प्राचीन गणेश्वर सभ्यता और चर्म रोग मुक्ति कुण्ड

प्राचीन गणेश्वर सभ्यता और  चर्म रोग मुक्ति कुण्ड

अपने गृह जिले सीकर की प्राचीन गणेश्वर सभ्यता (Ganeshwar Civilization) व गणेश्वर धाम (Ganeshwar Mahadev) के बारे में कई मित्रों से सुना था पर कभी वहां जाना नहीं हुआ. जबकि इस स्थान से छ: सात किलोमीटर दूर से बचपन से (सीकर-कोटपुतली-दिल्ली मार्ग) आना जाना रहता है, लेकिन इतने पास से गुजरने के बावजूद कभी यहाँ जाना नहीं हुआ. पिछले माह दिल्ली से सीकर कार से जाने का कार्यक्रम बना तो तय किया कि इस बार इस स्थान की यात्रा अवश्य की जाएगी.

इस यात्रा में पाटन से निकलते ही हमने गणेश्वर की और मुड़ने वाला रास्ता खोजना शुरू कर दिया. आखिर नीमकाथाना (Neem Ka Thana) बाईपास पर हमें वो सडक मिल गई जो प्राचीन सभ्यता वाले गांव गणेश्वर धाम की और जा रही थी. गांवडी नामक गांव गणेश्वर के पास होने की वजह से गणेश्वर को “गांवडी गणेश्वर” (Ganwari Ganeshwar) भी कहा जाता है. सीकर जिले के नीमकाथाना कस्बे से लगभग 10 किलोमीटर दूर अरावली पर्वत श्रंखला की सुरम्य वादियों के बीच बसे इस गांव के भवन निर्माण को देखते ही आभास हो जाता है कि यह एक प्राचीन गांव है. इस गांव में पुरातत्व विभाग द्वारा खुदाई भी की गई थी, जिसमें कई ताम्बे के पाषाण औजार मिले. चूँकि राजस्थान की खेतड़ी की तांबे की खदाने यहाँ से ज्यादा दूर नहीं है अत: उत्खनन में इतने प्राचीन ताम्र औजार मिलने से साफ़ है कि यहाँ के निवासियों के पास प्राचीन काल से तांबा निकालने की तकनीक मौजूद थी. उत्खनन ने यह साफ़ कर दिया कि कभी यहाँ भी एक उन्नत संस्कृति, सभ्यता मौजूद थी, जो समय के थपेड़ों के साथ बनती बिगड़ती रही.

गांव में गणेश्वर मंदिर के बारे में पूछताछ के बाद पता चला कि उंचाई पर एक धाम बना हुआ है जहाँ सभी देवताओं के अलग-अलग मंदिर बने है. धाम पर पहुंचे ही देखा सामने एक द्वार बना है, द्वार से प्रवेश करते ही चारों और छोटे-बड़े विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिर नजर आते है, और नजर आते है ऊँची चार दिवारी के भीतर बने एक कुण्ड में नहाते कई लोग. इस कुण्ड में निर्बाध पहाड़ियों से पानी आता रहता है जिसमें सल्फर की मात्रा है यही वजह है कि यहाँ आने वाला हर श्रद्धालु इस कुण्ड में चर्म रोग के निदान हेतु डुबकी लगाना नहीं भूलता. चर्म रोगी भी यहाँ अपने रोग का निदान करने हेतु नहाने आते है. इस तरह प्राचीन सभ्यता, धार्मिक महत्त्व व स्वास्थ्य लाभ हेतु यह गांव पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना है.

चूँकि गांव पहाड़ी पर बसा है अत: यहाँ से दूर दूर तक अरावली पर्वत माला की तलहटी का सुन्दर नजारा भी देखने को मिलता है. कुलमिलाकर घुमक्कड़ों के लिए यह गांव यात्रा हेतु एक शानदार जगह है. जो शहरी कोलाहल से दूर एक शांत जगह है.

br/>

नोट : यहाँ जाने के लिए सीकर-नीमकाथाना- कोटपुतली रोड़ पर नीमकाथाना बाईपास पर गांवडी के लिए सड़क जाती है उसी सड़क पर बाईपास से लगभग सात किलोमीटर दूर गणेश्वर गांव स्थित है!

How to Reach Ganeshwar Dham, How to reach ganeshwar civilization, way to ganeshwar mahadev, way to ganwari-gaenshwar,

2 Responses to "प्राचीन गणेश्वर सभ्यता और चर्म रोग मुक्ति कुण्ड"

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (03-05-2015) को "कौन सा और किस का दिवस" (चर्चा अंक-1964) पर भी होगी।

    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर…!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक
    —————

    Reply
  2. Onkar   May 3, 2015 at 9:00 am

    सुन्दर वर्णन

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published.