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गौ-सेवक या अड़ंगेबाज

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आजकल शहरी युवाओं में गौ-सेवा के नाम पर अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा बढाने की होड़ सी चल रही है. पशु तस्करी रोकने के नाम पर ऐसे दुस्साहसी युवक गौवंश पालकों द्वारा गायों को ईलाज या खरीद फरोख्त कर इधर उधर लाने ले जाने के दौरान हमला कर उसे गौ तस्कर प्रचारित कर वाह वाही लुट रहे है. सोशियल साइट्स पर इस तरह गौ-पालकों पर हमले कर गायें बचाने का दावा करने व फोटो अपडेट करने की खासी संख्या देखी जा सकती है.

इसी तरह कल बरसाना की एक गौ-शाला की कुछ बीमार गायों का दिल्ली के एक अस्पताल से ईलाज करवाकर वापस बरसाना स्थित गौ-शाला ले जाते समय बल्लभगढ़ के समीप इसी तरह के कथित गौ-रक्षकों द्वारा हमला किया गया और गायों को ले जाने वालों को बुरी तरह पीटा भी गया. इन कथित गौ-सेवकों ने तर्क चालकों से पूछताछ करने की भी जहमत नहीं उठाई और उन्हें पीट पीट कर घायल कर दिया.

इस तरह के कुकृत्यों से कुछ लोग भले अपने आपको गौ-रक्षक व महान गौ-सेवक साबित भले कर लें लेकिन उनका इस तरह का कुकृत्य गौ-वंश की रक्षा नहीं, गौ-वंश का बुरा ही करने वाला है.

यह बहुत ही अफसोसजनक व चिंतनीय है कि गौ-संरक्षण के नाम पर ऐसे लोग जिनकी कई पुश्तों ने कभी गाय नहीं पाली और ना वे उन्होंने कभी गाय पालने की सोची होगी पर गौ-संरक्षण के नाम पर अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षा चमकाने में लगे है.
ऐसे अराजक तत्व गौ-पालकों के लिए एक और जहाँ मुसीबत बन रहे है, वहीं दूसरी और इनके दुष्प्रचार से साम्प्रदायिक सौहार्द भी बिगड़ रहा है.

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