सेर नै लखमण

सेर नै लखमण
सेवापुरा रा हिंगळाजदान (HInglajdan klaviya) कविया साखा रा चारण कवि हा। महाकवि सूरजमल मीसण बूंदी वाळा रै पछै पाछला सईका में राजस्थान में हिंगळाजदान रा जोड़ रौ कवि नीं हुवौ। राज सम्मान में कविराजा सांवळदास धधवाड़िया उदैपुर अर महामहोपाध्याय मुरारदान आसिया रौ घणौ आघमान हौ पण पिंडताई अर कविता में हिंगळाजदान री बणावट, उकतां अर अनुप्रासां आगै बाकी रा सैंग री कवितावां पाणी भरती लागै। हिंगळाजदान री ओपमावां, काव्य-आभूषणां में कुन्नण में जड़ियोड़ा नगीना सा फबै। हिंगळाजदान रै अर बूड़सू ठाकुर लिछमणसिंघ मेड़त्या रै घणौ जीव-जौग नै हेत हिमळास हुंतौ।

अेक मौकै बूड़सू ठाकुरां नै कुचामण ठाकुर सेरसिंघ कुचामण बुलाया। कुचामण में हरियाजूंण रा भाखर में नौहत्था सेर री सिकार करी। उण दिन हिंगळाजदान भी बूड़सू लिछमणसिंघ रै साथ हुंता। सेरसिंघ हिंगळाजदान री कविता री बडाई सुण मेली ही। सेर री सिकार माथै कविता बणावण तांई सेरसिंघ हिंगळाजदान नै कैयौ।
हिंगळाजदान उठै संू आप रै गांव आय ‘मृगया, उपमावां, स्लेषां अर अनुप्रासां रै सागै-सागै सिकार रौ छवि चित्राम सौ कोर दियौ। प्रक्रति री सोभा, भाखरां री बणगट, सेर रौ आपाण, सेरसिंघ री निसाणाबाजी इत्याद रौ सांगौपांग बरणन कियौ अर उण खण्डकाव्य री एक फड़द कुचामण मेली। ठाकर सेरसिंघ ‘मृगया मृगेन्द्र’ ने सुण अर मुगध व्हैग्या। कवि हिंगळाजदान नै पुरस्कार देवण तांई आप रा कामदार नै सेवापुरै मेल अर उणनै कुचामण बुलावौ भेजियौ। हिंगळाजदान खुद नीं आया अर अेक कवित बणाय अर कामदार साथै भेजियौ, जिण री पाछली भड़ ही-

मै लखमण नै जांचियौ अब किम सेरां जांच्यौ जाय। इण रौ सीधौ सौ अरथ तौ औ कै- म्हैं बूड़सू रा लिछमणसिंघजी कनै सूं ईनाम लियौ अब कुचामण रा सेरसिंघजी कनै सूं कींकर लेवूँ। दूजौ भाव ओ कै म्हैं लखमण (लाख- मण) नै जांचियौ अब मण रै चालीसवें भाग सेर (तोल विसेस) नै कांई जांचूँ।
पछै कुचामण ठाकुर सेरसिंघ अेक सौ अेक ऊंट बाजरा रा लदवाय नै सेवापुरै हिंगळाजदानजी रै घरै भिजवाया। दाता अर पाता दोनुवां री गुणग्रायकी देखण जोग है।

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