी और राजस्थान में राजपूतों का अग्रणी सामाजिक संगठन श्री राजपूत करणी सेना इस सीरियल के खिलाफ मुखर विरोध जताते हुए सड़कों पर था| IBF के पास ढेरों शिकायतें पहुँचने के बाद IBF के अधिकारीयों ने 5 जून 2013 को जी टीवी टीम के साथ राजपूत समाज के विभिन्न संगठनों की एक बैठक कराई जिसमें करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी समेत विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने जी टीवी को अकबर जोधा विवाद पर ऐतिहासिक तथ्य देते हुए बताया कि जोधा नाम की अकबर की कोई बेगम ही नहीं थी तो इस नाम से सीरियल क्यों ? इसी दिन इस बैठक के बाद जी टीवी के नॉयडा कार्यालय पर देशभर से आये राजपूत युवाओं ने आक्रोश व्यक्त करते हुए प्रदर्शन भी किया|

इसके बाद देशभर में इस सीरियल के खिलाफ प्रदर्शनों का दौर जारी रहा, इन प्रदर्शनों व करणी सेना के उग्र विरोध को देखते हुए आखिर सीरियल शुरू होने के एक दिन पहले १७ जून २०१३ को फिर गुडगांव के होटल ऑबेराय में करणी सेना संस्थापक लोकेन्द्र सिंह कालवी के नेतृत्व में विभिन्न राजपूत संगठनों के प्रतिनिधियों की जी टीवी व बालाजी टेलीफिल्म्स की प्रबंधन टीम के साथ वार्ता हुई, जिसमें बालाजी टेलीफिल्म्स की और एकता कपूर के पिता अभिनेता जितेन्द्र खुद वार्ता करने आये, इस वार्ता में बालाजी व जी टीवी टीम राजपूत प्रतिनिधियों के साथ चिकनी चुपड़ी बातें कर व किसी तरह बहला-फुसलाकर मैनेज करना चाह रहे थे पर उन्होंने इतिहास पढने के बावजूद यह नहीं नहीं जाना कि राजपूत कभी अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं करते| आखिर यहाँ भी ऐसा ही हुआ, वार्ता विफल रही|

इस वार्ता के बाद जहाँ देशभर के क्षत्रिय संगठनों ने विभिन्न जगहों उग्र प्रदर्शन करने शुरू किये वहीँ करणी सेना संस्थापक कालवी ने जयपुर उच्च न्यायालय में व जोधपुर विश्वविध्यालय के पूर्व उप-कुलपति डा.लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने जो खुद इतिहासकार भी है जोधपुर उच्च न्यायालय में इस सीरियल में इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने के खिलाफ जन-हित याचिकाएं लगा कानून का सहारा लिया|

पर इसी बीच कुछ अशुभ घटनाएँ भी सामने आई, फेसबुक पर सक्रीय कुछ राजपूत युवा जो मानसिक तौर पर कुछ संगठनों व राजनैतिक पार्टियों के गुलाम बन चुकें है ने उपरोक्त विफल हुई वार्ता को लेकर मनघडंत घटिया आरोप लगाने शुरू कर दिए जैसे- वार्ताकार फाइव स्टार में चाय पीने गये थे, वार्ताकार फाइव स्टार का खाना खाने गये थे, वार्ताकार तो सिर्फ अभिनेता जीतेंद्र के साथ फोटो खिंचाने गये थे आदि आदि, इनके साथ ही कोई लिखता कि ये तो टीवी वालों से रूपये लेकर इस सीरियल की टीआरपी बढाने का कार्य कर रहे है तो कोई कथित राष्ट्रवादी लिख रहा था इनको तो टीवी न्यूज में अपना चेहरा दिखाना है, यही नहीं कथित राष्ट्रवादियों ने तो उस करणी सेना को कांग्रेसी एजेंट तक घोषित कर दिया जिस करणी सेना के संस्थापक की उनके एक पूर्व मंत्री ने कभी पगड़ी उछलवाई थी और जब उसी पूर्व मंत्री को जातिवादी तत्वों के साथ मिलकर षड्यंत्र पूर्वक राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने सीबीआई के मार्फ़त जेल में बंद कर दिया था तब उस मंत्री के समर्थन में संघर्ष के लिए करणी सेना ही सड़कों पर थी जबकि उस मंत्री का राष्ट्रवादी दल भाजपा पुलिस डंडों के डर से सड़कों से भाग हुआ था| खैर…

इन सबके बावजूद इस सीरियल के विरोध में विभिन्न राजपूत संगठन व राजपूत युवा अपना अभियान चुपचाप चलाते रहे, एक तरफ क़ानूनी लड़ाई तो दूसरी तरफ संघर्ष| पर अफ़सोस हिन्दू हितों की बात करने वाले एक भी संगठन ने इस मामले में राजपूत समाज का साथ देना तो दूर किसी ने समर्थन में एक शब्द तक नहीं बोला बल्कि दूसरी जातियों के हिन्दू लोगों ने उल्टे टिप्पणियाँ की कि – राजपूत समाज इस मामले में अपने किये पर पर्दा डालना मात्र चाहता है, इन टिप्पणियों के साथ ऐसे लोग राजपूत समाज को लेकर चुटकियाँ तक लेने से नहीं चुके| लेकिन जब इन्हीं कायर लोगों पर कोई विपत्ति आती है तब इन्हें राजपूतों की बहादुरी और वीरता याद आती है और वे राजपूतों की जातिय भावनाओं का दोहन अपने फायदे में करने को दौड़े आते है और भाटों की तरह राजपूत जाति का गुणगान करते है ताकि दुश्मन से लड़ने को, मरने को वे आगे आयें और खुद बच जायें| पर अब परिस्थितियाँ बदल रही है, हिन्दुत्त्व के नाम पर दुकानदारी चलाने वाले पंडावादियों की चालें राजपूत युवा समझने लगे है|

हिंदूवादी संगठनों द्वारा राजपूतों के इस मामले में चुप्पी साधे रखने के मामले में मैं इन संगठनों से एक ही बात कहूँगा- राजपूतों ने पहले भी बहुत संघर्ष किये है और अब भी अपने किसी भी मामले में वे संघर्ष कर उसे सुलझाने व अपना स्वाभिमान बचाने में सक्षम है, राजपूत संगठनों की बात भी छोड़ दीजिये, एक एक अकेला राजपूत अपने दम पर बहुत कुछ करने में सक्षम है प्राचीन इतिहास को छोड़ भी दें तब भी कई उदाहरण आपके सामने है- अकेले शेरसिंह राणा ने बिना व्यक्तिगत दुश्मनी के समाज का स्वाभिमान बचाने को खूंखार डकैत और राजनैतिक सुरक्षा प्राप्त फूलन को कैसे निपटा दिया, अकेले विश्वनाथ प्रताप सिंह ने बहुमत के नशे में चूर राजीव गाँधी को चैलेंज कर कैसे सत्ता से बेदखल कर दिया था, अकेले पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वी.के.सिंह ने कैसे पूरी सरकार को नाकों चने चबा दिए थे|

अत: हे हिंदूवादी संगठनों आप राजपूतों के मामले में बोलो या ना बोलो राजपूत समाज को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला, उसका हर एक सदस्य अपने दम पर कुछ भी करने की हिम्मत रखता है पर आप अपना खुद का सोचो जिस दिन तुम्हारे पिछवाड़े पर पड़ेगी उस दिन तुम्हें बचाने कोई नहीं आयेगा, इसलिये समय की नजाकत समझो और पंडावादी मानसिकता से बाहर निकल कदम मिला राजपूत समाज का साथ दो इसमें आपका ही फायदा है|

इस मामले में सुदर्शन टीवी का रुख बहुत शानदार रहा, सुदर्शन टीवी ने राजपूत समाज की आवाज को देशभर में पहुँचाने हेतु ११ अगस्त को एक घंटे का एक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जिसके लिए हम सुदर्शन टीवी के हार्दिक आभारी है|

इतना सब कुछ होने के बावजूद जी टीवी व बालाजी टेलीफिल्म्स बेशर्मी से यह झूंठी कहानी पर आधारित धारावाहिक दिखाये जा रहा था उल्टा राजपूत समाज के विरोध को अपने सीरियल की टीआरपी बढाने में प्रयोग कर रहा था कि अचानक बालाजी टेलीफिल्म्स को अपनी एक फिल्म रिलीज करनी पड़ी, श्री राजपूत करणी सेना ने बालाजी टेलीफिल्म्स की इस कमजोरी पर आक्रमण किया और घोषणा कर दी कि- राजस्थान सहित देशभर के विभन्न सिनेमाघरों में बालाजी टेलीफिल्म्स की कोई फिल्म नहीं चलने दी जायेगी| पर सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बालाजी टेलीफिल्म्स को उसके मीडिया पार्टनर राजस्थान पत्रिका जैसे अख़बार ने आश्वस्त किया कि वे प्रशासन पर अपने दबदबे के चलते सब मैनेज कर फिल्म चलवा देंगे, एकता कपूर भी आश्वस्त थी, फिल्म रिलीज के होने के एक दिन पहले करणी सेना के सैनिकों ने अपनी ताकत दिखाई और उन्होंने एक सिनेमाघर के परदे फाड़ उसमें तोड़फोड़ की तो कहीं फिल्म दिखाने को प्रयासरत सिनेमाघर मालिक को जूतों का स्वाद चखाया| ये सारी ख़बरें जैसे ही एकता कपूर के पास पहुंची तो उसनें घबरा कर फिर करणी सेना से संपर्क कर मामले को निपटाने की कोशिश की|

करणी सेना की स्पष्ट मांग थी कि सीरियल बंद किया जाय या उसका नाम बदला जाय, पात्रों के नाम बदले जाय,राजपूत,क्षत्रिय, हिन्दू आदि शब्द निकाले जाये आदि आदि| तभी समझौता हो सकता है| इस तरह करणी सेना के कड़े रुख के बाद एकता कपूर अपने माँ बाप के साथ अपनी टीम सहित जयपुर आई, विश्वस्त सूत्रों के अनुसार जयपुर एयरपोर्ट पहुँचते ही उसनें जिस होटल में ठहरने हेतु बुकिंग करवा रखी थी ने फोन पर एकता कपूर को सूचित कर बुकिंग इस बात पर निरस्त कर दी कि – आप यहाँ करणी सेना से वार्ता करने आ रही है, आप उनकी बात मानेंगी नहीं और वार्ता विफल होगी तब करणी सैनिक न आपको जाने देंगे न मेरा होटल साबुत छोड़ेंगे, ऐसी हालात में हम अपने होटल में आपको नहीं ठहरा सकते| आखिर जैसे तैसे कर होटल की बुकिंग निरस्त होने से बचाई गई और पुलिस बल द्वारा छावनी में तब्दील होटल में डरी सहमी एकता कपूर ने मीडिया के कैमरों के सामने राजपूत समाज से माफ़ी मांगते हुए करणी सेना की सभी मांगे मंजूर करने की घोषणा की| एकता कपूर द्वारा मांगे मानने व माफ़ी मांगने पर करणी सेना ने उसकी फिल्म का विरोध त्याग दिया पर साथ ही चेतावनी भी दी कि यदि उसने किसी तरह की वादा खिलाफी की तो उसकी आगामी किसी भी फिल्म को राजस्थान में नहीं चलने दिया जायेगा|

आखिर सच्चाई की जीत हुई, जो लोग फेसबुक पर बयान वीर बने बकवास कर रहे थे वे बिलों में छुप बैठे, कुछ लोग अभी भी इस खुंदक में फेसबुक पर बकवास जारी रखें है क्योंकि वे एक आध जगह प्रदर्शन कर अंगुली कटा शहीद हो इसकी क्रेडिट लेना चाहते थे पर उनसे पहले करणी सेना ने एकता कपूर को झुका दिया, अब बेचारे वे अपने प्रदर्शन में क्या करे ? सो बकवास ही सही !! यह बकवास मुंबई के किसी स्वघोषित नेता द्वारा की जा रही है- मैं तो उसे यही कह सकता हूँ कि – हे मुंबई के नेता जी आपको बहादुरी दिखानी ही थी तो एकता कपूर मुंबई में ही रहती है वहीँ कुछ कर उससे सीरियल रुकवा लेते, और कुछ नहीं तो कम से कम उसका मुंह ही काला कर देते|

राजस्थान पत्रिका जैसे अख़बार की औकात भी पता चल गयी कि उसकी नजर में सामाजिक सरोकारों की कोई कीमत नहीं उसे सिर्फ अपने व्यवसायिक हित नजर आते है ऐसा अख़बार समाज का क्या आईना बनेगा अत: बंधुओं इस अख़बार का अपने घर में प्रवेश बंद कर इसका बहिष्कार करें ताकि ये अपने सामाजिक सरोकार के कर्तव्य से हटने की बात नहीं सोचे|

एक बार मैं हिन्दुत्त्व का नारा बुलंद करने वाले संगठनों से फिर कहना चाहूँगा कि – राजपूत तो इस मामले की तरह अपने मामले निपटाना जानतें है, हाँ आप नहीं सुधरे तो अभी तो सिर्फ एक दिग्विजय सिंह का विरोध आपको भारी पड़ रहा है यदि आपकी ऐसी ही मानसिकता व आचरण रहा तो राजपूत समाज में हिंदूवादी संगठनों का विरोध करने हेतु कई दिग्विजय सिंह पैदा हो जायेंगे !!

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