दामोदर राठी : आजादी की लड़ाई के आर्थिक स्तम्भ

दामोदर राठी : आजादी की लड़ाई के आर्थिक स्तम्भ

बिलायती बनियों (अंग्रेज) के राज में देश के कई देशी बनियों (सेठों) ने अंग्रेजों के संरक्षण में अपने व्यापार का खूब प्रसार कर धन कमाया| उनके अंग्रेजों के साथ होने का ही कारण था कि ये सदैव क्रांतिकारियों के निशाने पर रहते थे| शेखावाटी के क्रांतिवीर डुंगजी जवाहर जी हो या बलजी भूरजी, इनका देशी सेठो से सदैव छतीस का आंकड़ा रहा| इसके बावजूद देश में ऐसे कई सेठ थे जिन्होंने अपने व्यापार, कल कारखानों की कतई चिंता किये बगैर देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले क्रांतिवीरों का कंधे से कन्धा मिलाकर साथ दिया| इसी श्रंखला में एक नाम है ब्यावर के सेठ दामोदर राठी|

दामोदर राठी Damodar Rathi तत्कालीन समय के एक प्रमुख उद्योगपति थे| वे माहेश्वरी वैश्य थे| ब्यावर में उनका कृष्णा मिल्स के नाम से कपड़ा बनाने का बहुत कारखाना था जो उनके पिता ने स्थापित किया था| जिसे विस्तार देकर दामोदर राठी ने मेरवाड़ा (अजमेर क्षेत्र) के हजारों युवाओं को रोजगार देकर प्रशंसनीय कार्य किया था| दामोदर राठी के पिता खींवराज का पैतृक स्थान परमाणु विस्फोट परिक्षण के नाम पर प्रसिद्ध पोकरण क़स्बा था|

श्यामजी कृष्ण वर्मा जो अपने क्रान्तिकारी विचारों का क्रियाकलापों के लिए मशहूर थे एवं कुछ काल के लिए मेवाड़ राज्य के दीवान भी रह चुके थे- कृष्णा मिल्स के कार्य संचालन हेतु कुछ समय तक ब्यावर नगर में रहे थे| ऐसे तपे हुए क्रांतिकारी के सत्संग से दामोदर राठी में देशभक्ति और उग्र राष्ट्रीयता का प्रादुर्भाव हुआ| उन्होंने अपने धंधे और जन्मजात स्वाभाव के अनुकूल क्रांति में सक्रीय भाग न लेकर द्रव्य द्वारा क्रांति कर्मियों को अमूल्य एवं आवश्यकीय सहायता प्रदान की| राजस्थान में उस काल आहूत क्रांति यज्ञ का उन्हें आर्थिक स्तम्भ कहें तो अत्युक्ति नहीं होगी| प्रथम बार राठी जी के माध्यम से ब्यावर के पास खरवा Kharwa नामक ठिकाने के शासक राव गोपाल सिंह Rao Gopal Singh जो उस काल उस क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी थे, का श्यामजीकृष्ण वर्मा से परिचय हुआ| और श्यामजी कृष्ण वर्मा ने राव गोपाल सिंह के रूप में प्रथम बार एक क्रांतिकारी वीर राजपूत के व्यक्तित्व का दर्शन किया| प्रमुख क्रांतिकारी योगिराज अरविन्द घोष जब श्यामजी कृष्ण वर्मा से मिलने ब्यावर आये तो श्यामजी कृष्ण वर्मा ने उनकी मुलाक़ात राव गोपाल सिंह खरवा से कराई| इस तरह दामोदर राठी के माध्यम में कई प्रमुख क्रांतिकारी आपस में मिले|

उस काल खरवा राष्ट्रीयता का गढ़ का बना हुआ था| राव गोपाल सिंह के नेतृत्व में देश प्रेम की भावना वहां के जनमानस में समुद्र की लहरों की भांति हिलोरें ले रही थी| दामोदर राठी बार-बार खरवा आते थे| इस वजह से उनसे परिचित होने के बाद वहां के महाजनों में भी देश के प्रति समर्पित भावना का उदय होने लगा| 14 मई 1907 को खरवा के महाजनों व दुकानदारों ने अपनी देशभक्ति का जबदस्त प्रदर्शन किया| उन्होंने उस दिन से बिलायती खांड बेचना बंद कर दिया और विदेशी वस्त्रों की होली जलाई| सभी ने स्वदेशी वस्त्र पहनने की शपथ भी ली| उनके इस कार्य में खरवा व आस-पास के क्षेत्र की जनता के प्रत्येक वर्ग ने अपना सक्रीय सहयोग दिया|

इस तरह दामोदर राठी ने अपने व्यापार पर आने वाले किसी भी तरह के जोखिम की परवाह ना करते हुए देश के स्वतंत्रता आन्दोलन में अपनी सक्रीय भागीदारी निभाई| नमन है इस देश भक्तों की देश भक्ति को !

सन्दर्भ पुस्तक : सुरजन सिंह शेखावत, झाझड़ द्वारा लिखित “ महान क्रांतिकारी राव गोपाल सिंह खरवा”

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