Jauhar and Shaka जौहर और शाका

विश्व की सभी सभी जातियां अपनी स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए और समृद्धि के लिए निरंतर बलिदान करती आई है | मनुष्य जाति में परस्पर युद्धों का श्री गणेश भी इसी आशंका से हुआ कि कोई उसकी स्वतंत्रता छिनने आ रहा है तो कोई उसे बचाने के लिए अग्रिम प्रयास कर रहा है | और आज भी इसी आशंका के चलते आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक युद्ध छेड़ कर हमें अपनी स्वतंत्रता और सुरक्षा के लिए अग्रिम प्रयास जारी रखने होंगे |
राजस्थान की युद्ध परम्परा में “जौहर और शाकों” का विशिष्ठ स्थान है जहाँ पराधीनता के बजाय मृत्यु का आलिंगन करते हुए यह स्थिति आ जाती है कि अब ज्यादा दिन तक शत्रु के घेरे में रहकर जीवित नही रहा जा सकता, तब जौहर और शाके किए जाते थे |

जौहर : युद्ध के बाद अनिष्ट परिणाम और होने वाले अत्याचारों व व्यभिचारों से बचने और अपनी पवित्रता कायम रखने हेतु महिलाएं अपने कुल देवी-देवताओं की पूजा कर,तुलसी के साथ गंगाजल का पानकर जलती चिताओं में प्रवेश कर अपने सूरमाओं को निर्भय करती थी कि नारी समाज की पवित्रता अब अग्नि के ताप से तपित होकर कुंदन बन गई है | पुरूष इससे चिंता मुक्त हो जाते थे कि युद्ध परिणाम का अनिष्ट अब उनके स्वजनों को ग्रसित नही कर सकेगा | महिलाओं का यह आत्मघाती कृत्य जौहर के नाम से विख्यात हुआ |सबसे ज्यादा जौहर और शाके चित्तोड़ के दुर्ग में हुए | चित्तोड़ के दुर्ग में सबसे पहला जौहर चित्तोड़ की महारानी पद्मिनी के नेतृत्व में 16000 हजार रमणियों ने अगस्त 1303 में किया था |
शाका : महिलाओं को अपनी आंखों के आगे जौहर की ज्वाला में कूदते देख पुरूष कसुम्बा पान कर,केशरिया वस्त्र धारण कर दुश्मन सेना पर आत्मघाती हमला कर इस निश्चय के साथ रणक्षेत्र में उतर पड़ते थे कि या तो विजयी होकर लोटेंगे अन्यथा विजय की कामना हृदय में लिए अन्तिम दम तक शौर्यपूर्ण युद्ध करते हुए दुश्मन सेना का ज्यादा से ज्यादा नाश करते हुए रणभूमि में चिरनिंद्रा में शयन करेंगे | पुरुषों का यह आत्मघाती कदम शाका के नाम से विख्यात हुआ |

9 Responses to "Jauhar and Shaka जौहर और शाका"

  1. रंजन   December 14, 2008 at 5:03 am

    चित्तोड में रानी पद्मवति का जौहर का किस्सा सुन आज बी रोंगटे खड़े हो जाते है…

    जौहर शब्द तो प्रचलित है सुना हुआ था.. ’शाका’ मेरे लिये नया शब्द है. धन्यवाद.

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  2. नरेश सिह राठौङ   December 14, 2008 at 12:01 pm

    जौहर पढा हुआ था लेकिन शाका शब्द आपके द्वारा ही पता चला है । धन्यवाद आशा है इस प्रकार कि जानकारी आगे भी देते रहेगें।

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  3. ताऊ रामपुरिया   December 14, 2008 at 1:47 pm

    शाका शब्द राजपूत वीरो के साथ बडे सम्मान को प्राप्त है ! इसी वजह से आज भी उन रण बान्कुरों का नाम आदर और श्र्द्धा से याद किया जाता है !

    बहुत अच्छी जानकारी !

    राम राम !

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  4. वीरता से भरी अच्छी जानकारी!!!

    प्राइमरी का मास्टर का पीछा करें

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  5. dhiru singh {धीरू सिंह}   December 14, 2008 at 2:35 pm

    रानी पद्मिनी का जोहर हमारी गौरवशाली परम्परा का एक वीरतापूर्ण कदम था जो आज भी नसों मे जोश भर देता है . इस समय मे यही बलिदान गाथाये हम भारतीयों के सोये हुए सम्मान को जगा पाएँगी

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  6. विवेक सिंह   December 14, 2008 at 5:13 pm

    शाका मैंने आज ही जाना . शेखावत जी का आभार !

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  7. प्रकाश बादल   December 18, 2008 at 6:09 pm

    रतन भाई मुझे भी सिखाईये इतनी बढिया ब्लाग की सजावट एक बार फिर आपको बधाई सुन्दर रचना के साथ आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना

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  8. ePandit   May 10, 2012 at 1:15 pm

    औरों की तरह हम भी जौहर ही जानते थे, शाका आपसे ही सुना।

    वैसे एक प्रश्न है, पुरुषों और स्त्रियों का तो पता चल गया, बच्चों का ऐसी स्थिति में क्या करते थे?

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  9. rathod manharsinh   March 13, 2014 at 6:25 am

    the great rajputana

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